ट्रंप ने ने की पुतिन से तेल की डील, जेलेंस्की ने फैसले को बताया ‘कमजोर’
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को दावा किया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद मॉस्को डीजल ईंधन की बड़ी खेप जारी करने पर सहमत हो गया है। ट्रंप ने अमेरिकी और वैश्विक बाजार में ईंधन की आपूर्ति बढ़ाने के लिए रूस पर लगे कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील भी दी है। इस फैसले का उद्देश्य अमेरिका में डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को कम करना बताया जा रहा है।
हालांकि, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने ट्रंप के इस कदम की आलोचना करते हुए इसे ‘कमजोर’ और सहयोगियों के लिए अनुचित फैसला करार दिया। रूस पर 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद अमेरिका और उसके सहयोगियों ने कई दौर के प्रतिबंध लगाए थे। ऐसे में प्रतिबंधों में राहत देने का फैसला अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका में मध्यावधि चुनाव नजदीक हैं और महंगाई तथा जीवनयापन की बढ़ती लागत को लेकर मतदाताओं में नाराजगी बढ़ रही है। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सामने कांग्रेस में अपना बहुमत बनाए रखने की चुनौती है।
रूस तत्काल 3 लाख टन से अधिक डीजल भेजेगा: ट्रंप
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि रूस तत्काल 3 लाख टन से अधिक डीजल ईंधन अमेरिकी और वैश्विक बाजार में उपलब्ध कराएगा।
उन्होंने आगे कहा कि नवंबर में रूस 5 लाख टन डीजल की आपूर्ति करेगा और इसके बाद 10 लाख टन की खेप भेजी जाएगी। ट्रंप के मुताबिक, आगे चलकर इससे भी बड़ी मात्रा में ईंधन बाजार में उपलब्ध कराया जा सकता है। क्रेमलिन ने भी कहा कि रूस ने अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में तेल तथा पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करने की अपनी तत्परता दोहराई है।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को एक अस्थायी लाइसेंस जारी किया, जिससे अप्रैल 2027 तक रूसी डीजल को वैश्विक बाजारों में पहुंचाने की अनुमति मिल सकेगी। ट्रंप ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि अमेरिकी नागरिकों, विशेषकर किसानों, पशुपालकों और ट्रक चालकों के लिए ईंधन की कीमतें कम करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अमेरिका में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल
अमेरिका में ईंधन की कीमतों में फरवरी के अंत से तेजी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, नियमित पेट्रोल की औसत कीमत 46 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 4.37 डॉलर प्रति गैलन हो गई है। वहीं, डीजल की कीमत में करीब 67 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह 6.28 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है।
ईंधन की कीमतों में इस उछाल के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष एक प्रमुख कारण है। फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही बाधित कर दी थी।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की वैश्विक आपूर्ति पर दबाव पड़ा है। ट्रंप ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए रूसी रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों को भी जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, मौजूदा घटनाक्रम में ईरान के साथ संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं।
जेलेंस्की बोले- सहयोगियों के लिए अनुचित और कमजोर फैसला
रूस को प्रतिबंधों में राहत देने के अमेरिकी फैसले पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने नाराजगी जताई है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि यह फैसला ईमानदार नहीं है और सहयोगियों के साथ व्यवहार के लिहाज से उचित नहीं है। जेलेंस्की ने इसे कमजोर निर्णय भी बताया।
यूक्रेन का मानना है कि रूस पर आर्थिक दबाव बनाए रखना युद्ध समाप्त कराने के प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के व्यापार को बढ़ावा देने वाले कदम से मॉस्को को आर्थिक राहत मिल सकती है।
दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन का जोर ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाकर अमेरिकी उपभोक्ताओं को राहत देने पर है। इस तरह ईंधन की कीमतें कम करने की घरेलू जरूरत और रूस पर दबाव बनाए रखने की रणनीति के बीच टकराव दिखाई दे रहा है।
यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए मियामी में बातचीत
रूस से डीजल आपूर्ति को लेकर हुए घटनाक्रम के बीच शुक्रवार को अमेरिका और यूक्रेन के वार्ताकारों ने मियामी में मुलाकात की। इस बातचीत का उद्देश्य रूस-यूक्रेन युद्ध में जारी गतिरोध को खत्म करने के संभावित रास्ते तलाशना था।
अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने बातचीत को रचनात्मक बताया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने सर्दियों से पहले तनाव कम करने और रूस के साथ युद्ध समाप्त करने के संभावित उपायों पर चर्चा की।
यह बैठक पिछले महीने विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर की मॉस्को और कीव यात्राओं के बाद हुई। वॉशिंगटन युद्ध समाप्त कराने के लिए वार्ता प्रक्रिया को फिर से गति देने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब तक ठोस प्रगति सीमित रही है।
मियामी में हुई चर्चा में सुरक्षा गारंटी, यूक्रेन और यूरोप की दीर्घकालिक सुरक्षा व्यवस्था तथा युद्ध के बाद यूक्रेन के पुनर्निर्माण में सहयोग जैसे मुद्दे शामिल थे। बैठक में ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के अधिकारियों के साथ नाटो तथा यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
डोनबास पर अटका है शांति समझौता
रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक क्षेत्रीय नियंत्रण का विवाद है। रूस यूक्रेन के पूर्वी डोनबास क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण की मांग करता रहा है, जिसमें वे इलाके भी शामिल हैं जो अभी यूक्रेन के कब्जे में हैं।
जेलेंस्की यूक्रेन के नियंत्रण वाले क्षेत्रों को रूस के हवाले करने से इनकार कर चुके हैं। उनका कहना है कि ऐसा करने से रूस को भविष्य में एक और हमले के लिए आधार मिल सकता है।
रूस फिलहाल यूक्रेन के लगभग पांचवें हिस्से पर कब्जा किए हुए है। दोनों पक्षों के बीच क्षेत्रीय मांगों को लेकर मतभेद के कारण युद्ध समाप्त कराने के प्रयास बार-बार अटकते रहे हैं। सर्दियां नजदीक आने के साथ ऊर्जा और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमलों की आशंका ने भी शांति वार्ता की जरूरत बढ़ा दी है।
यूक्रेन में जारी संघर्ष के बीच गुरुवार को अग्रिम मोर्चे के शहर क्रामातोर्स्क में बसों पर रूसी हमले में 30 लोगों की मौत होने की खबर सामने आई। इस घटना ने युद्ध के मानवीय प्रभाव को एक बार फिर उजागर किया है।
लगातार हमलों और बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान के बीच यूक्रेन तथा उसके सहयोगी युद्ध समाप्त करने के लिए किसी समझौते की तलाश में हैं। हालांकि, क्षेत्रीय नियंत्रण और भविष्य की सुरक्षा गारंटी जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
