मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 27% OBC कोटा कानून को रद्द किया, प्रह्लाद पटेल ने कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के मंत्री प्रह्लाद पटेल ने शुक्रवार को कांग्रेस पर उस 2019 के कानून को रद्द करवाने का आरोप लगाया, जिसके तहत राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण को बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि तत्कालीन कमलनाथ सरकार द्वारा लाए गए इस कानून में संवैधानिक कमियां थीं और अब कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया है, जिससे आरक्षण का कोटा वापस 14 प्रतिशत हो गया है।
राज्य के पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री पटेल ने कहा कि बीजेपी ने हमेशा पिछड़े वर्गों का समर्थन किया है और मोहन यादव सरकार सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक हुई थी और सबकी सहमति से कोर्ट में राज्य का पक्ष रखा गया था।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शुक्रवार को कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार द्वारा बनाए गए 2019 के कानून को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने अपने 159 पन्नों के आदेश में राज्य की भर्ती एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे उन 13 प्रतिशत पदों को तीन महीने के भीतर भरें, जिन्हें आरक्षण बढ़ाने वाले कानून को अनारक्षित श्रेणी की ओर से कानूनी चुनौती मिलने के बाद रोक दिया गया था।
पटेल ने एक बयान में कहा, “हमने हमेशा पिछड़े वर्गों का समर्थन किया है। चाहे OBC आरक्षण का मुद्दा हो या पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का, बीजेपी ने पूरी जिम्मेदारी के साथ यह काम किया है।” मौजूदा सरकार के रुख का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई थी और सबकी सहमति से कोर्ट में पक्ष रखा गया था।
पटेल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस किसी भी वर्ग की हितैषी नहीं है और उसे केवल अपने राजनीतिक हितों की परवाह है। उन्होंने कहा, “यह सच है कि कांग्रेस को किसी भी वर्ग से कोई लगाव नहीं है; उसे केवल अपने राजनीतिक हितों की चिंता है।” उन्होंने दावा किया कि कोर्ट ने माना है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने राजनीतिक फायदे के लिए और जल्दबाजी में अध्यादेश लाया था, जिसमें ऐसी संवैधानिक खामियां थीं जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता था।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के लोगों, खासकर युवाओं को यह समझना चाहिए कि तत्कालीन सरकार ने संवैधानिक प्रावधानों को नजरअंदाज किया था। पटेल के मुताबिक, कमलनाथ सरकार ने 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा से ज़्यादा आरक्षण देने का कोई ठोस कारण नहीं बताया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस से मेरा सवाल है: हमने आपके साथ मिलकर यह लड़ाई लड़ी, लेकिन आपने उन संवैधानिक सीमाओं पर कभी चर्चा क्यों नहीं की?”
पटेल ने आगे आरोप लगाया कि भले ही उस समय तक पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा मिल चुका था, फिर भी कमलनाथ सरकार ने आयोग की सहमति नहीं ली। उन्होंने कहा, “सरकार की इसी लापरवाही की वजह से आज यह स्थिति पैदा हुई है।” उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए ज़रूरी कदम उठाएगी और सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष मज़बूती से रखेगी। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार ने पहले भी पूरी जवाबदेही के साथ कोर्ट में अपना पक्ष रखा है और आगे भी ज़िम्मेदारी के साथ यह लड़ाई लड़ती रहेगी।”
पटेल ने कांग्रेस पर प्रोपेगैंडा की राजनीति करने का आरोप भी लगाया और कहा कि चुनावी फ़ायदे के लिए जल्दबाज़ी में अध्यादेश पास करते समय उसने 50 प्रतिशत आरक्षण की संवैधानिक सीमा को नज़रअंदाज़ किया। अब हाई कोर्ट के फ़ैसले ने उस कानून को रद्द कर दिया है, OBC कोटा को फिर से 14 प्रतिशत कर दिया है और भर्ती एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे अनारक्षित श्रेणी के तहत रोके गए पदों को तीन महीने के भीतर भरें।
