सुप्रीम कोर्ट ने केवल इस्लाम में धर्म-परिवर्तन के आधार पर पिछड़े वर्ग के कोटे पर रोक लगाई, बीजेपी ने फैसले का स्वागत किया

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का स्वागत किया, जिसमें कहा गया है कि इस्लाम अपनाने के बाद, पिछड़े वर्गों से आने वाले हिंदू अब उस श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ नहीं ले सकते।
बीजेपी ने इस फैसले को ‘ऐतिहासिक’ बताया और कहा कि यह कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की “तुष्टिकरण की राजनीति” के लिए एक “बड़ा झटका” है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुरानी सामाजिक व्यवस्था के कारण जो पिछड़ापन था, वह धर्म परिवर्तन के बाद आगे नहीं ले जाया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि जो व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म का पालन करता है, उसे ‘अनुसूचित जाति’ (SC) का सदस्य नहीं माना जा सकता। नई दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, पार्टी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने इस फैसले को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधा।
भाटिया ने कहा, “इस फैसले के आने के बाद ‘कांग्रेस जिन्ना पार्टी’ की तुष्टिकरण की राजनीति को एक बड़ा झटका लगा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा इस्लाम मानने वाले लोगों के लिए आरक्षण की वकालत की है।
भाटिया ने दावा किया कि यह फैसला समाजवादी पार्टी (SP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए भी एक “बड़ा झटका” है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सत्ता में रहते हुए इन पार्टियों ने “तुष्टिकरण की राजनीति” की थी।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने मद्रास हाई कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की याचिका को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा था कि कोई व्यक्ति केवल धर्म परिवर्तन के आधार पर ‘पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम)’ श्रेणी के तहत आरक्षण का दावा नहीं कर सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें धर्म परिवर्तन करने वाले मुसलमानों को आरक्षण देने वाली तमिलनाडु सरकार की अधिसूचना को रद्द कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि इस फैसले में किसी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।
इस फैसले के तहत, केवल इस्लाम अपनाने के आधार पर पिछड़े वर्ग के आरक्षण का लाभ लेने से मना कर दिया गया है। इसी वजह से बीजेपी ने इसे कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के लिए एक बड़ा झटका बताया है।
