नक्सल-मुक्त भारत मोदी सरकार की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक: लोक सभा में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश से नक्सलवाद अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है और यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक बताया। गृह मंत्री के अनुसार, वर्षों से देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती बना नक्सलवाद अब निर्णायक रूप से खत्म कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की बहादुरी और सरकार की स्पष्ट नीति के कारण यह संभव हो सका। सरकार अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेज़ी से विकास और स्थिरता स्थापित करने पर केंद्रित है।
लोकसभा में वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद, उसके इतिहास, कारणों और सरकार की रणनीति पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नक्सलवाद का मूल कारण गरीबी या विकास की कमी नहीं, बल्कि एक विशेष वामपंथी विचारधारा है, जिसने दशकों तक देश के कई हिस्सों को हिंसा और पिछड़ेपन की ओर धकेला।
गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद की शुरुआत 1960 के दशक के अंत में हुई और धीरे-धीरे यह एक बड़े क्षेत्र में फैल गया जिसे “रेड कॉरिडोर” कहा गया। यह क्षेत्र देश के 12 राज्यों तक फैल गया था और यहां रहने वाले करोड़ों लोग लंबे समय तक गरीबी और असुरक्षा में जीते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस विचारधारा ने भोले-भाले आदिवासियों को भ्रमित कर हथियार उठाने के लिए प्रेरित किया और लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ खड़ा किया।
उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलियों ने गांवों में स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और बैंक जैसी बुनियादी सुविधाओं को नष्ट किया, ताकि विकास वहां तक न पहुंचे और उनका प्रभाव बना रहे। उनके अनुसार, यह कहना गलत है कि विकास न होने के कारण नक्सलवाद फैला; बल्कि नक्सलवाद के कारण विकास रुक गया।
गृह मंत्री ने वामपंथी विचारधारा की आलोचना करते हुए कहा कि इसका मूल सिद्धांत लोकतंत्र में विश्वास नहीं करता, बल्कि “सत्ता बंदूक की नली से निकलती है” जैसे विचारों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि यह विचारधारा संविधान, शासन और सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर कर एक प्रकार का वैक्यूम पैदा करती है, जिससे हिंसा और अराजकता फैलती है।
उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन का गठन विदेशी विचारधाराओं से प्रभावित होकर हुआ। उनके अनुसार, इस विचारधारा का उद्देश्य संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करना नहीं बल्कि उसका विरोध करना रहा है। उन्होंने कहा कि समय के साथ विभिन्न नक्सली संगठनों का गठन और विलय होता रहा, लेकिन उनका मूल उद्देश्य सशस्त्र क्रांति ही बना रहा।
गृह मंत्री ने पूर्व सरकारों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय तक शासन में रहने के बावजूद वे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास नहीं पहुंचा सकीं। उन्होंने यह सवाल उठाया कि यदि विकास ही मुख्य कारण होता, तो देश के अन्य गरीब क्षेत्रों में नक्सलवाद क्यों नहीं फैला।
उन्होंने कहा कि 2014 में मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद इस समस्या से निपटने के लिए एक स्पष्ट नीति और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ काम किया गया। सुरक्षा, विकास और समन्वय—इन तीन स्तंभों पर आधारित रणनीति अपनाई गई।
सरकार ने एक ओर जहां सुरक्षा बलों को मजबूत किया, वहीं दूसरी ओर सड़कों, मोबाइल टावरों, बैंकिंग सुविधाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से विस्तार किया। पिछले वर्षों में हजारों किलोमीटर सड़कें बनाई गईं, हजारों मोबाइल टावर लगाए गए और सैकड़ों स्कूल, आईटीआई और कौशल विकास केंद्र स्थापित किए गए।
गृह मंत्री ने बताया कि नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या में भारी कमी आई है। जहां पहले 100 से अधिक जिले प्रभावित थे, अब यह संख्या बहुत कम रह गई है। कई बड़े ऑपरेशन चलाकर नक्सली संगठनों के शीर्ष नेतृत्व को खत्म किया गया या उन्हें आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए पुनर्वास नीति बनाई है, जिसमें आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाते हैं। इससे बड़ी संख्या में नक्सलियों ने मुख्यधारा में वापसी की है।
गृह मंत्री ने सुरक्षा बलों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, कोबरा कमांडो, राज्य पुलिस, विशेष रूप से छत्तीसगढ़ पुलिस और स्थानीय आदिवासियों ने इस अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए उन्होंने नक्सलवाद को कमजोर करने में बड़ी भूमिका निभाई।
उन्होंने तथाकथित “अर्बन नक्सल” और कुछ बुद्धिजीवियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे केवल नक्सलियों के मानवाधिकारों की बात करते हैं, लेकिन हिंसा के शिकार आम नागरिकों, शहीद जवानों और उनके परिवारों की पीड़ा को नजरअंदाज करते हैं।
गृह मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों और संगठनों ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नक्सलवाद को समर्थन दिया, जिससे यह समस्या और बढ़ी। उन्होंने कहा कि यह समर्थन नक्सलियों का मनोबल बढ़ाने वाला साबित हुआ।
उन्होंने विश्वास जताया कि देश जल्द ही पूरी तरह नक्सलमुक्त होगा। उनके अनुसार, अब नक्सली आंदोलन अपने अंतिम चरण में है और सरकार की नीतियों के कारण इसका आधार कमजोर हो चुका है।
अंत में उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल सुरक्षा बलों के माध्यम से समस्या का समाधान करना नहीं है, बल्कि विकास और न्याय के जरिए स्थायी शांति स्थापित करना है। उन्होंने दोहराया कि जो लोग हथियार छोड़कर बातचीत करना चाहते हैं, उनके लिए दरवाजे खुले हैं, लेकिन जो हिंसा का रास्ता अपनाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
