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अखिलेश यादव ने राहुल गांधी की सीट रायबरेली से समाजवादी पार्टी का यूपी चुनाव प्रचार शुरू किया, बीजेपी की चुटकी

Akhilesh Yadav launched the Samajwadi Party's UP election campaign from Rahul Gandhi's constituency, Raebareli; BJP takes a digचिरौरी न्यूज

रायबरेली: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। रायबरेली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग ने PDA यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के वोटों की कथित “चोरी” में मदद की और इसी वजह से सपा सरकार बनाने से वंचित रह गई।

अखिलेश यादव अपनी ‘PDA रथ’ यात्रा के तहत रायबरेली पहुंचे थे। कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले इस इलाके में आयोजित सभा में उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने लोगों का भरोसा खो दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग ने एक “कठपुतली” की तरह काम किया।

अखिलेश यादव ने कहा कि अगर 2022 में कथित “वोट चोरी” नहीं हुई होती, तो उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बन गई होती। उन्होंने महंगाई जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी को पता था कि जनता इन मुद्दों पर उसके पक्ष में मतदान नहीं करेगी, इसलिए चुनावी मशीनरी का इस्तेमाल किया गया।

2027 में गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने का ऐलान

अखिलेश यादव ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी गठबंधन के साथ चुनाव लड़ेगी और सीटों के बंटवारे का आधार जीतने की क्षमता होगा।

उन्होंने कहा, “हम गठबंधन करेंगे। जिस सीट पर जो जीत सकता है, वह सीट उसे मिलनी चाहिए।” 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि विपक्षी गठबंधन ने बीजेपी को हराया है और 2027 में भी इसी दिशा में काम किया जाएगा।

2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में सपा ने 37 और कांग्रेस ने 6 सीटें जीती थीं। दोनों दलों ने मिलकर 43 सीटें हासिल की थीं, जबकि बीजेपी को 33 सीटों पर जीत मिली थी।

‘बुलडोजर राजनीति’ और PDA पर जोर

अखिलेश यादव ने अपने भाषण में PDA को सपा की राजनीतिक रणनीति का प्रमुख आधार बताया। उन्होंने ‘बुलडोजर राजनीति’ का भी मुद्दा उठाया और कहा कि PDA आंदोलन से ऐसी राजनीति को चुनौती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि 2027 का चुनाव केवल सरकार बदलने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऐसी राजनीति को स्थायी रूप से खत्म करने का जनादेश देगा। अखिलेश ने जून 2023 में PDA का विस्तार ‘पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक’ के तौर पर किया था। यह सामाजिक गठजोड़ सपा की चुनावी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

UCC, रोजगार और स्वास्थ्य पर भी किए वादे

सपा प्रमुख ने समान नागरिक संहिता (UCC) के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कानून लाने से पहले नागरिकों के बीच समानता सुनिश्चित की जानी चाहिए। रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सपा की सरकार बनने पर युवाओं को रोजगार देने और सरकारी भर्तियां बढ़ाने पर काम किया जाएगा। उन्होंने आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म करने की बात भी कही।

अखिलेश यादव ने अस्पतालों में मुफ्त इलाज का वादा करते हुए कहा कि इलाज के लिए लोगों को किसी कार्ड की तलाश नहीं करनी पड़ेगी। उन्होंने राज्य में बंद किए गए प्राथमिक स्कूलों को दोबारा खोलने और सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की बात भी कही।

अखिलेश यादव की रायबरेली यात्रा का मुख्य आकर्षण उनका विशेष रूप से तैयार किया गया ‘PDA रथ’ रहा। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पहली बार सामने आए इस बहुरंगी मोटराइज्ड रथ पर ‘समाजवादी PDA यात्रा’ और ‘PDA ही परिवर्तन लाएगा’ जैसे नारे लिखे हैं।

रथ पर PDA का अर्थ ‘पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक’ भी लिखा गया है। इसके अलावा कई प्रमुख हस्तियों और दलित नेताओं के चित्र लगाए गए हैं। रथ पर ‘जो पीड़ित, वो PDA’ का नारा भी लिखा है। इसके लिए नीले रंग का इस्तेमाल किया गया है, जो बहुजन और आंबेडकरवादी राजनीतिक आंदोलन तथा बहुजन समाज पार्टी (BSP) से जुड़ा रहा है।

अखिलेश यादव ने रथ की तुलना महाभारत के कुरुक्षेत्र से करते हुए भगवान कृष्ण के भगवद्गीता के उपदेशों का भी उल्लेख किया।

रायबरेली को चुनने के राजनीतिक मायने

अखिलेश यादव की रायबरेली यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी यहां के मौजूदा लोकसभा सांसद हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने बीजेपी उम्मीदवार दिनेश प्रताप सिंह को हराया था।

रायबरेली की स्थानीय राजनीति में ऐसे कई नेता भी हैं, जिनका अतीत कांग्रेस या सपा से जुड़ा रहा है। बीजेपी नेता और मंत्री मनोज कुमार पांडेय पहले सपा में थे, जबकि राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह पहले कांग्रेस में रह चुके हैं। रायबरेली सदर की विधायक अदिति सिंह भी पहले कांग्रेस में थीं और अब बीजेपी में हैं।

बीजेपी ने साधा निशाना

अखिलेश यादव के रायबरेली दौरे पर बीजेपी ने भी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने दावा किया कि अखिलेश ने जानबूझकर कांग्रेस के मजबूत क्षेत्र रायबरेली को चुना और इसे सपा-कांग्रेस गठबंधन के भीतर जारी राजनीतिक खींचतान से जोड़कर देखा।

उन्होंने कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि अगर सपा रायबरेली से अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रही है तो कांग्रेस को भी मैनपुरी और इटावा से अपना चुनाव अभियान शुरू करना चाहिए।

त्रिपाठी ने सपा कार्यकर्ताओं के लखनऊ से रायबरेली आने का जिक्र करते हुए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के विकास कार्यों और सड़कों का भी हवाला दिया। वहीं, बीजेपी की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के प्रमुख और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी अखिलेश के PDA अभियान पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि रायबरेली में PDA अभियान के जरिए “गुंडों” को अशांति पैदा करने का संकेत दिया जा रहा है।

सीट बंटवारे पर रहेगी नजर

2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था और उत्तर प्रदेश में दोनों दलों ने मिलकर 43 सीटें जीती थीं। इसके बाद से ही 2027 के विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर चर्चा बनी हुई है।

अब अखिलेश यादव के यह कहने के बाद कि सपा 2027 में गठबंधन के साथ चुनाव लड़ेगी और सीटों का बंटवारा जीतने की क्षमता के आधार पर होगा, आने वाले समय में सपा-कांग्रेस के बीच सीटों के तालमेल पर नजर रहेगी।

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