अमरनाथ यात्रा: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कड़ी सुरक्षा के बीच जम्मू से पहले जत्थे को किया रवाना

Amarnath Yatra 2025: Lieutenant Governor Manoj Sinha flagged off the first batch from Jammu, the yatra began amid tight security
( Pic credit: Twitter)

चिरौरी न्यूज

जम्मू: जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा के पहले जत्थे को जम्मू से घाटी के लिए रवाना किया। गुरुवार से शुरू हो रही 36 दिवसीय यह पवित्र यात्रा 9 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन पर्व के साथ संपन्न होगी।

भक्ति और उत्साह के माहौल में ‘भारत माता की जय’, ‘बम बम भोले’ और ‘बर्फानी बाबा ने बुलाया है’ जैसे जयघोषों के बीच देशभर से आए श्रद्धालु जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से दो काफिलों में रवाना हुए। ये श्रद्धालु अनंतनाग जिले के पहलगाम और गांदरबल जिले के बालटाल स्थित यात्रा आधार शिविरों की ओर बढ़े।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, जो श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) के अध्यक्ष भी हैं, ने वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में यात्रा का शुभारंभ किया।

5,892 श्रद्धालु रवाना हुए

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कुल 5,892 श्रद्धालुओं का पहला जत्था दो सुरक्षा घेरे वाले काफिलों में रवाना हुआ। इनमें से 3,403 श्रद्धालु नुनवान (पहलगाम) आधार शिविर जा रहे हैं, जबकि 2,489 श्रद्धालु बालटाल के लिए निकले।

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था

22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकियों द्वारा 26 नागरिकों की हत्या की गई थी, को ध्यान में रखते हुए इस बार यात्रा के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की गई है। सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPFs) की 180 अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती की गई है। सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा बल पहले से ही तैनात हैं।

यात्रा मार्ग और विशेषता

अमरनाथ की पवित्र गुफा 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। श्रद्धालु दो मार्गों से यहां पहुंचते हैं — पारंपरिक पहलगाम मार्ग और छोटा बालटाल मार्ग।

  • पहलगाम मार्ग: यह मार्ग 46 किलोमीटर लंबा है, जिसमें श्रद्धालु पहलगाम से चंदनवाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी होते हुए चार दिन में पवित्र गुफा तक पहुंचते हैं।

  • बालटाल मार्ग: यह केवल 14 किलोमीटर लंबा है और श्रद्धालु एक ही दिन में गुफा में दर्शन कर वापसी करते हैं।

गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाली बर्फ की शिवलिंग चंद्रमा के कलाओं के साथ घटती-बढ़ती रहती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह शिवलिंग भगवान शिव की दिव्य शक्ति का प्रतीक है।

सुरक्षा, श्रद्धा और श्रद्धालुओं की आस्था के बीच यह यात्रा हर वर्ष करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र बनती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *