इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पर उठे सवालों का अश्विनी वैष्णव ने दिया जवाब, ‘कोप हार्डर!’
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की सरकार की नीति पर उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के आंकड़े साझा कर अपना पक्ष रखा है। ब्लूमबर्ग ओपिनियन के एक वीडियो में भारत के मैन्युफैक्चरिंग मॉडल और चीन के स्थापित विनिर्माण तंत्र की तुलना किए जाने के बाद वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकारी प्रोत्साहन और उससे जुड़े राजस्व के आंकड़े पेश किए। पोस्ट के अंत में उन्होंने आलोचकों को Gen Z की लोकप्रिय बोलचाल के अंदाज में जवाब देते हुए लिखा, ‘Cope harder!!’
19 हजार करोड़ के प्रोत्साहन के बदले कितना राजस्व?
अश्विनी वैष्णव ने मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी PLI स्कीम के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि सरकार ने इस योजना के तहत 19,000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया है। उनके मुताबिक, इसके मुकाबले 25,000 करोड़ रुपये प्रत्यक्ष कर और 3 लाख करोड़ रुपये GST के रूप में एकत्र हुए हैं।
मंत्री ने रोजगार के आंकड़े भी साझा किए। उनके अनुसार, भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 25 लाख लोग काम कर रहे हैं, जबकि अकेले मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में 12 लाख लोगों को रोजगार मिला है।
वैष्णव ने इन आंकड़ों के जरिए इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीति का बचाव किया। हालांकि, ये आंकड़े मंत्री की ओर से साझा किए गए दावे हैं।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, ब्लूमबर्ग ओपिनियन के एक वीडियो में भारत में आईफोन मैन्युफैक्चरिंग की बढ़ती हिस्सेदारी के बावजूद आयातित कंपोनेंट्स पर निर्भरता और सरकारी सब्सिडी की लागत को लेकर सवाल उठाए गए थे। वीडियो के कैप्शन में कहा गया कि दुनिया के हर चार आईफोन में से एक भारत में बनाया जाता है, लेकिन विदेशों से आयात होने वाले पुर्जे और सब्सिडी की लागत इस सफलता की कहानी को जटिल बनाते हैं।
इसी टिप्पणी के जवाब में वैष्णव ने PLI स्कीम से जुड़े आंकड़े सामने रखे और रोजगार तथा कर संग्रह को भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की उपलब्धियों के तौर पर पेश किया।
भारत के लिए क्यों अहम है इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग?
भारत सरकार PLI जैसी योजनाओं के जरिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार के अवसर पैदा करने पर जोर दे रही है। मोबाइल फोन निर्माण में भारत की बढ़ती भूमिका के बीच आयातित पुर्जों पर निर्भरता, घरेलू सप्लाई चेन के विकास और सरकारी प्रोत्साहन की लागत जैसे मुद्दे भी चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं।
वैष्णव के बयान ने इस बहस को फिर से सामने ला दिया है कि भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की प्रगति को केवल आयातित कंपोनेंट्स के आधार पर देखा जाए या उत्पादन, रोजगार और कर संग्रह जैसे दूसरे पैमानों को भी इसमें शामिल किया जाए।
रिपोर्ट में इस बहस के दोनों पहलुओं का जिक्र करना जरूरी है। ब्लूमबर्ग की टिप्पणी आयातित कंपोनेंट्स और सब्सिडी की लागत पर सवाल उठाती है, जबकि वैष्णव ने कर संग्रह और रोजगार के आंकड़ों के जरिए सरकार का पक्ष रखा है।
