खेल खिलाड़ी

भुवनेश्वर कुमार ने 4 साल बाद टीम इंडिया में वापसी पर तोड़ी चुप्पी, ‘खुद से कोई उम्मीद नहीं रखी, बस अपना काम करता रहा’

Bhuvneshwar Kumar breaks his silence on his return to Team India after 4 years: ‘I didn’t set any expectations for myself; I just kept doing my job.’चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: भारतीय तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में चार साल बाद वापसी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस दौरान खुद से कोई उम्मीद नहीं रखना और अपने काम पर ध्यान देना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही। भुवनेश्वर के मुताबिक, भारतीय टीम से बाहर रहने के बावजूद उनकी तैयारी में कभी कोई कमी नहीं आई और उन्होंने फिटनेस से लेकर कौशल तथा मानसिक मजबूती तक हर पहलू पर लगातार काम किया।

36 वर्षीय भुवनेश्वर ने इसी महीने वेस्टइंडीज के खिलाफ बेंगलुरु में पांचवें टी20 मुकाबले के लिए भारतीय टीम में वापसी की थी। उन्हें चोटिल अर्शदीप सिंह की जगह टीम में शामिल किया गया था, लेकिन बारिश के कारण वह मुकाबला रद्द हो गया। इसके बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टी20 मैच में उन्हें गेंदबाजी करने का मौका मिला।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की ओर से साझा किए गए एक वीडियो में भुवनेश्वर ने अपने पिछले चार वर्षों के अनुभव, आईपीएल की भूमिका और टी20 क्रिकेट में आए बदलावों पर खुलकर बात की।

‘चार साल तक भारतीय जर्सी के पीछे नहीं भागा’

भुवनेश्वर कुमार ने कहा कि पिछले तीन से चार वर्षों में उन्होंने भविष्य की चिंता करने के बजाय वर्तमान पर ध्यान देना सीखा।

उन्होंने कहा, “मेरी सोच बहुत सरल है। मुझे खुद से कोई उम्मीद नहीं है। पिछले तीन-चार वर्षों में चीजें इसी तरह मेरे लिए काम करती रहीं। कोई उम्मीद नहीं, बस अपना काम करते रहो। हम अक्सर वर्तमान में रहने की बात करते हैं और भविष्य के बारे में नहीं सोचते। इस समय मेरी मानसिकता भी यही है।”

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय टीम से बाहर रहने के दौरान उन्हें व्यक्तिगत तौर पर काफी परिपक्वता हासिल हुई। भुवनेश्वर के मुताबिक, “मुझे पता था कि मैं देश के लिए नहीं खेल रहा हूं, लेकिन इस दौरान मैंने जो कुछ किया और एक व्यक्ति के रूप में मेरे भीतर जो परिपक्वता आई, उसने मुझे वर्तमान में जीना सिखाया। चार साल तक मैंने भारतीय जर्सी हासिल करने के पीछे दौड़ नहीं लगाई। सच कहूं तो मुझे पता ही नहीं चला कि ये चार साल कब बीत गए।”

IPL ने वापसी में निभाई अहम भूमिका

भुवनेश्वर ने अपनी वापसी का श्रेय आईपीएल और घरेलू क्रिकेट को भी दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर रहने के बावजूद इन प्रतियोगिताओं ने उन्हें खेल से जुड़े रहने और अपनी तैयारी जारी रखने का अवसर दिया।

उन्होंने बताया कि पिछले दो आईपीएल सत्रों में वह बिना किसी बड़ी उम्मीद के मैदान पर उतरे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि उन्होंने तैयारी में ढिलाई बरती।

तेज गेंदबाज ने कहा, “पिछले दो आईपीएल में जब मैं खेलने गया, तो मुझसे कोई उम्मीद नहीं थी। लेकिन ऐसा नहीं था कि मैंने तैयारी नहीं की। मैंने फिटनेस, कौशल और मानसिक मजबूती के लिए जरूरी हर चीज की। बस मुझे यह उम्मीद नहीं थी कि आगे क्या होगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि दो वर्षों में उन्हें आईपीएल के दो खिताब जीतने का अनुभव मिलेगा।

‘टी20 में 200 रन अब सामान्य स्कोर’

भुवनेश्वर कुमार ने टी20 क्रिकेट में बल्लेबाजों के बदलते रवैये और बढ़ते स्कोर पर भी अपनी राय रखी। उनके मुताबिक, पिछले चार वर्षों में इस प्रारूप में काफी बदलाव आया है और अब बल्लेबाज पहली गेंद से ही आक्रामक खेलने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि आईपीएल में इम्पैक्ट प्लेयर नियम ने बल्लेबाजों की सोच को और आक्रामक बनाया है।

भुवनेश्वर ने कहा, “मैं जानता हूं कि इम्पैक्ट प्लेयर नियम है, लेकिन इसने बल्लेबाजों की मानसिकता को काफी हद तक खोल दिया है। वे पहली ही गेंद से गेंदबाजों पर हमला करने लगते हैं।” हालांकि, उन्होंने गेंदबाजों को कमजोर पक्ष मानने वाली सोच से असहमति जताई।

उन्होंने कहा, “मैं हमेशा मानता हूं कि हम गेंदबाजों को पीड़ित मान लेते हैं, लेकिन वे ऐसे नहीं हैं। गेंदबाज होने के नाते आप खेल को नियंत्रित कर सकते हैं। आप बल्लेबाज को वहां शॉट खेलने के लिए मजबूर कर सकते हैं, जहां आप चाहते हैं। यह सिर्फ नजरिए की बात है। हमें गेंदबाज की तरह सोचना होगा।”

भुवनेश्वर ने कहा कि मौजूदा दौर में 200 रन का स्कोर भी कई बार सामान्य लगने लगा है। यह बदलाव केवल फ्रेंचाइजी क्रिकेट में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी दिखाई दे रहा है।

विदेशी दौरों पर गेंदबाजों के सामने बढ़ीं चुनौतियां

भारतीय तेज गेंदबाज ने विदेशी दौरों, खासकर SENA देशों यानी दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में खेलने की चुनौतियों पर भी बात की।

उन्होंने कहा कि इन देशों की परिस्थितियां अलग होती हैं और बल्लेबाजों तथा गेंदबाजों, दोनों को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। पिछले चार-पांच वर्षों में सीमित ओवरों के क्रिकेट में गेंदबाजों को मिलने वाली मदद भी कम हुई है।

भुवनेश्वर के मुताबिक, गेंदबाजों के बीच बातचीत आमतौर पर परिस्थितियों को समझने और अपनी रणनीति पर अमल करने को लेकर होती है।

उन्होंने कहा, “जब हम आपस में बात करते हैं, तो बहुत बुनियादी चीजों पर चर्चा करते हैं। परिस्थितियां कैसी हैं और हम क्या कर सकते हैं। लेकिन मैंने महसूस किया है कि टी20 ऐसा प्रारूप बन गया है, जहां गेंदबाज के लिए काफी परिपक्वता जरूरी है।”

विदेशी धरती पर जीत से मिलता है खास आत्मविश्वास

भुवनेश्वर ने कहा कि विदेशी धरती पर टूर्नामेंट जीतना टीम के लिए विशेष संतुष्टि की बात होती है। उनके अनुसार, ऐसी जीत खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाती है और इसका सकारात्मक असर आगे के मुकाबलों पर भी पड़ सकता है।

न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टी20 मैच में भारत की जीत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बल्लेबाजों ने जिस तरह लक्ष्य का पीछा किया, उससे टीम का मनोबल बढ़ा है।

उन्होंने कहा, “जब हम किसी विदेशी दौरे पर जाते हैं, तो सबसे बड़ा लक्ष्य वहां जीत हासिल करना होता है। खासकर SENA देशों में जीतना आसान नहीं है। चाहे बल्लेबाज हो या गेंदबाज, हर किसी के सामने चुनौतियां होती हैं। ऐसे देशों में अच्छा प्रदर्शन करके टूर्नामेंट जीतने से बहुत संतुष्टि मिलती है।”

उन्होंने आगे कहा कि न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले मैच में मिली जीत का सकारात्मक प्रभाव पूरी सीरीज पर पड़ सकता है।

भुवनेश्वर के मुताबिक, “पहला मैच जीतने से टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है। अगर किसी विदेशी दौरे की शुरुआत अच्छी होती है, तो उसका असर दूसरे प्रारूपों और आगे के मैचों में भी दिखाई दे सकता है। अच्छी शुरुआत मिलने पर सभी खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन करने और सीरीज जीतने के लिए अधिक आत्मविश्वास के साथ उतरते हैं।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *