अघोषित विभाजन की ओर बढ़ती कांग्रेस

Hearing on Sonia-Rahul in National Herald money laundering case completed, court will give verdict on July 29कृष्णमोहन झा
पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल कांग्रेस पार्टी के उन वरिष्ठ नेताओं के बीच बड़ी हस्ती रखते हैं जो पिछले एक साल से पार्टी में पूर्णकालिक अध्यक्ष के चुनाव की मांग कर रहे हैं। एक साल पूर्व इन नेताओं ने बाकायदा सामूहिक पत्र लिखकर अपनी आवाज बुलंद करने की कोशिश भी की थी परंतु उन्हें अपनी कोशिशों में कोई सफलता नहीं मिली। हां, इतना जरूर हुआ कि उक्त पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले अनेक नेताओं का पार्टी में कद घटा दिया गया। जिन नेताओं ने पार्टी में पूर्णकालिक अध्यक्ष के चुनाव की मांग की थी उनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद भी शामिल थे। ‌

आजाद के पास चालीस साल का संसदीय अनुभव होने के बावजूद एक और कार्यकाल के लिए उन्हें राज्य सभा की टिकट नहीं मिली। कांग्रेस में पूर्णकालिक अध्यक्ष के चुनाव की मांग करने वाले 23 पार्टी नेताओं को किसी न किसी रूप में अपने ‘दुस्साहस’ की कीमत चुकानी पड़ी। फिर भी कपिल सिब्बल जैसे नेता अपनी उस मुहिम को जारी रखने में ही पार्टी का हित देख रहे हैं जो गांधी परिवार को रास नहीं आ रही है। इसी मंशा से विगत दिनों सिब्बल ने अपने जन्मदिन के अवसर पर रात्रि भोज का आयोजन कर उसमें अधिकांश विपक्षी दलों के नेताओं को आमंत्रित किया। 14 विपक्षी दलों के 45  नेता सिब्बल की बर्थडे पार्टी में शामिल हुए।

बसपा ने यह आमंत्रण स्वीकार नहीं किया। यहां यह भी विशेष गौर करने लायक बात है कि जिस दिन दिल्ली में सिब्बल ने अपनी बर्थडे पार्टी आयोजित की उस दिन राहुल गांधी जम्मू-कश्मीर के दौरे पर गए हुए थे और प्रियंका गांधी वाड्रा विदेश में थीं। सिब्बल का कहना है कि उनकी बर्थ-डे पार्टी में गांधी परिवार की अनुपस्थिति को पार्टी मामलों से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए। बर्थ डे पार्टी के बहाने विपक्षी दलों को एकजुट करने की अपनी पहल के बारे में वे कहते हैं कि विपक्षी दलों को एकजुट करने के लिए राहुल गांधी जो पहल कर रहे हैं वैसी ही पहल उन्होंने अपनी बर्थ-डे पार्टी के माध्यम से की है और इसे गांधी परिवार की खिलाफत के रूप में देखना सही नहीं होगा। हम सब कांग्रेस को मजबूत करना चाहते हैं।

सिब्बल कहते हैं कि पार्टी के कुछ नेता अगर पार्टी को मजबूती प्रदान करने की मंशा से अपनी ओर से कोई पहल करते हैं तो उससे नेतृत्व को आपत्ति होने का सवाल ही पैदा नहीं होता। लेकिन सिब्बल ने यह कहने में कभी कोई संकोच नहीं किया कि कोई भी राजनीतिक दल लंबे समय तक पूर्ण कालिक अध्यक्ष के बिना अपना काम नहीं चला सकता। जी-23 गुट में शामिल नेता पिछले एक साल से यही दलील दे रहे हैं कि कांग्रेस के पास कोई पूर्णकालिक अध्यक्ष ने होने के कारण पार्टी लगातार कमजोर होती जा रही है। यह समझना कठिन नहीं है कि जी-23 गुट  इस स्थिति के लिए परोक्ष रूप से गांधी परिवार को जिम्मेदार ठहरा रहा है जो पार्टी पर अपना नियंत्रण छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। दरअसल इस स्थिति के लिए  काफी हद तक राहुल गांधी जिम्मेदार हैं जो अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी  संभालने   के लिए न तो खुद आगे चाहते हैं और न ही पार्टी के किसी महत्वाकांक्षी नेता के सर पर अध्यक्ष पद का ताज चाहते हैं। ऐसे मे दूसरे विपक्षी दलों के नेताओं के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब राहुल गांधी अपने ही दल के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी स्वीकार करने में झिझक रहे हैं  तब विपक्षी दलों के गठबंधन का नेतृत्व उन्हें कैसे सौंपा जा सकता है।

इसीलिए राहुल गांधी की ब्रेक फास्ट मीटिंग की तुलना में सिब्बल की बर्थ-डे पार्टी कहीं अधिक सफल रही। उनकी बर्थ-डे पार्टी में जिन विपक्षी दलों के नेताओं को आमंत्रित किया गया था उनमें से अनेक विपक्षी दलों के सुप्रीमो मौजूद थे जबकि राहुल गांधी की ब्रेक फास्ट मीटिंग में अधिकांश विपक्षी दलों ने केवल प्रतिनिधियों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी ने संसद के संक्षिप्त मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस और विपक्षी दलों के सांसदों की जो ब्रेकफास्ट मीटिंग आयोजित की थी उसमें बसपा और आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि शामिल नहीं हुए थे। दूसरी ओर कपिल सिब्बल द्वारा आयोजित बर्थ-डे पार्टी में आम आदमी पार्टी से संजय सिंह अपनी उपस्थिति दर्ज कराने पहुंचे थे यद्यपि बसपा ने उस पार्टी में भी हिस्सा नहीं लिया।
गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल गांधी के इस्तीफे बाद से अंतरिम अध्यक्ष के रूप में सोनिया गांधी ही पार्टी के नेतृत्व की बागडोर थामे हुए हैं जिनने अंतरिम अध्यक्ष की जिम्मेदारी तब स्वीकार की थी जब राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर यह जिद पकड़ ली थी कि पार्टी में उनके स्थान पर शीघ्रतिशीघ्र नए पूर्णकालिक अध्यक्ष का चुनाव किया जाए। राहुल गांधी के स्थान पर नया पूर्णकालिक अध्यक्ष चुनने का साहस जुटाना पार्टी के लिए संभव नहीं हो पाया इसलिए सोनिया गांधी ने अंतरिम अध्यक्ष बनना स्वीकार कर लिया।

गौरतलब है कि सोनिया गांधी के स्थान पर ही राहुल गांधी को अध्यक्ष चुना गया था और जब राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद छोड़ने का फैसला किया तो सोनिया गांधी ने उनका स्थान ले लिया। इस तरह पिछले दो दशकों से भी अधिक समय से पार्टी का अध्यक्ष पद गांधी परिवार के पास है। यह भी आश्चर्यजनक है कि राहुल गांधी खुद आगे बढ़कर कांग्रेस पार्टी के पूर्णकालिक अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार नहीं हैं परंतु वे पार्टी में सभी महत्वपूर्ण फैसले करने का अधिकार गांधी परिवार से बाहर के किसी नेता को देने के लिए भी तैयार नहीं हैं। विडंबना यह भी है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में लगातार दो लोकसभा चुनावों में पार्टी की इतनी शर्मनाक हार हो चुकी है कि दोनों निर्वाचित सदनों में विपक्ष के नेता पद के लिए अपना दावा पेश करने की उसकी हैसियत ही नहीं थी।

राहुल गांधी यद्यपि पार्टी का अध्यक्ष पद छोड़ चुके हैं परंतु पार्टी के अंदर अपना रुतबा अवश्य बनाए रखना चाहते हैं। वे जब मोदी सरकार पर निशाना साधते हैं तब यह आसानी से समझा जा सकता है कि वे कांग्रेस में नंबर दो की हैसियत रखने वाले नेता हैं। राहुल गांधी अध्यक्ष की कुर्सी पर आसीन न होते हुए भी समूची पार्टी को अपने पीछे खड़ा देखने की महत्वाकांक्षा से मुक्त नहीं हैं।

बहरहाल, कपिल सिब्बल की बर्थ-डे पार्टी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में कांग्रेस के जी -23 गुट के सदस्यों के अलावा विपक्षी दलों के दिग्गज नेताओं ने जो दिलचस्पी दिखाई उससे कपिल सिब्बल का प्रफुल्लित होना स्वाभाविक है। इस पार्टी में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से शरद पवार, राष्ट्रीय जनता दल से लालू प्रसाद यादव, नेशनल कांफ्रेंस से फारुख अब्दुल्ला, तृणमूल कांग्रेस से डेरेक ओ ब्रायन और कल्याण बनर्जी, मार्क्सवादी दल से सीताराम येचुरी, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी से  डी राजा, आम आदमी पार्टी से संजय सिंह, राष्ट्रीय लोकदल से जयंत चौधरी, शिवसेना से संजय राऊत के अलावा बीजू जनता दल, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम , अकाली दल, तेलगूदेशम और वाम एस आर कांग्रेस के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इस पार्टी में बीजू जनता दल और अकाली दल के प्रतिनिधियों की मौजूदगी विशेष महत्व रखती है क्योंकि बीजू जनता दल के सुप्रीमो नवीन पटनायक अभी भाजपा और उसके विरोधी दलों से समान दूरी बनाकर रखे हुए थे जबकि अकाली दल पंजाब में कांग्रेस की अमरिंदर सिंह सरकार की घोर विरोधी है।

कपिल सिब्बल की इस बर्थ-डे पार्टी में  गुलामनबी आजाद, पृथ्वी राज चव्हाण,शशि थरूर, आनंद शर्मा, पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदम्बरम, भूपिंदर सिंह हुड्डा, मनीष तिवारी, राज बब्बर और मुकुल वासनिक आदि कांग्रेस नेताओं की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही। बसपा को छोड़कर भाजपा विरोधी लगभग सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में संपन्न इस पार्टी के आयोजन का मुख्य उद्देश्य नए सिरे से विपक्षी एकता की संभावनाएं तलाशना ही था।

कपिल सिब्बल की इस पहल को गांधी परिवार के सामने जी-23 गुट का परोक्ष शक्ति प्रदर्शन माना जा है। इस बर्थ-डे पार्टी ‌ के जरिए सिब्बल यह भी जानना चाहते थे कि क्या गांधी परिवार को दूर रखकर विपक्षी एकता की संभावनाओं को और बलवती बनाया जा सकता है। अब यह उत्सुकता का विषय है कि कपिल सिब्बल की यह पहल गांधी परिवार के लिए कितनी बड़ी चुनौती साबित होती है लेकिन इतना तो तय है कि विपक्ष को एकजुट करने के लिए आतुर कांग्रेस पार्टी को पहले खुद एकजुट होना पड़ेगा जिसकी संभावना फिलहाल तो धूमिल ही दिखाई दे रही है।
(लेखक IFWJ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और डिज़ियाना मीडिया समूह के सलाहकर है)

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