यूपी की 10 राज्यसभा सीटों पर मुकाबला, BJP से स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी के नामों पर चर्चा

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्य की 10 राज्यसभा सीटों पर 16 अक्टूबर को चुनाव होना है और नामांकन प्रक्रिया मंगलवार से शुरू होने जा रही है। सत्तारूढ़ बीजेपी सात सीटें आसानी से जीतने की स्थिति में है, लेकिन पार्टी आठवीं सीट के लिए भी मैदान में उतरने की रणनीति पर विचार कर रही है। ऐसे में 10वीं सीट पर बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच सीधा मुकाबला होने की संभावना बन सकती है।
बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया जा सकता है। इनके अलावा वरुण गांधी समेत कई अन्य नामों पर भी चर्चा चल रही है।
समाजवादी पार्टी भी तीन उम्मीदवार मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है,हालांकि मौजूदा संख्या बल के आधार पर वह सिर्फ दो सीटें ही आसानी से जीत सकती है। पार्टी वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव को एक बार फिर राज्यसभा भेजने पर विचार कर रही है।
इसके अलावा पूर्व आईएएस अधिकारी आलोक रंजन और सलीम इकबाल के नाम भी चर्चा में हैं। तीन उम्मीदवार उतारने की संभावना से संकेत मिल रहे हैं कि समाजवादी पार्टी अतिरिक्त सीट के लिए मुकाबले में उतरने की तैयारी कर रही है।
BJP की नजर आठवीं सीट पर
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, हालांकि वर्तमान में 396 विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 37 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत होगी।
बीजेपी के पास फिलहाल 255विधायक हैं। इस संख्या के आधार पर पार्टी अपने दम पर सात राज्यसभा सीटें जीत सकती है। उसके सहयोगियों में अपना दल (सोनेलाल) के 13, राष्ट्रीय लोक दल के 9, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक हैं।
सात सीटें जीतने के बाद बीजेपी और उसके सहयोगियों के पास करीब 33 अतिरिक्त वोट बचेंगे। आठवीं सीट जीतने के लिए उसे चार और वोटों की जरूरत होगी। इसके लिए जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के दो निर्दलीय/गैर-गठबंधन विधायकों के समर्थन सहित अतिरिक्त वोट जुटाने की रणनीति पर चर्चा हो रही है।
समाजवादी पार्टी के पास 101 विधायक हैं। कांग्रेस के दो विधायक भी उसके साथ हैं, जिससे संख्या 103 हो जाती है। दो सीटें जीतने के बाद पार्टी के पास 29 अतिरिक्त वोट बचेंगे। तीसरी सीट के लिए उसे आठ और वोट जुटाने होंगे।
यही वजह है कि 10वीं सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। दोनों दल अतिरिक्त विधायकों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर सकते हैं।
जातीय और क्षेत्रीय समीकरण पर जोर
बीजेपी उम्मीदवारों के चयन में आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश कर रही है। पार्टी जाट, राजपूत,ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदायों को प्रतिनिधित्व देने पर भी विचार कर रही है।
मौजूदा ओबीसी सांसद गीता शाक्य और बीएल वर्मा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। केंद्र में मंत्री बीएल वर्मा को दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा है। गीता शाक्य के नाम पर भी विचार किया जा रहा है।
राज्य बीजेपी ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष प्रकाश पाल और रेखा वर्मा के नाम भी संभावित उम्मीदवारों में बताए जा रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की संभावना पर भी चर्चा है।
इसके अलावा पार्टी दलित नेता बृजलाल की जगह किसी युवा दलित चेहरे को मौका देने पर विचार कर रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और पूर्व सांसद सत्यपाल सिंह के नाम जाट प्रतिनिधित्व के लिए चर्चा में हैं। वरुण गांधी, सुरेश राणा, अमित मालवीय और राजबीर सिंह के नाम भी संभावित उम्मीदवारों की सूची में बताए जा रहे हैं।
लखनऊ की बैठक में हुई चर्चा
संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंगलवार को लखनऊ में हुई बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक में चर्चा हुई। अंतिम फैसला अगले तीन-चार दिनों में होने वाली केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में होने की संभावना है।
सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा राज्यसभा सांसद नीरज शेखर और अरुण सिंह को आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कहा जा सकता है। पार्टी उम्मीदवारों के चयन में अगले विधानसभा चुनाव के समीकरणों को प्रमुखता दे रही है।
उत्तर प्रदेश में बीजेपी के सामने ब्राह्मण वोटों को अपने साथ बनाए रखने की चुनौती भी है। इसके साथ ही पार्टी लोकसभा चुनाव में कमजोर हुए गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक,खासकर कुर्मी समुदाय और गैर-जाटव दलित मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी इस बार युवा और महिला चेहरों को भी अधिक प्रतिनिधित्व देने पर विचार कर रही है।
आठवीं सीट के लिए बीजेपी के उतरने की स्थिति में चुनाव में क्रॉस-वोटिंग की संभावना बढ़ सकती है। राज्यसभा चुनाव में विधायकों के मतदान पर विधानसभा चुनावों जैसी पार्टी व्हिप व्यवस्था लागू नहीं होती, इसलिए पार्टी लाइन से अलग मतदान की स्थिति में विधायक की विधानसभा सदस्यता स्वतः समाप्त नहीं होती।
ऐसे में बीजेपी और समाजवादी पार्टी दोनों ही अतिरिक्त विधायकों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर सकती हैं। अगर दोनों पार्टियां अपनी-अपनी अतिरिक्त सीट के लिए मैदान में उतरती हैं, तो राज्यसभा की 10वीं सीट के लिए मुकाबला खासा दिलचस्प हो सकता है।
