बिखरे-बिखरे हैं सभी, आओ एक घर में रहें। क्या पता तुम न रहो, क्या पता हम न रहें : डॉ सुरेन्द्र शर्मा
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: हिन्दी के वरेण्य कवि डॉ सुरेन्द्र शर्मा ने कहा कि लहू था हिंदू का अल्लाह शर्मिंदा रहा, मरा मुसलमान तो राम कब जिंदा रहा…। बिखरे-बिखरे हैं सभी, आओ एक घर में रहें। क्या पता तुम न रहो, क्या पता हम न रहें। अपनी बातें के क्रम में उन्होंने पडोसी देश में हो रही अराजक स्थितियों को लेकर इशारों में बात की और इसके लिए समाधान में सुझाया। उन्होंने कहा कि गोलियों का खर्च यदि रोटियों पर हो जाएं, तो दोनों मुल्क एक हो जाए। साथ ही उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि अच्छा लिखो, अच्छे लोगों के लिए लिखो।
डॉ सुरेन्द्र शर्मा पद्मश्री वीरेंद्र प्रभाकर की 11वीं पुण्यतिथि पर काव्य संध्या व सम्मान समारोह में बोल रहे थे। 09 जनवरी, 2026 को नई दिल्ली के कांन्स्टीच्यूशन क्लब में चित्र कला संगम की ओर से पद्मश्री वीरेंद्र प्रभाकर की 11वीं पुण्यतिथि के अवसर पर काव्य संध्या और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत पद्मश्री वीरेंद्र प्रभाकर जी की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित करके और दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि डॉ सुरेन्द्र शर्मा ने हास्य कवि श्री शंभु शिखर को सम्मानित किया। इसके साथ ही समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले दर्जनों लोगों को सम्मानित किया गया। पुरानी दिल्ली के श्री बलदेव गुप्ता के साथ ही श्री सुधीर सरीन और श्री सुभाष ओसवाल को भी सम्मनित किया गया।
सांसद एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी ने कहा कि पद्मश्री वीरेंद्र प्रभाकर ऐसे सौभाग्यशाली लोगों में से थे, जो हमारी आजादी की पहली रोशनी के गवाह थे। उन्होंने अपनी कलात्मक दृष्टि से दुनिया देखी, उसे दर्ज किया और कई पुरस्कारों से सम्मानित हुए। हमें यह जानकर बेहद खुशी है कि इस वर्ष भी चित्रकला संगम और उनके पुत्रों द्वारा हर वर्ष की भांति 11वीं पुण्यतिथि के अवसर पर काव्य संध्या एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
व्यस्तताओं के कारण सांसद श्रीमती प्रियंका गांधी नहीं आ पाईं और उन्होंने अपना संदेश पद्मश्री वीरेंद्र प्रभाकर के पुत्र और चित्रकला संगम के सचिव श्री रवि जैन को भेजा।
कविताओं का पाठ करते हुए श्री सुरेन्द्र शर्मा ने समाज सरोकार की बात करते हुए लोगों को सोचने पर मजबूर किया। वहीं श्री शम्भू शिखर की कविता ने लोगों को गुदगुदाने पर बाध्य कर दिया।
खास बात यह भी रही कि इस दौरान कई पुस्तकों एवं पत्र—पत्रिकाओं का लोकार्पण भी किया गया। श्री अनिश्चय शर्मा की काव्य कसौटी, डॉ. अजय कुमार ओझा- यदि, संयम की शेफर्ड-स्टर्लिंग इंडिया।
वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारीय और सामाजिक सरोकार में पद्मश्री वीरेंद्र प्रभाकर एक छायाकार-पत्रकार से अधिक मित्र कइयों थे, जो सभी के लिए समभाव रखते थे। हमें इस बात की बेहद खुशी है कि उनके दोनों पुत्र श्री अशोक जैन और श्री रवि जैन ने उनके सरोकार और विरासत को आगे बढ़ाया है। पुरानी दिल्ली सहित पूरी दिल्ली पद्मश्री वीरेंद्र प्रभाकर के कामों से प्रभावित थे। उनकी बातें उनके समय और आज भी की जाती है। उनकी कही बातें आज भी प्रांसगिकता है। उनके परिवार का ही संस्कार है कि उनके दोनों पुत्र आज भी समाज के कामों में हमेशा लगे रहते हैं।
कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेता श्री मनोज जैन, गांधीवादी चिंतक श्री रमेश शर्मा सहित श्री विनय मोहन, श्री गुलशन जी आदि ने अपने विचार रखें। कार्यक्रम का संचालन करते हुए श्री हरी सिंह पाल ने पद्मश्री प्रभाकर एवं चित्रकला संगम के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही उनके सरोकारों को सभी के सामने रखा। औपचारिक रूप से धन्यवाद ज्ञापन श्री पुनीत जैन ने किया।
प्रभाकर जी की हर तस्वीर दिल्ली की कहानी कहती थी, यही कारण रहा कि टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप ने करीब पचास सालों तक उनकी तस्वीरों का उपयोग किया है। उल्लेखनीय है कि वीरेंद्र प्रभाकर ने सन् 1947 से लेकर 80 के दशक तक फोटो पत्रकारिता के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक पलों को अपने कैमरे में कैद किया था। इनका संकलन अमिट हस्ताक्षर वीरेंद्र प्रभाकर के नाम से काफी चर्चित है।
बता दें कि इस समारोह का आयोजन प्रति वर्ष चित्र कला संगम की ओर से पद्मश्री वीरेंद्र प्रभाकर जी की पुण्यतिथि अवसर पर किया जाता है। प्रख्यात फोटोग्राफर और चित्रकार पद्मश्री वीरेंद्र प्रभाकर व्यक्तित्व के धनी एवं अपने क्षेत्र के पारंगत व्यक्ति थे। उन्होंने भारत में आजादी के समय से अपने करियर की शुरुआत करते हुए सारी उपलब्धियां हासिल की। फोटो पत्रकारिता जैसे रचनात्मक क्षेत्र में अपने हुनर की खुशबू बिखेरते हुए प्रभाकर जी ने कई सारी महान राजनीतिक हस्तियों व भारत के राजनीतिक इतिहास की प्रमुख घटनाओं को अपने कैमरे में कैद किया।
