चुनाव में राजद की करारी हार के बाद लालू परिवार में कलह, रोहिणी आचार्या ने परिवार और पार्टी से अलग होने की घोषणा की
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव में राजद की करारी हार के अगले ही दिन लालू प्रसाद यादव की दूसरी बेटी रोहिणी आचार्य ने शनिवार को अचानक राजनीति से संन्यास और अपने परिवार से दूरी बनाने का ऐलान कर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। डॉक्टर से नेता बनीं रोहिणी ने दावा किया कि उनके इस फैसले के पीछे तेजस्वी यादव के करीबी संजय यादव और रमीज़ आलम की भूमिका है।
एक्स (पूर्व ट्विटर) पर किए गए भावनात्मक पोस्ट में रोहिणी ने लिखा, “मैं राजनीति छोड़ रही हूँ और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूँ। संजय यादव और रमीज़ ने सलाह दी थी कि मुझे ऐसा ही करना चाहिए, और मैं इसका पूरा दोष खुद पर ले रही हूँ।”
रोहिणी आचार्य 2024 के लोकसभा चुनाव में सारण से राजद उम्मीदवार थीं, लेकिन भाजपा के राजीव प्रताप रूडी के हाथों उन्हें बड़ी हार का सामना करना पड़ा। चुनाव के बाद से ही उनके और परिवार के बीच दूरी बढ़ने लगी थी। उन्होंने महीनों पहले ही लालू यादव, राजद और तेजस्वी यादव को एक्स पर अनफॉलो कर दिया था। इसके बाद कई रहस्यमयी, कभी भावुक और अक्सर तीखे पोस्टों ने इस बात को और साफ कर दिया कि यादव परिवार के भीतर सबकुछ सामान्य नहीं है।
कहा जा रहा है कि विवाद की पृष्ठभूमि 2022 की उस घटना में है, जब रोहिणी ने अपने पिता को किडनी दान किया था। उनके इस कदम को लेकर फैली अफ़वाहों, दुष्प्रचार और उनकी मंशा पर उठे संदेहों ने रोहिणी को भीतर तक आहत किया। मामला तब और बिगड़ गया जब तेजस्वी यादव के सबसे भरोसेमंद सलाहकार समझे जाने वाले संजय यादव की ‘अतिसक्रियता’ पर उन्होंने सीधे-सीधे सवाल उठाए।
पार्टी की ‘बिहार अधिकार यात्रा’ के दौरान राजद की रैली बस में संजय यादव की फ्रंट सीट पर बैठी एक तस्वीर पर रोहिणी ने तंज कसा। यह हमला भले अप्रत्यक्ष था, लेकिन निशाना साफ था। और उसके बाद सोशल मीडिया पर भड़के विवाद ने पारिवारिक खाई को और गहरा कर दिया। ट्रोलिंग, आरोप, जवाब और पलटवार का सिलसिला शुरू हो गया।
तेज प्रताप यादव, जिन्हें हाल ही में एक विवाद के बाद पार्टी से निष्कासित किया गया, लंबे समय से संजय यादव को “हस्तक्षेपकारी” बताते रहे हैं और उन्हें “जयचंद” तक कह चुके हैं। रोहिणी को लेकर भी परिवार में उठी नाराज़गी के केंद्र में वे ही बताए जाते हैं। माना जा रहा है कि बढ़ते दबाव के बीच संजय यादव के खिलाफ पार्टी स्तर पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
इसी हलचल के बीच भाजपा ने भी मौका नहीं छोड़ा। बिहार भाजपा नेता नीरज कुमार ने कहा, “जिस बेटी ने लालू यादव को किडनी देकर उनकी जान बचाई, वही आज परिवार और पार्टी दोनों से बाहर कर दी गई। तेज प्रताप के बाद अब रोहिणी… यह साफ है कि पूरा परिवार तेजस्वी यादव की महत्वाकांक्षाओं की भेंट चढ़ रहा है।”
राजद का यह पारिवारिक संकट यहीं नहीं थमता। इसी वर्ष मई में लालू यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव से नाता तोड़ लिया था, जब तेज प्रताप ने सोशल मीडिया पर अनुष्का यादव के साथ अपने 12 साल पुराने रिश्ते की सार्वजनिक घोषणा कर दी थी, जबकि उनका तलाक का मामला अभी अदालत में लंबित था। विवाद बढ़ा तो तेज प्रताप ने दावा किया कि उनका अकाउंट हैक हुआ था, लेकिन नुकसान हो चुका था। लालू यादव ने इसे “असावधानी और अस्वीकार्य आचरण” बताते हुए उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
अब रोहिणी आचार्य के सार्वजनिक रूप से रिश्ते तोड़ने के ऐलान ने यादव परिवार के भीतर पहले से चल रहे ‘परिवार-युद्ध’ को और तीखा कर दिया है। राजद, परिवार और राजनीति तीनों के बीच तनाव अब खुलकर सतह पर आ गया है, और इसका असर बिहार की राजनीति पर गहरा पड़ना तय माना जा रहा है।
