यूसुफ पठान के टीएमसी छोड़ने के बाद गुजरात सरकार ने वडोदरा में उनकी विवादित जमीन का निपटारा किया
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: गुजरात में भाजपा सरकार ने वडोदरा में 978 वर्ग मीटर के एक विवादित भूखंड (प्लॉट) को लोकसभा सांसद और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान को आवंटित करने की मंजूरी दे दी है। इस संबंध में शहर के नगर निकाय को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अब अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है, जिसके बाद सांसद अपने घर से सटी इस जमीन का कब्जा ले सकेंगे।
गौरतलब है कि यह घटनाक्रम तब सामने आया है, जब कुछ महीने पहले ही पठान और 19 अन्य सांसदों ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत कर दी थी। इन सांसदों ने ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) का दामन थाम लिया, जो एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है।
वडोदरा में उनके आवास के पास इस भूखंड को आवंटित करने की प्रक्रिया 14 वर्षों से अटकी हुई थी। 978 वर्ग मीटर के इस भूखंड का अंतिम मूल्य 20.53 करोड़ रुपये (2.10 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर) आंका गया है।
नीलामी के लिए न्यूनतम आधार मूल्य (जिसे ‘अपसेट वैल्यू’ भी कहा जाता है) तय करने के बाद, पठान को यह भूखंड आवंटित करने का प्रस्ताव स्थानीय नगर निकाय की स्थायी समिति के समक्ष रखा जाएगा। वडोदरा नगर निगम के आयुक्त अरुण बाबू ने बताया कि उन्हें राज्य सरकार से मंजूरी मिल गई है और अब वे इस प्रस्ताव को समिति के सामने पेश करेंगे। समिति की मंजूरी मिलते ही पूरी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
हालांकि, इस भूखंड के लिए पठान को कितनी रकम चुकानी होगी, यह अभी तय नहीं हुआ है। राज्य सरकार के आदेश की समीक्षा करने के बाद नगर निकाय इस राशि का निर्धारण करेगा। साल 2012 में, पठान ने वडोदरा नगर निगम को पत्र लिखकर वडोदरा के तंडलजा इलाके में स्थित अपने बंगले से सटी 978 वर्ग मीटर की जमीन आवंटित करने की मांग की थी।
उस वर्ष 30 मार्च और 8 जून को हुई बैठकों में इस आवंटन प्रस्ताव पर चर्चा की गई थी। इसके बाद नगर निगम ने बिना किसी सार्वजनिक नीलामी के, उन्हें यह जमीन 99 साल की लीज (पट्टे) पर देने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। हालांकि, 2014 में राज्य सरकार ने बिना सार्वजनिक नीलामी के भूखंड आवंटित करने के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। 2024 में, आवंटन प्रस्ताव को खारिज किए जाने का हवाला देते हुए, नगर निगम ने जमीन पर कथित अतिक्रमण को हटाने के लिए तुरंत कार्रवाई करने का आदेश दिया। पठान ने इस फैसले को गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी।
21 अगस्त 2025 को, कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद, पठान ने सिंगल जज के आदेश को चुनौती देते हुए एक डिवीजन बेंच के सामने अपील दायर की। 8 जून 2026 को हुई सुनवाई के दौरान, हाई कोर्ट ने सवाल किया कि सरकारी जमीन पर कब्जा कैसे किया गया, जबकि न तो इसे कानूनी रूप से आवंटित किया गया था और न ही इसके लिए जरूरी भुगतान किया गया था। कोर्ट ने इस मामले में नगर निगम के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। पठान के वकील ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को जमीन आवंटित करने की राज्य सरकार की नीति का हवाला देते हुए, और तर्क पेश करने के लिए समय मांगा।
31 अगस्त 2026 को एक अहम घटनाक्रम हुआ, जब पठान ने हाई कोर्ट से अपनी अपील वापस ले ली।
