BCCI की बैठक के बाद हरमनप्रीत कौर ने सभी फ़ॉर्मेट में भारतीय महिला टीम की कप्तानी छोड़ी

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: भारतीय महिला टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने आधिकारिक तौर पर सभी फ़ॉर्मेट में कप्तानी छोड़ दी है। इस फ़ैसले के साथ ही एक अहम दौर का अंत हो गया है, जिसमें भारत की ODI वर्ल्ड कप जीत और एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जैसी ऐतिहासिक उपलब्धियां शामिल हैं। साथ ही, इससे लंबे समय से उप-कप्तान रहीं स्मृति मंधाना के लिए नेतृत्व का नया दौर शुरू करने का रास्ता भी खुल गया है।
यह बड़ा ऐलान गुवाहाटी में BCCI (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) की समीक्षा बैठक के बाद किया गया, जिसमें पिछले कुछ महीनों में टीम के प्रदर्शन और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा हुई। BCCI सचिव देवजीत सैकिया की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में हरमनप्रीत, उप-कप्तान स्मृति मंधाना और मुख्य कोच अमोल मजूमदार शामिल हुए।
हालांकि यह पता नहीं चल पाया है कि बैठक में हरमनप्रीत को ऐसा फ़ैसला लेने के लिए मनाया गया था या नहीं, लेकिन इस फ़ैसले के समय ने क्रिकेट जगत में अटकलें तेज़ कर दी हैं।
सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट में हरमनप्रीत ने बताया कि यह फ़ैसला आसान नहीं था, लेकिन कई सालों तक राष्ट्रीय टीम के लिए अपना सब कुछ देने के बाद अब उनके लिए कप्तानी छोड़ने का समय आ गया था। हरमनप्रीत ने पहली बार 2016 में भारत की कप्तानी की ज़िम्मेदारी संभाली थी, जबकि इससे पहले वह कुछ समय के लिए यह भूमिका निभा चुकी थीं।
“आज, मैं सभी फ़ॉर्मेट में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तानी छोड़ रही हूँ। यह फ़ैसला आसान नहीं है। इसमें बरसों की यादें, भावनाएँ, त्याग और ऐसे पल शामिल हैं जो जीवन भर मेरे साथ रहेंगे।
“मैंने इस टीम और भारतीय महिला क्रिकेट के लिए अपना सब कुछ दिया है – अपना खून-पसीना, अपना समय और कई बार, अपने खेल और निजी महत्वाकांक्षाओं का भी एक हिस्सा।” उन्होंने पोस्ट में लिखा, “ऐसे कई पल आए जब मुझे अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन, अपनी तरक्की और अपनी इच्छाओं को एक तरफ रखना पड़ा, क्योंकि मेरा मानना था कि टीम सबसे पहले आती है।”
हरमनप्रीत कौर ने पद क्यों छोड़ा?
महिला टीम की कप्तान के तौर पर हरमनप्रीत का भविष्य लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। कई पूर्व क्रिकेटरों और जानकारों का मानना था कि अब समय आ गया है कि हरमनप्रीत कप्तानी की जिम्मेदारी स्मृति मंधाना को सौंप दें। खेल में हार-जीत तो होती रहती है, लेकिन कप्तान के तौर पर हरमनप्रीत के फैसलों और बल्लेबाज के तौर पर उनके प्रदर्शन पर अक्सर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
इस साल हरमनप्रीत पर पद छोड़ने का दबाव काफी बढ़ गया था, खासकर तब जब भारत T20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में जगह नहीं बना पाया और साथ ही उनका बल्लेबाजी प्रदर्शन भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, खासकर T20 फॉर्मेट में। आलोचनाएं तेजी से बढ़ीं और डायना एडुल्जी जैसे पूर्व खिलाड़ियों ने मंधाना को कप्तान बनाने की वकालत की। हालांकि, हरमनप्रीत ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्होंने जो भी फैसला लिया, वह पूरी तरह से टीम के फायदे के लिए था।
“एक कप्तान के तौर पर मुझे मुश्किल फैसले लेने पड़े हैं। ऐसे फैसले जिन्हें हमेशा समझा नहीं गया, जो हमेशा आसान नहीं थे और कभी-कभी जिनकी व्यक्तिगत कीमत भी चुकानी पड़ी। लेकिन मेरा हर फैसला एक ही मकसद से लिया गया था – इस टीम को बेहतर बनाना और दूसरे खिलाड़ियों को आगे बढ़ने, खुद पर भरोसा करने और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का मौका देना।”
“मैंने सब कुछ देखा है। मैंने सबसे बुरे पल, दिल टूटने का दर्द, आलोचनाएं, शक और ऐसे दिन भी देखे हैं जब कुछ भी हमारे पक्ष में नहीं होता था। और मैंने सबसे शानदार पल भी अनुभव किए हैं – जीत, जश्न, देश का प्रतिनिधित्व करने का गर्व और वे पल जिन्होंने हर कुर्बानी को सार्थक बना दिया।” “आज मैं मिली-जुली भावनाओं के साथ कप्तानी छोड़ रही हूँ, लेकिन साथ ही मन में शांति भी है। क्योंकि मुझे सच में लगता है कि मेरी टीम सही रास्ते पर है। एक ऐसी टीम जिसमें टैलेंट, मज़बूत इरादे और भरोसा है; और जिसका भविष्य देखने और उसका हिस्सा बनने के लिए मैं बहुत उत्साहित हूँ। मुझे लगता है कि मैंने अपना फ़र्ज़ निभाया है। मैंने इस टीम के लिए अपना सब कुछ दिया। मैंने गर्व के साथ ज़िम्मेदारी निभाई, और भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तानी करने का मौका मिलने के लिए मैं हमेशा आभारी रहूँगी।”
हरमनप्रीत ने कप्तानी छोड़ने का फ़ैसला तो पक्का कर लिया है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी साफ़ किया है कि वह खेलना जारी रखेंगी।
“अब, मेरे लिए आगे बढ़ने का समय आ गया है। कप्तानी भले ही आज खत्म हो रही हो, लेकिन भारतीय क्रिकेट के लिए मेरा प्यार कभी खत्म नहीं होगा। हर उस टीममेट, कोच, सपोर्ट स्टाफ़, मैनेजमेंट, BCCI, परिवार के सदस्य और हर उस फ़ैन का शुक्रिया, जो उतार-चढ़ाव के समय मेरे साथ खड़े रहे। खून-पसीना, त्याग और गर्व – मैंने सब कुछ दिया। अब, मैं खेल के प्रति अपने प्यार के लिए फिर से खेलने को तैयार हूँ। कप्तानी खत्म हो रही है, लेकिन सफ़र जारी रहेगा,” उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा।
सभी फ़ॉर्मेट में नेशनल टीम की कप्तानी छोड़ने के फ़ैसले से हरमनप्रीत टैक्टिकल जांच-परख के भारी दबाव से मुक्त हो पाएँगी और पूरी तरह से अपनी ज़बरदस्त बल्लेबाज़ी पर ध्यान दे पाएँगी। साथ ही, इससे नेशनल टीम को आने वाले ग्लोबल टूर्नामेंट से पहले नई रणनीति के साथ खुद को ढालने का काफ़ी समय भी मिल जाएगा।
