पारिवारिक बैकग्राउंड के कारण मुझे फिल्म नहीं मिली, ना ही मेरे पिता ने इसमें मदद की: सारा अली खान
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: अभिनेत्री सारा अली खान ने अपने पारिवारिक बैकग्राउंड को लेकर चल रही चर्चाओं पर बात की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पिता, अभिनेता सैफ अली खान ने कभी भी उनके फिल्म कॉन्ट्रैक्ट्स पर बातचीत नहीं की और न ही इंडस्ट्री में अपनी पहुंच का इस्तेमाल उनके लिए काम दिलाने में किया। उन्होंने एक मशहूर फिल्मी परिवार से आने के दोहरे पहलुओं पर चर्चा की।
सारा ने बताया कि हालांकि उनके बैकग्राउंड की वजह से उन्हें शुरुआत में आसानी से पहचान मिल गई, लेकिन अक्सर इसी वजह से उनकी अपनी मेहनत और करियर में लिए गए स्वतंत्र फैसलों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
‘फिल्मफेयर’ से बातचीत में सारा ने बताया कि उनकी परवरिश उनकी सिंगल मदर, अमृता सिंह ने की है। उनके करियर से जुड़े फैसलों में इंडस्ट्री का कोई ‘गॉडफादर’ या पारंपरिक सपोर्ट सिस्टम नहीं था।
उन्होंने कहा, “मैं अपनी सिंगल मदर के साथ रहती हूँ। मेरे पिता कभी किसी ऑफिस में जाकर मेरे कॉन्ट्रैक्ट्स पर बातचीत नहीं करते थे और न ही उन्होंने कभी किसी से मुझे अपनी फिल्मों में लेने की गुजारिश की। जब मुझे ‘केदारनाथ’ के समय कोई परेशानी हुई, तो मैंने उसे खुद ही सुलझाया। उस वक्त मेरे साथ कोई नहीं था। यह एक दोधारी तलवार की तरह है, क्योंकि इंडस्ट्री में मेरा कोई गॉडफादर नहीं रहा है।”
सारा ने माना कि अपने परिवार की वजह से उन्हें कुछ खास फायदे जरूर मिले हैं। उन्होंने कहा कि वह इतनी नासमझ या भ्रम में नहीं हैं कि उन मौकों को न देख सकें जो उनके पारिवारिक बैकग्राउंड की वजह से उन्हें शुरुआत में मिल गए थे। हालांकि, उनका यह भी मानना है कि लगातार होने वाली जांच-परख की वजह से उन पर उम्मीदों का एक बहुत ऊंचा और अनुचित बोझ डाल दिया जाता है।
सारा ने इस बात पर जोर दिया कि ‘नेपोटिज्म’ (भाई-भतीजावाद) शब्द को पूरी तरह से नकारात्मक बना दिया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि यह उन ‘स्टार किड्स’ – जैसे कि खुद सारा, जाह्नवी कपूर और अनन्या पांडे – की कड़ी मेहनत को कम करके आंकता है, जबकि अपने माता-पिता को चुनने में इन कलाकारों का कोई हाथ नहीं था।
सारा ने यह तो माना कि उन्हें और उनके साथियों को ऐसे शानदार डेब्यू मिले, जिनके लिए कई नए कलाकार तरसते हैं, लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर खुद को साबित करने का बोझ हमेशा उन्हीं के कंधों पर क्यों रहता है? हिंदी सिनेमा में अपने आठ साल के सफर के बाद, उनका कहना है कि अब उन्हें बार-बार यह साबित करने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए कि वह इंडस्ट्री में अपनी जगह की हकदार हैं।
