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मोदी का विरोध किया है, लेकिन कोई गोरा हमें हुक्म नहीं दे सकता: ओवैसी का एलन मस्क पर हमला

"I have opposed Modi, but no white man can dictate to us": Owaisi lashes out at Elon Musk
(File Photo/Twitter)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुखर आलोचक रहे AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क के भारत की राजनीतिक और कारोबारी व्यवस्था पर सवाल उठाने को लेकर अलग रुख अपनाया है। ओवैसी ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करने का मतलब यह नहीं है कि किसी विदेशी उद्योगपति को भारत के फैसलों पर सवाल उठाने या देश को निर्देश देने का अधिकार मिल जाता है। वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मस्क के आरोपों के बहाने केंद्र सरकार और बड़े उद्योगपतियों के संबंधों पर एक बार फिर निशाना साधा।

यह विवाद एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की मंजूरी मिलने में हो रही देरी को लेकर शुरू हुआ। मस्क ने आरोप लगाया कि भारत में कुछ प्रभावशाली कारोबारी समूह उनकी कंपनी के बाजार में प्रवेश में बाधा डाल रहे हैं। इसके बाद उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या भारत में असली सत्ता उन्हीं के हाथ में है और क्या देश के ‘प्रधानमंत्री मुकेश अंबानी’ हैं।

इस विवाद ने राजनीतिक रूप ले लिया है। विपक्षी दल इसे केंद्र सरकार और बड़े उद्योगपतियों के संबंधों पर सवाल उठाने के अवसर के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, ओवैसी ने इस मुद्दे को भाजपा के राष्ट्रवाद के दावों से जोड़ते हुए सवाल किया कि जब कोई विदेशी उद्योगपति भारत की निर्णय प्रक्रिया को चुनौती देता है, तो सत्तारूढ़ दल का रुख क्या होता है।

‘मोदी का विरोध करते हैं, लेकिन भारत के फैसले कोई विदेशी नहीं करेगा’

हैदराबाद में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर AIMIM की ओर से सुप्रीम कोर्ट का रुख किए जाने के बाद पत्रकारों से बातचीत में ओवैसी ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधी रहे हैं और आगे भी रहेंगे। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह किसी विदेशी उद्योगपति को भारत के प्रधानमंत्री और देश की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाने का समर्थन करेंगे।

16 अक्टूबर को उन्होंने कहा, “हम हमेशा नरेंद्र मोदी के खिलाफ रहे हैं और आगे भी रहेंगे। लेकिन एलन मस्क हमारे भारत के प्रधानमंत्री के बारे में इस तरह की बातें कैसे लिख सकते हैं?”

ओवैसी ने भाजपा और केंद्र सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो पार्टी अक्सर राष्ट्रवाद की बात करती है, वह एक प्रभावशाली विदेशी कारोबारी के सामने सवाल उठाने से क्यों हिचकिचाती दिखाई देती है।

उन्होंने कहा, “दुख की बात यह है कि भाजपा और मोदी सरकार गोरी चमड़ी से इतना डर क्यों रही है?”

ओवैसी का तर्क प्रधानमंत्री मोदी की राजनीति का समर्थन करना नहीं, बल्कि घरेलू राजनीतिक विरोध और देश के नीतिगत फैसलों पर किसी बाहरी व्यक्ति के प्रभाव के बीच अंतर स्पष्ट करना था।

स्टारलिंक विवाद में मस्क ने अंबानी पर उठाए सवाल

एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को भारत में व्यावसायिक परिचालन शुरू करने के लिए जरूरी मंजूरियों का इंतजार है। मस्क ने आरोप लगाया कि भारत में कुछ ‘ओलिगार्क’ यानी बेहद प्रभावशाली कारोबारी समूह अपने वर्चस्व को बचाने के लिए उनकी कंपनी के प्रवेश में बाधा डाल रहे हैं।

इसके बाद उन्होंने मुकेश अंबानी को लेकर सवाल उठाया कि क्या वही भारत के असली ‘बॉस’ हैं।

केंद्र सरकार ने नियामकीय प्रक्रिया में पक्षपात या भेदभाव के आरोपों को खारिज किया है। सरकार के अनुसार, सैटेलाइट संचार सेवाओं से जुड़ी तीन कंपनियों—स्टारलिंक, रिलायंस जियो की सैटेलाइट सेवा और भारती समूह समर्थित यूटेलसैट वनवेब—की सुरक्षा संबंधी जांच चल रही है। सरकार ने कहा कि तीनों कंपनियां प्रक्रिया के लगभग समान चरण में हैं और आवश्यक सुरक्षा मंजूरियों तथा स्पेक्ट्रम संबंधी स्वीकृतियों के बिना कोई भी कंपनी व्यावसायिक सेवा शुरू नहीं कर सकती।

इस विवाद ने दो अहम सवाल खड़े किए हैं। पहला, क्या सरकार सभी प्रतिस्पर्धी कंपनियों पर नियामकीय नियम समान रूप से लागू कर रही है? दूसरा, क्या कोई विदेशी अरबपति अपनी कारोबारी ताकत और सार्वजनिक मंच का इस्तेमाल करके भारत के नीतिगत फैसलों को प्रभावित कर सकता है?

ओवैसी ने मुख्य रूप से दूसरे सवाल पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “देश के संसाधनों का इस्तेमाल कैसे होगा, यह देश तय करेगा। क्या यह गोरा आदमी बैठकर हमें निर्देश देगा?”

अमेरिका की ऊर्जा नीति पर भी उठाए सवाल

ओवैसी ने भारत के ऊर्जा संबंधी फैसलों को लेकर अमेरिका के रुख पर भी सवाल उठाया। उन्होंने तर्क दिया कि वाशिंगटन भारत पर रूसी तेल पर निर्भरता कम करने का दबाव डालता है, जबकि अमेरिका खुद भी रूस से जुड़े ऊर्जा उत्पाद खरीदता रहा है।

उन्होंने भारत में कम डेटा शुल्क का भी उल्लेख करते हुए कहा कि देश की मौजूदा व्यवस्था को केवल इस आधार पर गलत नहीं ठहराया जा सकता कि उससे किसी विदेशी कंपनी के कारोबारी हित प्रभावित होते हैं।

ओवैसी के मुताबिक, मुद्दा मोदी सरकार के हर फैसले का बचाव करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि भारत की नीतियां भारतीय हितों के आधार पर तय हों।

उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी घरेलू राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाती है, लेकिन विदेशी प्रभावशाली व्यक्तियों के सामने उतनी मजबूती नहीं दिखाती।

ओवैसी ने प्रधानमंत्री मोदी से भी मस्क को स्पष्ट संदेश देने की मांग की कि भारत अपने फैसले खुद करेगा। उन्होंने कहा, “आप किसी गोरे आदमी का पेट भरने के लिए देश के नागरिकों का पेट नहीं काटेंगे।”

उनका कहना था कि भारतीय नागरिकों और कामगारों के हित किसी विदेशी उद्योगपति के कारोबारी हितों से ऊपर होने चाहिए।

राहुल गांधी ने अडानी का नाम लिए बिना साधा निशाना

एलन मस्क के बयान पर राहुल गांधी ने अलग अंदाज में प्रतिक्रिया दी। जब मस्क ने पूछा कि क्या मुकेश अंबानी भारत के असली ‘बॉस’ हैं, तो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “भारत में आपका स्वागत है, एलन। अभी आप दूसरे व्यक्ति से मिलिए।”

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन इसे उद्योगपति गौतम अडानी की ओर इशारा माना गया। कांग्रेस और राहुल गांधी लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि अडानी को प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार से निकटता का लाभ मिलता है।

राहुल गांधी ने इंस्टाग्राम पर भी प्रधानमंत्री मोदी और गौतम अडानी की एक तस्वीर साझा की, जिसमें दोनों एक विमान में दिखाई दे रहे थे।

मस्क ने राहुल गांधी की पोस्ट पर जवाब दिया, “धन्यवाद, राहुल। यह वास्तव में चिंताजनक है।”

इस बातचीत ने राहुल गांधी को कांग्रेस के उस पुराने आरोप को फिर उठाने का अवसर दिया कि भाजपा सरकार के दौरान राजनीतिक सत्ता और कॉरपोरेट प्रभाव के बीच संबंध जरूरत से ज्यादा मजबूत हो गए हैं।

राहुल गांधी की प्रतिक्रिया मुख्य रूप से राजनीतिक हमला थी। उन्होंने नियामकीय प्रक्रिया का विस्तृत विश्लेषण करने के बजाय मस्क के आरोपों को आगे बढ़ाया और चर्चा को अडानी तथा प्रधानमंत्री के साथ उनके संबंधों की ओर मोड़ दिया।

ओवैसी और राहुल गांधी के रुख में क्या अंतर?

एलन मस्क के बयान पर राहुल गांधी और असदुद्दीन ओवैसी की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग राजनीतिक दृष्टिकोण को सामने लाती हैं।

राहुल गांधी ने इस विवाद को केंद्र सरकार और बड़े उद्योगपतियों के कथित करीबी संबंधों पर सवाल उठाने के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया। इसके विपरीत, ओवैसी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करने का अर्थ यह नहीं है कि किसी विदेशी अरबपति को भारत की राजनीतिक व्यवस्था या नीतिगत फैसलों पर हावी होने दिया जाए।

ओवैसी की सबसे प्रमुख दलील यही रही कि प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना करना और भारत के निर्णय लेने के अधिकार की रक्षा करना दो अलग बातें हैं।

उन्होंने भाजपा से भी सवाल किया कि जब कोई विदेशी उद्योगपति भारत की निर्णय प्रक्रिया को चुनौती देता है, तो राष्ट्रवाद की बात करने वाली पार्टी को अपना रुख स्पष्ट करने में हिचकिचाहट क्यों होनी चाहिए।

इस तरह, स्टारलिंक की मंजूरी में देरी से शुरू हुआ विवाद अब केवल कारोबारी प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रह गया है। यह भारत की नियामकीय व्यवस्था, बड़े उद्योगपतियों के प्रभाव, राष्ट्रीय संप्रभुता और राजनीतिक राष्ट्रवाद से जुड़े सवालों का रूप ले चुका है।

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