मुझे बहुत दुख है: एशियन गेम्स में मिली निराशा के बाद पीवी सिंधु ने आयोजकों की कड़ी आलोचना की

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: एशियन गेम्स में महिला सिंगल्स के क्वार्टर-फ़ाइनल से बाहर होने के बाद पीवी सिंधु ने आयोजकों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि बहुत ज़्यादा व्यस्त शेड्यूल की वजह से उन पर बुरा असर पड़ा और चीन की चेन युफेई से हार के दौरान वीडियो रिव्यू की सुविधा न होने पर भी सवाल उठाए।
रविवार को पहला गेम आसानी से जीतने के बाद सिंधु दुनिया की नंबर 4 खिलाड़ी से 21-11, 18-21, 10-21 से हार गईं। दूसरे गेम में स्कोर 18-18 की बराबरी पर था, लेकिन चेन ने लगातार तीन पॉइंट जीतकर मैच पर पकड़ बना ली और गेम को निर्णायक दौर (decider) तक ले गईं, जिसे उन्होंने 21-10 से जीता।
सिंधु ने कहा कि वे तीन पॉइंट लगातार उनके दिमाग में घूम रहे हैं। सिंधु ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “मेरा एशियन गेम्स का सफ़र खत्म हो गया है और मुझे दुख है। मैं उस क्वार्टर-फ़ाइनल को जीतने से बस तीन पॉइंट दूर थी। मैं बार-बार उन्हीं तीन पॉइंट के बारे में सोच रही हूँ।”
पूर्व वर्ल्ड चैंपियन ने यह भी कहा कि वीडियो रिव्यू सिस्टम न होने से उनकी निराशा और बढ़ गई। सिंधु ने अपना क्वार्टर-फ़ाइनल कोर्ट 4 पर खेला, जहाँ वीडियो रेफरल की सुविधा नहीं थी, क्योंकि एशियन गेम्स में यह सिस्टम सिर्फ़ कोर्ट 1 और 2 पर ही इस्तेमाल हो रहा था।
उन्हें लगा कि लाइन के पास के कुछ फ़ैसले उनके पक्ष में जा सकते थे और शायद दूसरे गेम का रुख बदल सकते थे।
शेड्यूल की वजह से सिंधु को मैचों के बीच रिकवर करने के लिए बहुत कम समय मिला। उन्होंने लगभग 24 घंटों में तीन सिंगल्स मैच खेले; जापान की टोमोका मियाज़ाकी के ख़िलाफ़ उनका तीसरा राउंड का मैच रविवार को सुबह करीब 1:30 बजे खत्म हुआ और 12 घंटे से भी कम समय में वह चेन के ख़िलाफ़ क्वार्टर-फ़ाइनल के लिए कोर्ट पर लौट आईं।
सिंधु ने लिखा, “18 घंटों में तीन मैच। सुबह 3 बजे लौटना और फिर सुबह 8:30 बजे दोबारा निकलना। इसका बुरा असर पड़ा।”
इस मुश्किल शेड्यूल का असर दूसरे सिंगल्स खिलाड़ियों पर भी पड़ा। उन्नति हुड्डा ने भी क्वार्टर-फ़ाइनल में जापान की अकाने यामागुची से हारने से पहले लगभग 26 घंटों में तीन मैच खेले। एशियाई खेलों में कम समय में कई मैच होने वाले शेड्यूल की दूसरे खिलाड़ियों ने भी आलोचना की थी। चीन की महिला डबल्स की वर्ल्ड नंबर 1 खिलाड़ी टैन निंग ने कहा कि उन्हें यह शेड्यूल सही नहीं लगा, वहीं भारत के एचएस प्रणय ने मैचों के बीच बहुत कम समय मिलने पर सवाल उठाए, खासकर उन खिलाड़ियों के लिए जिन्होंने टीम इवेंट में हिस्सा लिया था।
हालांकि, सिंधु के लिए क्वार्टर-फ़ाइनल में हार का दुख तो था ही, लेकिन साथ ही उन्हें अपने चौथे एशियाई खेलों में हिस्सा लेने पर गर्व भी महसूस हुआ।
उन्होंने लिखा, “2014 में अपने पहले एशियाई खेलों से लेकर अब अपने चौथे एशियाई खेलों तक, मैंने भारत के लिए अपना सब कुछ दिया है – पूरे बारह साल।” “मैं इस एहसास को महसूस करना चाहती हूं। एक दुखद नतीजा उस सफ़र को तय नहीं कर सकता जो मेरे लिए इतना मायने रखता है।” सिंधु ने यह भी साफ़ किया कि इस हार से आगे भी खेलते रहने की उनकी इच्छा कम नहीं हुई है। उन्होंने लिखा, “मैं और मेरी टीम उन पलों से आगे बढ़ने पर काम कर रहे हैं। हम इसे ठीक कर लेंगे।” “मुझे दुख हो रहा है, लेकिन कोई बात नहीं। मुझे खुशी है कि यह मेरे लिए इतना मायने रखता है कि मुझे इतना दुख हो रहा है। मैं अब भी यह चाहती हूं। मैं अब भी कोर्ट पर अपना सब कुछ झोंक देती हूं।”
एशियाई खेलों में बैडमिंटन के व्यक्तिगत इवेंट्स में भारत का सफ़र 12 साल में पहली बार बिना किसी मेडल के खत्म हुआ।
