भारत रूस तेल आयात विवाद: क्रेमलिन ने ट्रंप के दावे का खंडन किया
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भारत ने हाल में अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) के हिस्से के तौर पर रूसी तेल की खरीद बंद करने पर सहमति दी है। ट्रंप ने कहा कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा और इसके बजाय संयुक्त राज्य और संभवतः वेनेजुएला से तेल खरीदेगा — और इसलिए अमेरिका ने भारत पर पहले लगाए गए भारी शुल्क को कम कर दिया है।
क्रेमलिन ने ट्रंप के दावे का खंडन किया
रूसी सरकार ने इस दावे को खारिज किया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने स्पष्ट किया कि मॉस्को को भारत की ओर से कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है कि भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद रोकने का फैसला लिया है। रूस का मानना है कि भारत हमेशा से विभिन्न देशों से तेल खरीदता रहा है और यह कोई नई बात नहीं है।
उन्होंने कहा कि “भारत किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है” और तेल आपूर्तिकर्ताओं को विविध बनाना कोई नया कदम नहीं है।
भारत ने अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की
भारत की ओर से भी कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है कि उसने रूसी तेल की खरीद पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया है। भारतीय रिफ़ाइनर कंपनियों ने बताया है कि कई मौजूदा अनुबंध हैं जिनके तहत फरवरी-मार्च तक रूसी तेल आ रहा है, जिससे अचानक इस आयात को रोक पाना मुश्किल है।
भारत सरकार ने कहा है कि ऊर्जा सुरक्षा उसका प्राथमिक लक्ष्य है और वह अपने क्रूड सप्लायर्स को विविध रखेगा। इसमें रूस के अलावा अन्य देशों से तेल खरीद जारी है और यह रणनीति नई नहीं है।
भू-राजनीतिक पृष्ठभूमि
पिछले कुछ वर्षों में, विशेष रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत ने सस्ते रूसी कच्चे तेल का भारी आयात किया है जिससे वह दुनिया के बड़े आयातकों में शामिल हुआ। हालांकि पिछले साल अमेरिका ने इस आयात को लेकर भारत पर 50% तक के टैरिफ भी लगाया था — जिसका राजनीतिक और व्यापारिक स्तर पर काफी विरोध भी हुआ था।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर भारत रूसी तेल आयात में कटौती भी करता है, तो वह धीरे-धीरे और रणनीतिक रूप से होगा — तत्काल बंद करना सम्भव नहीं है। अमेरिकी शेल ऑयल की आपूर्ति मात्रा और गुणवत्ता रूस से आने वाले तेल से अलग है, जिससे पूरी तरह से स्थानांतरण तुरंत नहीं हो सकता।
