पश्चिम एशिया संकट पर भारत सतर्क, उपभोक्ताओं के हित सर्वोच्च प्राथमिकता: एस. जयशंकर

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को राज्य सभा में कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय उपभोक्ताओं के हित सरकार की “सर्वोच्च प्राथमिकता” रहेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में गंभीर व्यवधान पैदा हो सकता है।
सदन में विपक्षी सांसदों के शोर-शराबे के बीच दिए गए बयान में जयशंकर ने कहा कि हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज हुआ है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री मार्गों और वैश्विक व्यापार पर असर को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। उन्होंने बताया कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और भारत की अर्थव्यवस्था व आपूर्ति श्रृंखलाओं पर इसके संभावित प्रभाव का आकलन कर रही है।
जयशंकर ने कहा कि भारत सरकार ने 20 फरवरी को जारी अपने बयान में क्षेत्र की स्थिति पर गहरी चिंता जताई थी और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी। उन्होंने दोहराया कि तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।
विदेश मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिरता वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत के आर्थिक हितों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “पश्चिम एशिया का स्थिर और शांतिपूर्ण रहना आवश्यक है।” साथ ही उन्होंने बताया कि भारत अपने साझेदार देशों के साथ लगातार संपर्क में है और घटनाक्रम पर करीब से नजर रखे हुए है।
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत के राष्ट्रीय हित, विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा और भारतीय उपभोक्ताओं का कल्याण, सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और अब तक लगभग 67,000 भारतीय नागरिक उस क्षेत्र से वापस लौट चुके हैं।
विदेश मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि भारत ने ईरान के अनुरोध पर उसके युद्धपोत IRIS लवण को कोच्चि पोर्ट पर डॉक करने की अनुमति दी। यह अनुमति 1 मार्च को दी गई थी और जहाज 4 मार्च को कोच्चि बंदरगाह पर पहुंचा।
इससे पहले शनिवार को रायसीना डायलॉग में बोलते हुए जयशंकर ने कहा था कि भारत ने यह निर्णय भू-राजनीतिक कारणों से नहीं बल्कि “मानवीय आधार” पर लिया। 183 चालक दल के सदस्यों—जिनमें अधिकतर युवा कैडेट थे—को लेकर चल रहे इस जहाज में तकनीकी समस्या की सूचना मिली थी।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब ईरान का एक अन्य नौसैनिक जहाज IRIS Dena को Indian Ocean में 4 मार्च को एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा डुबो दिया गया। इस घटना में 80 से अधिक नाविकों की मौत हो गई, जबकि करीब 32 कर्मियों को बाद में Sri Lanka Navy ने बचा लिया।
जयशंकर ने इस घटना को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए कहा कि जहाज से संकट संदेश मिलने के बाद भारत ने खोज और बचाव अभियान के लिए समुद्री गश्ती विमान और नौसैनिक जहाज सहित अपने संसाधन तैनात किए थे। उन्होंने कहा कि IRIS Lavan को डॉकिंग की अनुमति देना “सही निर्णय” था और भारत आगे भी तनाव कम करने के लिए संयम तथा कूटनीतिक प्रयासों की अपील करता रहेगा।
