डिजिटल पंचायत की ओर भारत: एआई, ड्रोन और ई-गवर्नेंस से बदली ग्रामीण शासन की तस्वीर
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: ग्रामीण भारत में शासन व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में पंचायती राज संस्थानों में तकनीक की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2025 में सरकार ने डिजिटल गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन तकनीक के जरिए ग्राम पंचायतों को सशक्त करने पर विशेष जोर दिया है।
पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के स्थानीयकरण और ‘विकसित भारत’ के विजन के तहत पंचायतों को ग्रामीण विकास की धुरी के रूप में मजबूत किया गया है। इस क्रम में SVAMITVA योजना एक अहम उदाहरण बनकर उभरी है, जिसके तहत गांवों में संपत्ति अधिकारों को कानूनी मान्यता दी जा रही है।
जनवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ही दिन में 65 लाख ग्रामीण नागरिकों को प्रॉपर्टी कार्ड वितरित किए। यह वितरण 10 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 50 हजार से अधिक गांवों में हुआ। अब तक SVAMITVA योजना के तहत 2.25 करोड़ से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड बांटे जा चुके हैं। योजना के अंतर्गत 3.28 लाख गांवों में ड्रोन सर्वे पूरा किया गया है, जबकि 1.82 लाख गांवों के लिए 2.76 करोड़ प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जा चुके हैं।
ग्रामीण लोकतंत्र को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए मंत्रालय ने ‘सभा सार’ नामक एआई आधारित टूल भी लॉन्च किया है। यह टूल ग्राम सभाओं की ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग से स्वतः बैठक की कार्यवाही (मिनट्स) तैयार करता है। ‘सभा सार’ 13 क्षेत्रीय भाषाओं में काम करता है और इसे सरकार के राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मंच भाषिणी से जोड़ा गया है।
10 दिसंबर तक देशभर की 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 92,869 ग्राम पंचायतों में 1,43,124 बैठकों की डिजिटल कार्यवाही ‘सभा सार’ के माध्यम से दर्ज की जा चुकी है। इससे न केवल दस्तावेज़ी बोझ कम हुआ है, बल्कि पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ी है।
वित्तीय प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए ई-ग्राम स्वराज प्लेटफॉर्म को 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराया गया है। इसके जरिए 2.52 लाख ग्राम पंचायतों और 5,400 ब्लॉक पंचायतों ने अपने विकास योजनाएं (GPDP और BPDP) अपलोड की हैं। साथ ही, इतनी ही ग्राम पंचायतों को ई-ग्राम स्वराज-PFMS सिस्टम से जोड़ा गया है।
डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक और कदम उठाते हुए मंत्रालय ने पंचायत भवन वाले ग्राम पंचायतों के लिए 19,472 कंप्यूटरों को स्वीकृति दी है। इसका उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर प्रशासन को पूरी तरह डिजिटल बनाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक आधारित ये पहलें न केवल पंचायतों की कार्यक्षमता बढ़ा रही हैं, बल्कि ग्रामीण भारत में सुशासन की नई मिसाल भी पेश कर रही हैं।
