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एलन मस्क के आरोप पर भारत का जवाब, ‘स्टारलिंक के लिए नियामक व्यवस्था निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण’

India's response to Elon Musk's allegation: 'Regulatory framework for Starlink is fair and non-discriminatory'
(Pic:Twitter/ @realDonaldJNews)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: भारत सरकार ने अमेरिकी अरबपति एलन मस्क के उस दावे को खारिज किया है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत में कुछ प्रभावशाली कारोबारी स्टारलिंक की उपग्रह संचार सेवाओं को शुरू होने से रोक रहे हैं, ताकि देश में अपना एकाधिकार बनाए रखा जा सके।

मस्क के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए संचार मंत्रालय ने कहा कि भारत में सभी दूरसंचार सेवाओं के लिए निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण अनुमति व्यवस्था लागू है। इसमें उपग्रह आधारित संचार सेवाएं भी शामिल हैं।

तीन कंपनियों को मिला उपग्रह संचार लाइसेंस

भारत सरकार ने देश में वैश्विक मोबाइल व्यक्तिगत उपग्रह संचार सेवा के लिए अब तक तीन कंपनियों को लाइसेंस दिया है। इनमें एलन मस्क की स्टारलिंक, भारती समर्थित यूटेलसैट वनवेब और जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस लिमिटेड शामिल हैं।

जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस, जियो प्लेटफॉर्म्स की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है। इसके अलावा जेफ बेजोस के स्वामित्व वाली अमेजन लियो भी भारत में इस सेवा के लिए लाइसेंस हासिल करने की दौड़ में है।

संचार मंत्रालय के मुताबिक, उपग्रह संचार सेवाओं के लिए लाइसेंस गैर-भूस्थिर कक्षा आधारित उपग्रह संचार व्यवस्था के तहत दिए गए हैं। इसका उद्देश्य भारत में उपग्रह संचार सेवाओं को उपलब्ध कराने के लिए एक समान व्यवस्था तैयार करना है।

मंत्रालय ने कहा कि लाइसेंस की शर्तों के तहत प्रत्येक कंपनी को सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं का पालन करना अनिवार्य है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाएं उपयोगकर्ताओं और उनके आंकड़ों की सुरक्षा से जुड़े सभी मानकों को पूरा करें।

मंत्रालय के अनुसार, तीनों लाइसेंसधारी कंपनियों की सुरक्षा संबंधी जांच फिलहाल जारी है। किसी कंपनी की यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह स्पेक्ट्रम आवंटन के अगले चरण के लिए आवेदन कर सकती है।

स्टारलिंक को लाइसेंस मिले एक साल से ज्यादा समय

एलन मस्क की स्टारलिंक को भारत में सेवाएं शुरू करने के लिए जरूरी लाइसेंस मिले एक साल से अधिक समय हो चुका है। हालांकि, कंपनी को अभी तक देश में अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए सभी अंतिम मंजूरियां नहीं मिली हैं।

संचार मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि फिलहाल तीनों लाइसेंस प्राप्त कंपनियां नियामकीय प्रक्रिया के लगभग एक ही चरण में हैं। मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर भारत की उपग्रह संचार सेवाओं से जुड़ी नियामक व्यवस्था को लेकर चल रही चर्चाओं पर कहा कि इसे भेदभावपूर्ण तरीके से लागू किए जाने का दावा आधारहीन और गलतफहमी पर आधारित है।

एलन मस्क ने क्या कहा था?

भारत सरकार की यह सफाई एलन मस्क की सोशल मीडिया पोस्ट के बाद आई। मस्क ने आरोप लगाया था कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी भारत में स्टारलिंक को रोक रहे हैं, ताकि देश में उनका एकाधिकार बना रहे।

हालांकि, मस्क के इस बयान से कुछ घंटे पहले ही उनकी कंपनी स्पेसएक्स की एक वरिष्ठ अधिकारी ने भारत में स्टारलिंक सेवा शुरू करने की तैयारी पूरी होने की जानकारी दी थी।

भारत में सेवा शुरू करने के लिए तैयार स्टारलिंक

इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में स्पेसएक्स की स्टारलिंक कारोबार संचालन की उपाध्यक्ष लॉरेन ड्रेयर ने कहा कि कंपनी ने भारतीय बाजार के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करने में निवेश किया है।

उन्होंने बताया कि स्टारलिंक ने भारत की सुरक्षा जरूरतों और अन्य नियमों को ध्यान में रखते हुए अपनी संचालन व्यवस्था तैयार की है। इसके तहत भारतीय उपयोगकर्ताओं के आंकड़ों को भारत में ही रखने की व्यवस्था भी की गई है।

ड्रेयर के मुताबिक, कंपनी ने भारत में पहले से ही जमीनी बुनियादी ढांचा तैयार कर लिया है। इसमें 20 गेटवे केंद्र और सैकड़ों एंटीना शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि उसने भारत में सेवाएं देने के लिए आवश्यक संचालन व्यवस्था भी तैयार कर ली है।

ऐसे में स्टारलिंक की भारत में सेवा शुरू होने का अगला कदम अब नियामकीय और सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाओं के पूरा होने पर निर्भर करेगा।

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