क्रुणाल पांड्या की शानदार पारी ने MI को बाहर किया, RCB ने आखिरी गेंद पर जीता रोमांचक मुकाबला
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल स्टेडियम में रविवार, 10 मई की रात क्रिकेट प्रेमियों के लिए किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं रही। इंडियन प्रीमियर लीग के इस सीज़न का पहला असली लो-स्कोरिंग थ्रिलर देखने को मिला, जहाँ हर गेंद के साथ मैच का रोमांच बढ़ता गया। इस यादगार मुकाबले में भुवनेश्वर कुमार ने बल्ले और गेंद दोनों से ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने उन्हें रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर का सबसे बड़ा हीरो बना दिया।
पिछले दो मुकाबलों में लगातार हार झेल चुकी RCB के लिए यह मैच करो या मरो जैसा था। दिल्ली कैपिटल्स और गुजरात टाइटन्स के खिलाफ मिली हार के बाद टीम की प्लेऑफ की राह मुश्किल होती जा रही थी। ऐसे कठिन समय में अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ भुवनेश्वर कुमार टीम के संकटमोचक बनकर सामने आए।
नई गेंद हाथ में लेते ही भुवनेश्वर ने मुंबई इंडियंस की बल्लेबाज़ी की कमर तोड़ दी। उनकी सटीक लाइन-लेंथ और स्विंग के आगे MI के बल्लेबाज़ पूरी तरह बेबस नज़र आए। महज़ तीन ओवर के भीतर मुंबई का स्कोर 28/3 हो चुका था। इसके बाद डेथ ओवरों में लौटकर उन्होंने उस समय तिलक वर्मा का अहम विकेट लिया, जब वह मुंबई को बड़े स्कोर तक पहुँचाने के लिए पूरी तरह तैयार दिखाई दे रहे थे। भुवनेश्वर ने अपने चार ओवरों में सिर्फ 24 रन देकर चार विकेट झटके और अकेले दम पर मैच का रुख बदल दिया।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
RCB की बल्लेबाज़ी लड़खड़ाने लगी और एक आसान दिख रहा लक्ष्य अचानक बेहद मुश्किल बन गया। आखिरी ओवर में टीम को जीत के लिए 11 रन चाहिए थे और सिर्फ तीन गेंदें बची थीं। तनाव अपने चरम पर था। तभी भुवनेश्वर कुमार ने वह कर दिखाया, जिसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
राज अंगद बावा की वाइड यॉर्कर पर उन्होंने ज़ोरदार बल्ला घुमाया। गेंद सीधे बल्ले के बीचों-बीच लगी और डीप पॉइंट के ऊपर से उड़ते हुए सीमा रेखा के पार जा गिरी। यह पिछले 10 वर्षों में भुवनेश्वर कुमार का पहला IPL छक्का था। पूरे स्टेडियम में शोर गूंज उठा और मैच अचानक फिर से RCB की पकड़ में आता दिखा।
पुराने IPL फैंस को वह दौर जरूर याद होगा जब भुवनेश्वर को एक उपयोगी ‘पिंच हिटर’ माना जाता था। 2016 में सनराइजर्स हैदराबाद के खिताबी अभियान के दौरान उन्होंने तेज़ स्ट्राइक-रेट से उपयोगी रन भी बनाए थे। मगर समय के साथ उनकी बल्लेबाज़ी चर्चा से बाहर हो गई थी। ऐसे में इस निर्णायक मुकाबले में उनका यह छक्का किसी फिल्मी मोड़ से कम नहीं लगा।
आखिरी गेंद पर RCB को जीत के लिए दो रन चाहिए थे। भुवनेश्वर और रासिक सलाम ने बेहतरीन सूझबूझ दिखाते हुए तेज़ दौड़ लगाई, डाइव लगाई और टीम को एक रोमांचक जीत दिला दी। मुंबई के विकेटकीपर रयान रिकेल्टन ने गिल्लियाँ उड़ाईं जरूर, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। निराशा में उन्होंने गेंद दूर फेंक दी, क्योंकि उन्हें एहसास हो गया था कि मैच हाथ से निकल चुका है।
यह हार मुंबई इंडियंस के पूरे सीज़न की कहानी भी बयां करती है, जहाँ छोटी-छोटी लेकिन महंगी गलतियों ने बार-बार उन्हें नुकसान पहुँचाया।
दूसरी ओर, RCB की जीत में कृणाल पांड्या की जुझारू पारी भी उतनी ही अहम रही। लक्ष्य का पीछा करते हुए RCB की शुरुआत बेहद खराब रही। विराट कोहली पहली ही गेंद पर बिना खाता खोले आउट हो गए, जबकि दीपक चाहर और कॉर्बिन बॉश की घातक गेंदबाज़ी ने बल्लेबाज़ों को पूरी तरह परेशान कर दिया।
ऐसे मुश्किल हालात में कृणाल पांड्या ने मोर्चा संभाला। शुरुआत में उन्होंने बेहद धैर्य से बल्लेबाज़ी की और पिच के मिज़ाज को समझने में समय लिया। जब दूसरे बल्लेबाज़ संघर्ष कर रहे थे, तब कृणाल ने संयम और आक्रामकता का शानदार संतुलन दिखाया। उन्होंने धीरे-धीरे रन गति बढ़ाई और टीम को मुकाबले में बनाए रखा।
पारी के अंतिम ओवरों में उन्हें मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या भी हुई। हर शॉट खेलने के बाद वह दर्द से कराहते दिखाई दे रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उनका इरादा कमजोर नहीं पड़ा। लगभग 50 गेंदें खेलते हुए उन्होंने 74 रन की शानदार पारी खेली और साबित कर दिया कि दबाव के मुकाबलों में वह कितने भरोसेमंद खिलाड़ी हैं।
मैच का सबसे बड़ा मोड़ 18वें ओवर में आया। कृणाल ने अल्लाह ग़ज़नफ़र की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन मिडविकेट पर नमन धीर ने कैच पकड़ लिया। हालांकि संतुलन बिगड़ने के कारण उन्होंने गेंद तिलक वर्मा की ओर फेंक दी। तिलक शायद यह समझ बैठे कि नमन का पैर बाउंड्री कुशन को छू गया है, इसलिए उन्होंने रिले कैच लेने की कोशिश नहीं की। यही छोटी सी गलती मुंबई को भारी पड़ गई।
जीवनदान मिलने के बाद कृणाल ने अगली तीन गेंदों में दो शानदार छक्के जड़ दिए। हालांकि वह आखिर तक क्रीज़ पर नहीं टिक सके, लेकिन उनके वे अतिरिक्त रन ही अंत में RCB की जीत की सबसे बड़ी वजह बने।
जब कृणाल आउट हुए, तब RCB का डगआउट मायूस दिखाई दे रहा था। ऐसा लग रहा था कि मैच अब मुंबई की पकड़ में है। लेकिन क्रिकेट की यही खूबसूरती है—एक छोटी सी गलती, एक साहसी छक्का और आखिरी गेंद तक बना रोमांच पूरे मैच की कहानी बदल देता है।
