तमिलनाडु की आर्थिक स्थिति पर आमने-सामने आए एम.के. स्टालिन और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: तमिलनाडु में नई सरकार के गठन के साथ ही राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने रविवार को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के उस बयान का जवाब दिया, जिसमें विजय ने आरोप लगाया था कि पिछली सरकार राज्य पर 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज छोड़कर गई है।
स्टालिन ने साफ कहा कि तमिलनाडु का कर्ज “अनुमत सीमा” के भीतर है और राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर गलत धारणा नहीं बनाई जानी चाहिए।
“सरकार के पास पैसा है, जरूरत इच्छाशक्ति की है”
एम.के. स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “तमिलनाडु का कर्ज अनुमत सीमा के भीतर है। यह कहना शुरू मत कर दीजिए कि सरकार के पास पैसा नहीं है। पैसा है। जरूरत सिर्फ जनता को देने की इच्छा और बेहतर शासन चलाने की क्षमता की है।”
उन्होंने कहा कि फरवरी में पेश किए गए बजट में राज्य की आर्थिक स्थिति का पूरा विवरण पहले ही दिया जा चुका था। स्टालिन ने तंज कसते हुए पूछा कि क्या चुनावी वादे करते समय नई सरकार को इस स्थिति की जानकारी नहीं थी।
“शासन चलाना आसान नहीं”
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चलाने और चुनावी वादों को पूरा करने की वास्तविक चुनौतियां समय के साथ समझ में आती हैं।
उन्होंने विजय को संबोधित करते हुए कहा, “मुझे विश्वास है कि हमारी तरह आप भी जल्द ही समझ जाएंगे कि जनता से किए गए वादों को पूरा करना कितना जटिल काम होता है। जिन लोगों ने आपको वोट दिया है, उनकी तरह मैं भी आपसे उम्मीद करता हूं।”
राजनीतिक मतभेदों के बावजूद एम.के. स्टालिन ने मुख्यमंत्री पद संभालने पर सी. जोसेफ विजय को शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा, “तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और विजयी तमिलगा वेट्री कझगम के नेता को इस नई जिम्मेदारी के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।”
विजय सरकार का बड़ा ऐलान
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सी. जोसेफ विजय ने राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने घोषणा की कि उनकी सरकार 2021 से 2026 तक की तमिलनाडु की आर्थिक स्थिति पर एक श्वेत पत्र जारी करेगी।
विजय ने कहा कि उनकी सरकार पारदर्शी प्रशासन देने और चुनावी घोषणापत्र में किए गए हर वादे को पूरा करने के लिए पूरी मेहनत करेगी।
सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 234 में से 108 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया।
हालांकि बहुमत के लिए जरूरी आंकड़े से पार्टी पीछे रह गई थी, लेकिन कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, विदुथलाई चिरुथैगल काची और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के समर्थन से विजय ने गठबंधन सरकार बना ली।
तमिलनाडु की राजनीति में यह बदलाव ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि करीब छह दशक बाद राज्य में किसी गैर-द्रविड़ दल की सरकार बनी है।
