मिथुन मन्हास के विज़न ने बदली जम्मू-कश्मीर में क्रिकेट की तकदीर

Mithun Manhas's vision changed the fate of cricket in Jammu and Kashmir
(Screengrab Twitter Video)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: मिथुन मन्हास की दूरदृष्टि और ठोस रणनीति के दम पर जम्मू-कश्मीर ने भारतीय घरेलू क्रिकेट में इतिहास रच दिया। रणजी ट्रॉफी के फाइनल में जम्मू-कश्मीर ने कर्नाटक क्रिकेट टीम को पहली पारी की बढ़त के आधार पर हराकर अपना पहला खिताब अपने नाम किया। यह मुकाबला केएससीए हुबली क्रिकेट ग्राउंड में खेला गया, जहां टीम ने यादगार प्रदर्शन किया।

पांचवें दिन बना ऐतिहासिक दिन

फाइनल के पांचवें दिन जम्मू-कश्मीर ने अपनी दूसरी पारी 186/4 से आगे बढ़ाई। क़मरान इकबाल 94 रन और साहिल लोटरा 16 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद थे। दोनों बल्लेबाजों ने संयम और आक्रामकता का शानदार मिश्रण दिखाते हुए पारी को संभाला।

दोनों के बीच पांचवें विकेट के लिए 197 रनों की मजबूत साझेदारी हुई। क़मरान इकबाल ने नाबाद 160 रन बनाए, जबकि साहिल लोटरा 101 रन बनाकर नाबाद रहे। टीम ने 342/4 पर पारी घोषित कर दी और कर्नाटक के सामने 633 रनों की विशाल बढ़त खड़ी कर दी। इसके बाद पहली पारी की बढ़त के आधार पर जम्मू-कश्मीर को विजेता घोषित किया गया।

जैसे ही जीत तय हुई, जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ी मैदान पर दौड़ पड़े और जश्न मनाने लगे। खिलाड़ियों ने बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मन्हास को कंधों पर उठाकर सम्मान दिया। टीम की इस ऐतिहासिक सफलता में उनकी भूमिका को सभी ने स्वीकार किया।

बदलाव की शुरुआत

मिथुन मन्हास ने वर्ष 2015 में दिल्ली से अपना घरेलू क्रिकेट आधार जम्मू-कश्मीर स्थानांतरित किया था और 2016 में पेशेवर क्रिकेट से संन्यास ले लिया। इसके बाद उन्होंने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ के कामकाज को सुधारने में सक्रिय भूमिका निभाई।

ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता ने भी माना कि टीम की सफलता के पीछे मन्हास की स्पष्ट सोच और दीर्घकालिक योजना रही। बाहरी कोच की नियुक्ति, सपोर्ट स्टाफ में निरंतरता और जम्मू में लाल मिट्टी की पिचों का निर्माण जैसे फैसलों ने टीम की तस्वीर बदल दी।

अनिल गुप्ता ने BCCI को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “मैं कहूंगा कि इसका मुख्य कारण मिथुन मन्हास का विज़न है। उन्होंने J&K में क्रिकेट खेला और कुछ बड़े बदलाव करना चाहते थे। उन बदलावों में एक ऐसा कोच नियुक्त करने का फ़ैसला था जो यहां का नहीं था। हमने एक ऐसा कप्तान चुना जो J&K का नहीं था। हमने सपोर्ट स्टाफ़ में निरंतरता सुनिश्चित की। सबसे बड़ा बदलाव जम्मू में लाल मिट्टी के विकेट बनाना था।”

पहले टीम को बाहर लाल मिट्टी की पिचों पर खेलने में कठिनाई होती थी, लेकिन अभ्यास की बेहतर व्यवस्था के बाद खिलाड़ियों के प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।

फाइनल मुकाबले में 247 गेंदों पर 121 रन की शानदार पारी खेलने वाले शुभम पुंडीर को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। वहीं तेज गेंदबाज औक़िब नबी को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का पुरस्कार मिला। उन्होंने 17 पारियों में 60 विकेट झटके। उनका औसत 12.56 और इकॉनमी रेट 2.65 रहा, जो टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। जम्मू-कश्मीर की यह ऐतिहासिक जीत न केवल टीम के लिए बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का क्षण है।

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