प्रधानमंत्री मोदी ने माघ बिहू पर असमवासियों को दी शुभकामनाएं, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना

Prime Minister Modi extended his greetings to the people of Assam on Magh Bihu, wishing them peace, health, and prosperity.चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को माघ बिहू के पावन अवसर पर असम के लोगों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पर्व सभी के जीवन में शांति, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली लेकर आए।

असम के लोगों के नाम लिखे एक पत्र में प्रधानमंत्री ने माघ बिहू के सांस्कृतिक, सामाजिक और कृषि महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह त्योहार असमिया संस्कृति की आत्मा को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने पत्र में लिखा, “प्रिय देशवासियों, माघ बिहू के उल्लासपूर्ण अवसर पर आपको और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं। असमिया संस्कृति की श्रेष्ठ परंपराओं को प्रतिबिंबित करने वाला यह सुंदर पर्व आनंद, अपनत्व और भाईचारे का प्रतीक है।”

त्योहार की भावना को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि माघ बिहू संतोष और कृतज्ञता का प्रतीक है। उन्होंने लिखा, “माघ बिहू का सार संतोष और कृतज्ञता में निहित है। यह फसल कटाई के मौसम के सफल समापन का प्रतीक है और उन सभी लोगों के प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर देता है, जो हमारे जीवन को समृद्ध बनाते हैं, विशेष रूप से हमारे मेहनती किसान। यह पर्व उदारता, सहयोग और आपसी देखभाल की भावना को भी मजबूत करता है। मेरी कामना है कि यह माघ बिहू सभी के जीवन में शांति, अच्छा स्वास्थ्य और खुशियां लेकर आए तथा आने वाला वर्ष समृद्धि और सफलता से भरा हो।”

माघ बिहू, जिसे भोगली बिहू या माघर डोमाही के नाम से भी जाना जाता है, असम के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह असमिया महीने माघ में मनाया जाता है, जो आमतौर पर जनवरी और फरवरी के बीच पड़ता है। यह पर्व फसल कटाई के मौसम के समापन और नए कृषि चक्र की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

इस वर्ष माघ बिहू गुरुवार को मनाया जाएगा। उत्सव की शुरुआत एक दिन पहले उरुका से होती है, जो पौष महीने का अंतिम दिन होता है। इस दिन लोग सामूहिक रूप से उत्सव की तैयारियों में जुटते हैं।

उरुका के अवसर पर बांस, पत्तियों और घास-फूस से मेजी नामक अस्थायी झोपड़ियां बनाई जाती हैं। महिलाएं भेलाघर में पारंपरिक भोग तैयार करती हैं, जिसमें सुंगा पीठा, तिल पीठा और नारियल के लड्डू जैसे चावल आधारित व्यंजन शामिल होते हैं। परिवार और गांव के लोग मेजी में एकत्र होकर साथ भोजन करते हैं, गीत गाते हैं और उत्सव मनाते हैं, जिससे सामूहिकता और सांस्कृतिक गर्व की भावना प्रबल होती है।

माघ बिहू की सुबह एक पवित्र अनुष्ठान के तहत मेजी झोपड़ियों को जलाया जाता है। इसके बाद राख को खेतों में बिखेरा जाता है, जो उपजाऊ भूमि और भरपूर फसल की कामना का प्रतीक है। इस अवसर पर टेकेली भोंगा, भैंसों की लड़ाई और पूर्वज देवताओं की पूजा जैसे पारंपरिक अनुष्ठान भी किए जाते हैं।

माघ बिहू असम के तीन प्रमुख बिहू त्योहारों में से एक है और इसे पारंपरिक भोजन, लोक संगीत और नृत्य के साथ बड़े उत्साह से मनाया जाता है। यह पर्व अच्छी फसल के लिए कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ-साथ लोगों को महीनों की मेहनत के बाद अपनी उपलब्धियों का आनंद लेने का अवसर देता है, जिससे उदारता और सामुदायिक जुड़ाव की भावना और मजबूत होती है।

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