ईरान में इस्लामिक शासन के खिलाफ उग्र हुए विरोध प्रदर्शन, तेहरान समेत कई शहरों में सड़कों पर उतरे लोग
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: ईरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली होसैनी खामेनेई के नेतृत्व वाले इस्लामिक शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। राजधानी तेहरान सहित देश के कई हिस्सों में लोग बढ़ती महंगाई, चरमराती अर्थव्यवस्था और सुरक्षा बलों की सख्ती के विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने रात के समय “आजादी, आजादी”, “तानाशाह मुर्दाबाद” और “इस्लामिक गणराज्य मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए।
हालात बिगड़ते देख राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन की सरकार ने इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय टेलीफोन सेवाएं पूरी तरह बंद कर दीं। इसके साथ ही ईरान की न्यायपालिका और सुरक्षा एजेंसियों ने कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी है। इससे पहले भी ऐसे संचार प्रतिबंधों के बाद सरकार की ओर से व्यापक दमन की कार्रवाइयां देखने को मिल चुकी हैं।
शाह के समर्थन में नारे, रजा पहलवी की अपील का असर
इन प्रदर्शनों में कुछ लोग निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी की अपील पर सड़कों पर उतरे नजर आए। रजा पहलवी ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी के पुत्र हैं, जिनके पिता 1979 की इस्लामिक क्रांति से ठीक पहले देश छोड़कर चले गए थे। गुरुवार और शुक्रवार रात 8 बजे प्रदर्शन का आह्वान किए जाने के बाद तेहरान के कई इलाकों में लोग घरों से बाहर निकल आए।
प्रदर्शनकारियों ने “यह आखिरी लड़ाई है, पहलवी वापस आएंगे” और शाह के समर्थन में नारे लगाए। अतीत में ऐसे नारे मौत की सजा तक का कारण बन सकते थे, लेकिन अब यह जनता के गुस्से और हताशा को दर्शाता है। हजारों लोग सड़कों पर दिखाई दिए, जिसके बाद अचानक पूरे देश का संचार तंत्र ठप हो गया।
रजा पहलवी ने कहा, “आज रात ईरानियों ने अपनी आज़ादी की मांग की। इसके जवाब में शासन ने संचार की सभी लाइनों को काट दिया है—इंटरनेट, लैंडलाइन और संभवतः सैटेलाइट सिग्नल भी।” उन्होंने यूरोपीय नेताओं से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मिलकर ईरानी शासन को जवाबदेह ठहराने की अपील की और ईरानियों की आवाज को दबने न देने का आग्रह किया।
देशभर में फैला आंदोलन, दर्जनों की मौत
विरोध प्रदर्शन सिर्फ तेहरान तक सीमित नहीं रहे, बल्कि छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों तक फैल गए हैं। कई बाजार और बस्तियां प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बंद रहीं। अमेरिका स्थित ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी’ के अनुसार अब तक कम से कम 42 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,270 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।
इंटरनेट कंपनी क्लाउडफ्लेयर और निगरानी समूह नेटब्लॉक्स ने भी पुष्टि की है कि यह आउटेज ईरानी सरकार की ओर से जानबूझकर किया गया है। दुबई से ईरान के लैंडलाइन और मोबाइल नंबरों पर कॉल भी नहीं लग पा रही है।
हालांकि आंदोलन अब भी किसी एक केंद्रीय नेतृत्व के बिना चल रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि स्पष्ट वैकल्पिक नेतृत्व के अभाव ने अतीत में भी ईरान के आंदोलनों को कमजोर किया है।
विरोध की जड़ में आर्थिक संकट
यह मौजूदा आंदोलन पिछले तीन वर्षों में असंतोष की सबसे बड़ी लहर माना जा रहा है। इसकी शुरुआत पिछले महीने तेहरान के ग्रैंड बाजार से हुई, जहां व्यापारियों ने मुद्रा के तेज़ अवमूल्यन का विरोध किया। धीरे-धीरे यह असंतोष पूरे देश में फैल गया।
ईरान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर में महंगाई दर 52 प्रतिशत तक पहुंच गई। कुप्रबंधन, पश्चिमी प्रतिबंधों और हालिया युद्ध के असर से ईरानी रियाल की कीमत गिरकर लगभग 14 लाख रियाल प्रति डॉलर हो गई है।
राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने आर्थिक कठिनाइयों को स्वीकार करते हुए प्रदर्शनकारियों की “वैध मांगों” की बात कही है। उन्होंने कहा, “अगर हम लोगों की रोज़ी-रोटी की समस्या हल नहीं कर पाए, तो इस्लामी दृष्टिकोण से हम नर्क में जाएंगे।” हालांकि उन्होंने यह भी माना कि मुद्रा संकट पर उनका नियंत्रण सीमित है।
सुरक्षा बलों पर हमले, कड़ी चेतावनी
ईरानी अधिकारियों ने प्रदर्शनों को गंभीरता से लिया है। कट्टरपंथी अखबार ‘कायहान’ ने एक वीडियो जारी कर दावा किया कि प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा। सरकारी मीडिया के अनुसार कई जगहों पर हिंसा में सुरक्षा बलों के सदस्य भी मारे गए हैं।
मिज़ान समाचार एजेंसी के अनुसार तेहरान के पास एक कस्बे में पुलिस कर्नल की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। फ़ार्स समाचार एजेंसी ने बताया कि लॉरडेगन शहर में हुई गोलीबारी में दो सुरक्षाकर्मी मारे गए और 30 घायल हुए। इसके अलावा खुरासान रज़वी प्रांत में एक पुलिस थाने पर हमले में पांच लोगों की मौत हुई, जबकि केर्मानशाह में रिवोल्यूशनरी गार्ड के दो जवान मारे गए।
ट्रंप की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की गई तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा। उन्होंने कहा, “ईरान को बहुत सख्त शब्दों में चेताया गया है कि अगर उन्होंने ऐसा किया तो उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।”
हालांकि ट्रंप ने रजा पहलवी से मुलाकात को फिलहाल अनुचित बताया और कहा कि समय बताएगा कि आगे कौन उभरकर सामने आता है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ईरानी सरकार कब और कैसे इन प्रदर्शनों पर निर्णायक कार्रवाई करेगी, लेकिन मौजूदा हालात देश के लिए एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक मोड़ की ओर इशारा कर रहे हैं।
