ED छापेमारी में कथित हस्तक्षेप पर सुवेंदु अधिकारी का ममता बनर्जी पर हमला, ‘कार्रवाई नहीं हुई तो जाएगा गलत संदेश’
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि प्रवर्तन निदेशालय (ED) छापेमारी और तलाशी अभियान के दौरान कथित रूप से अधिकारियों को रोकने के मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करता है, तो इससे राज्य की जनता के बीच गलत संदेश जाएगा।
सुवेंदु अधिकारी उस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी I-PAC (इंडिया पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के कार्यालय और इसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के मध्य कोलकाता स्थित लाउडन स्ट्रीट आवास पर पहुंचीं थीं। इन दोनों स्थानों पर ED ने गुरुवार को एक साथ छापेमारी की थी। मीडिया से बातचीत में अधिकारी ने आरोप लगाया कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री जबरन परिसर में घुसीं और कई कागजात व इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज अपने साथ ले गईं।
मुख्यमंत्री पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के काम में बार-बार बाधा डालने का आरोप लगाते हुए सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यह उनका पुराना व्यवहार बन चुका है। उन्होंने 2019 की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अधिकारी तत्कालीन कोलकाता पुलिस कमिश्नर और मौजूदा कार्यवाहक डीजीपी राजीव कुमार के आवास पर पहुंचे थे, तब मुख्यमंत्री ने न सिर्फ जांच प्रक्रिया में दखल देने की कोशिश की थी, बल्कि CBI के खिलाफ धरना प्रदर्शन भी किया था। इसके बाद 2021 में भी उन्होंने मध्य कोलकाता के निजाम पैलेस में CBI के सामने विरोध प्रदर्शन किया था, जब एजेंसी ने पश्चिम बंगाल कैबिनेट के कुछ वरिष्ठ मंत्रियों और तृणमूल कांग्रेस नेताओं को गिरफ्तार किया था।
सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ममता बनर्जी अक्सर यह भूल जाती हैं कि वह केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि राज्य की संवैधानिक मुख्यमंत्री भी हैं।
उन्होंने कहा, “एक मुख्यमंत्री के ऊपर कई संवैधानिक जिम्मेदारियां होती हैं। वह अपनी कुर्सी का इस्तेमाल किसी केंद्रीय एजेंसी को उसके आधिकारिक कर्तव्यों का पालन करने से रोकने के लिए नहीं कर सकतीं। गुरुवार को मुख्यमंत्री का आचरण अनैतिक और असंवैधानिक था।”
इसके बाद विपक्ष के नेता ने प्रवर्तन निदेशालय से इस पूरे मामले में कानून के तहत कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि ED इस मामले में जरूरी कदम उठाएगा। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो इससे पश्चिम बंगाल की जनता को गलत संदेश जाएगा।”
सुवेंदु अधिकारी ने यह सवाल भी उठाया कि आखिर मुख्यमंत्री एक निजी कॉर्पोरेट संस्था के कार्यालय में चल रही ED की छापेमारी को लेकर इतनी चिंतित क्यों थीं। उन्होंने कहा कि यह गंभीर सवाल खड़े करता है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
गौरतलब है कि I-PAC वर्ष 2020 से तृणमूल कांग्रेस के लिए वोट-रणनीति एजेंसी के रूप में काम कर रही है। ऐसे में ED की कार्रवाई और उस पर मचे सियासी घमासान ने बंगाल की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है।
