PSC घोटाला मामला: CID ने 5 लोगों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की, OMR शीट में हेरफेर का खुलासा हुआ
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में OMR शीट के साथ छेड़छाड़, गोपनीय डेटा लीक करने और मेरिट (चयन) की खरीद-फरोख्त से जुड़े हाई-प्रोफाइल घोटाले के मामले में अपनी कानूनी पकड़ मजबूत कर ली है।
90 दिनों की कानूनी समय-सीमा खत्म होने से ठीक पहले, बुधवार शाम को CID ने रांची की एक अदालत में पांच मुख्य आरोपियों के खिलाफ औपचारिक चार्जशीट दाखिल कर दी।
जांच एजेंसी की इस समय रहते की गई कार्रवाई ने गिरफ्तार आरोपियों के लिए ‘डिफ़ॉल्ट ज़मानत’ (default bail) पाने का रास्ता बंद कर दिया है। इसके अलावा, CID अन्य संदिग्धों और उन उम्मीदवारों के खिलाफ भी एक सप्लीमेंट्री (पूरक) चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है, जिन्हें इस घोटाले से फायदा मिला था।
इस शुरुआती चार्जशीट में नामजद पांच मुख्य आरोपियों में शामिल हैं: तत्कालीन डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन, श्वेता कुमारी गुप्ता; ‘TDPL’ एजेंसी के निदेशक और पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड, रामवीर सिंह (उर्फ R.V. सिंह); मार्केटिंग मैनेजर और मुख्य सरगना, अभय कुमार तिवारी (उर्फ मनोज कुमार तिवारी); तथा एजेंसी के कर्मचारी मो. उस्मान और मो. इबाद।
CID द्वारा अदालत में सौंपी गई केस डायरी और जांच रिपोर्ट से एक संगठित ‘मेरिट सिंडिकेट’ का खुलासा हुआ है, जिसने आयोग की गोपनीयता और पूरी परीक्षा प्रणाली की शुचिता (integrity) को नुकसान पहुंचाया है। जांच से पता चला है कि अयोग्य उम्मीदवारों की सफलता पक्की करने के लिए एक ‘रेट कार्ड’ तय किया गया था। इसके लिए भारी रकम मांगी जाती थी: प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए 5 लाख रुपये, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू में अंक बढ़ाने के लिए 10-15 लाख रुपये, और अंतिम चयन सुनिश्चित करने के लिए 60-70 लाख रुपये तक की मांग की जाती थी।
‘सुरक्षा’ या गारंटी के तौर पर, उम्मीदवारों को अपने मूल शैक्षणिक दस्तावेज, खाली चेक और हस्ताक्षर किए हुए कोरे कागज जमा करने के लिए मजबूर किया जाता था। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट और जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की जांच से पुष्टि हुई है कि OMR शीट जानबूझकर खाली छोड़ी गई थीं; बाद में स्कैनिंग प्रक्रिया और सीधे बैकएंड सर्वर के साथ छेड़छाड़ करके उन्हें भर दिया गया।
इसके अलावा, परीक्षा की गोपनीय ‘आंसर की’ (उत्तर कुंजी) को आधिकारिक तौर पर जारी होने से पहले ही व्हाट्सएप के जरिए लीक कर दिया गया था। इसके बदले में, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक और उनके परिवार के सदस्यों के लिए दिल्ली और बेंगलुरु की फ्लाइट टिकट बुक कराई गई थीं।
सीआईडी ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के साथ-साथ ‘झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम, 2023’ की सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। अदालत ने इस मामले में पहली आधिकारिक सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की तारीख तय की है, और सीआईडी इसमें शामिल अन्य लोगों का पता लगाने के लिए अपनी जांच का दायरा लगातार बढ़ा रही है।
