बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचे रणदीप हुड्डा, असम के शिवसागर में राहत कार्यों में हिस्सा लिया
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए असम के शिवसागर जिले पहुंचे। इस दौरान उन्होंने बाढ़ पीड़ित परिवारों से मुलाकात की, उनका हालचाल जाना और राहत सामग्री वितरित कर उनके प्रति अपना समर्थन जताया। रणदीप मानवीय सहायता संगठन ग्लोबल सिख (Global Sikh) के साथ राहत अभियान में शामिल हुए।
रणदीप हुड्डा ने शिवसागर में बाढ़ से प्रभावित लोगों की समस्याएं सुनीं और उन्हें भरोसा दिलाया कि इस कठिन समय में वे उनके साथ खड़े हैं। उनके साथ ग्लोबल सिख के स्वयंसेवक भी मौजूद थे, जो पिछले कई दिनों से शिवसागर और पड़ोसी चराइदेव जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य चला रहे हैं।
राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं स्वयंसेवक
ग्लोबल सिख की टीम प्रभावित परिवारों को भोजन, पीने का पानी और दैनिक जरूरत का अन्य सामान उपलब्ध करा रही है। संगठन के स्वयंसेवक लगातार दूर-दराज के गांवों तक पहुंचकर उन लोगों की मदद कर रहे हैं, जो बाढ़ के कारण बेघर हो गए हैं।
रणदीप हुड्डा ने स्वयंसेवकों के काम की सराहना करते हुए उन्हें जरूरतमंद लोगों की सेवा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके दौरे से प्रभावित परिवारों का मनोबल बढ़ा और असम में चल रहे राहत कार्यों की ओर राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान गया।
इससे पहले अभिनेता आदिल हुसैन ने भी अपने गृह राज्य असम में बाढ़ की स्थिति पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि हर साल आने वाली बाढ़ से वह बेहद हताश, दुखी और परेशान हैं।
आदिल ने बताया था कि बाढ़ का असर उनके परिवार पर भी पड़ा है। उन्होंने कहा कि उनकी बहन की बेटियां और उनके परिवार शिवसागर में रहते हैं, जहां उनके घर पानी में डूब गए हैं। उन्होंने कहा कि वह लगातार उनकी मदद करने की कोशिश कर रहे हैं।
अभिनेता ने यह भी बताया कि वह गायक पापोन के संपर्क में हैं और दोनों मिलकर बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के प्रयासों में जुटे हैं।
असम में अब भी गंभीर है बाढ़ का संकट
असम में इस वर्ष मानसून के दौरान आई बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ऊपरी असम के शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट और नगांव समेत पांच जिलों में अब भी करीब 1.92 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
राज्य में बाढ़ और इससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 82 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, दिकहो और धनसिरी जैसी प्रमुख नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। 13 हजार से अधिक विस्थापित लोगों को राहत शिविरों में रखा गया है, जबकि बचाव एजेंसियां और स्वयंसेवी संगठन लगातार राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं।
