टीएमसी के बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से की मुलाकात, एनडीए को समर्थन देने की तैयारी

Rebel TMC MPs met Lok Sabha Speaker Om Birla; preparing to extend support to the NDAचिरौरी न्यूज

नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी राजनीतिक संकट रविवार को और गहरा गया। पार्टी के बागी सांसदों का एक बड़ा समूह जल्द ही नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय कर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन दे सकता है।

यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब बागी सांसदों के समूह ने दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के आवास पर बैठक की। इससे पहले उन्होंने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से भी मुलाकात की थी।

बागी खेमे को उस समय बड़ा बल मिला जब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी और वरिष्ठ नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने भी असंतुष्ट सांसदों के प्रति समर्थन जताया। उन्होंने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भूपेंद्र यादव से मुलाकात की थी।

हालांकि, सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि उन्होंने बागी सांसदों और विधायकों की अपील पर उनका समर्थन किया है, लेकिन अभी तक उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को सौंपे जाने वाले पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह यह कदम ममता बनर्जी की मौजूदगी में ही उठाएंगे। बागी सांसदों की दिन में बाद में ममता बनर्जी से मुलाकात होने की भी संभावना है।

इस बीच, संकट को देखते हुए टीएमसी ने संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी ने कई प्रमुख पदों से नेताओं को हटाते हुए नई नियुक्तियां की हैं। अर्नब बनर्जी को युवा तृणमूल कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि अलीफा अहमद को महिला प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, कुणाल घोष को उत्तर कोलकाता संगठनात्मक जिले का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

बागी सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया कि उनका समूह सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर खुद को “वास्तविक टीएमसी संसदीय दल” के रूप में मान्यता देने की मांग करेगा। उन्होंने कहा कि संबंधित पत्र पहले ही सौंपा जा चुका है।

वहीं सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने दावा किया कि दो और सांसद बागी खेमे में शामिल होने वाले हैं, जिससे लोकसभा में उनकी संख्या बढ़कर 22 हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी सांसद दिल्ली में बैठक के लिए जा रहे हैं और सोमवार को स्पीकर से मुलाकात कर अलग समूह के रूप में मान्यता मांगेंगे।

दूसरी ओर, टीएमसी नेतृत्व ने बागियों के दावों को खारिज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत संसद के भीतर अलग संसदीय समूह बनाने का कोई प्रावधान नहीं है।

राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार किसी भी सांसद को अलग समूह बनाने के बजाय अपनी मूल पार्टी का किसी अन्य दल में विलय कराना होगा। अन्यथा, उन्हें अयोग्यता का सामना करना पड़ सकता है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद से टीएमसी लगातार आंतरिक असंतोष और बगावत की चुनौतियों का सामना कर रही है। अब बागी सांसदों की बढ़ती संख्या ने पार्टी नेतृत्व की चिंता और बढ़ा दी है।

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