भारत-केन्द्रीय एशिया व्यापार परिषद की बैठक में बोले एस जयशंकर: “व्यापार और निवेश को नई ऊंचाई पर ले जाएं”

S Jaishankar said at the India-Central Asia Business Council meeting: "Take trade and investment to new heights"चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आज राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित भारत-केन्द्रीय एशिया व्यापार परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक साझेदारी को और गहराई देने के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि तीन प्रमुख लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए, मौजूदा सहयोग को मात्रा और गुणवत्ता दोनों में गहराई देना, व्यापार टोकरी का विविधीकरण करना, आर्थिक संबंधों में स्थायित्व और पूर्वानुमानिता (predictability) लाना।

फार्मा क्षेत्र से लेकर ऊर्जा तक गहराया सहयोग

जयशंकर ने कहा कि भारत और मध्य एशिया के बीच फार्मास्युटिकल जैसे क्षेत्रों में पहले से ही सहयोग है, लेकिन उसे और मजबूत करने की ज़रूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों पक्षों को ऊर्जा, खनन, कोयला, तेल, गैस, यूरिया और खाद जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक अनुबंध और संयुक्त उद्यमों की दिशा में काम करना चाहिए।

$2 बिलियन व्यापार, लेकिन और संभावनाएं बाकी हैं

उन्होंने बताया कि एक दशक पहले 2014 में भारत और मध्य एशिया के बीच व्यापार $500 मिलियन से भी कम था, जो अब बढ़कर लगभग $2 बिलियन तक पहुंच गया है। लेकिन यह आंकड़ा वास्तविक क्षमता को नहीं दर्शाता। “अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितताओं को देखते हुए अब व्यापार को मजबूती देने की ज़रूरत और भी ज्यादा है,” उन्होंने कहा।

जयशंकर ने पाँच प्रमुख क्षेत्रों को उजागर किया जो भारत और मध्य एशिया के आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ा सकते हैं: डिजिटल अर्थव्यवस्था और नवाचार (Innovation), वित्तीय सेवाएं, स्वास्थ्य सेवा और फार्मा, कनेक्टिविटी में सुधार, ट्रांजिट प्रक्रियाओं का सरलीकरण.

उन्होंने यह भी जोड़ा कि पर्यटन, शिक्षा, फिल्म और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में भी आर्थिक क्षमता है, जिसे गंभीरता से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और मध्य एशियाई देशों को अब अपनी साझेदारी को केवल कूटनीतिक स्तर पर ही नहीं बल्कि व्यवसायिक और निवेश के स्तर पर भी आगे बढ़ाने की आवश्यकता है, जिससे यह साझेदारी वैश्विक स्तर पर एक मिसाल बन सके।

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