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सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा टूटा, तेल की कीमतों में उछाल के बीच निफ्टी में गिरावट

Major slump in the stock market: Sensex plunges 1,000 points, investors lose ₹5 lakh crore; heavy sell-off in banking stocks
(AI Generated Picture)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ने ही कमजोर शुरुआत की। निफ्टी 150 अंक से ज्यादा गिरकर 22,678.00 पर खुला, जबकि सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ 73,253.44 पर खुला और शुरुआती कारोबार में 900 अंक से ज्यादा नीचे आ गया। भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.02 पर खुला, जबकि मंगलवार को यह 95.12 पर बंद हुआ था।

सऊदी अरब की रिफाइनरी पर हुए ताजा हमले के बाद कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में फिर से उछाल आया है, जिससे सप्लाई को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। खबर लिखे जाने तक, ब्रेंट क्रूड की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रही थी।

ताजा रिपोर्टों के अनुसार, हूतियों ने सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी पर मिसाइल से हमला किया है, जिससे उनके हमलों में तेजी आई है।

सुबह करीब 9:27 बजे, बीएसई सेंसेक्स 730.70 अंक या 0.99% की गिरावट के साथ 72,867.97 पर कारोबार कर रहा था। एनएसई निफ्टी 50, 186.45 अंक या 0.82% गिरकर 22,563.30 पर था।

सबसे ज्यादा गिरावट आईटी शेयरों में देखी गई, जिसमें निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 3.3% नीचे रहा। इंफोसिस में 4.26%, एमफैसिस में 4.94%, एचसीएल टेक में 3.07%, टीसीएस में 2.98% और टेक महिंद्रा में 3.13% की गिरावट आई।

कई अन्य सेक्टरों में भी बिकवाली देखी गई। निफ्टी एफएमसीजी 1.51% गिरा, जबकि ऑयल एंड गैस सेक्टर में 1.30% की गिरावट आई। रियल्टी, फाइनेंशियल सर्विसेज, प्राइवेट बैंक, फार्मा और मेटल सेक्टर भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। ऑटो इंडेक्स उन कुछ सेक्टरों में शामिल था जो संभले रहे, जिसमें करीब 0.23% की तेजी आई।

बाजार का व्यापक रुख अपेक्षाकृत बेहतर रहा; निफ्टी स्मॉलकैप 100 में मामूली तेजी दिखी, जबकि मिडकैप इंडेक्स नीचे रहे। बाजार में उतार-चढ़ाव का पैमाना, ‘इंडिया VIX’ (India VIX) लगभग 3.7% बढ़ गया है, जो निवेशकों के बीच बढ़ती घबराहट का संकेत है।

सऊदी अरब में एक रिफाइनरी पर हुए हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। इससे ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट और महंगाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं। तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि देश अपनी जरूरत के कच्चे तेल के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है।

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