नारी शक्ति के दम पर दुनिया जीतना चाहता है फर्राटा चैंपियन दिल्ली का चिराग खन्ना
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: पहली बार आयोजित किए जा रहे खेलो इंडिया पैरा गेम्स में टी35-36 कटेगरी में 100 मीटर स्पर्धा का स्वर्ण जीतने वाले दिल्ली के चिराग खन्ना नारी शक्ति के दम पर दुनिया जीतना चाहते हैं। उड़न सिख स्वर्गीय मिल्खा सिंह को आइडल मानने वाले चिराग अपनी कटेगरी में राष्ट्रीय चैंपियन हैं और हाल ही में चीन में आयोजित पैरा एशियाई खेलों में टी-35 कटेगरी में 100 मीटर का कांस्य जीतने वाले दिल्ली के ही नारायण ठाकुर को हराकर पैरा गेम्स चैंपियन बने हैं।
पांच साल की छोटी आयु में अपने पिता को खोने वाला 21 साल का एक लड़का अगर अपनी दिव्यांगता के बावजूद दुनिया जीतने की बात करता है तो निश्चित तौर पर उसकी इच्छाशक्ति बहुत मजबूत होगी। और चिराग की इस इच्छाशक्ति के पीछे की शक्ति और कोई नहीं बल्कि दो नारियां, जिनकी चिराग को लेकर सोच के साथ-साथ नाम भी मिलता है- चिराग की मां और कोच हैं। इत्तेफाक की बात यह है कि दोनों का नाम सुनीता है। बस फर्क यह है कि एक सुनीता खन्ना (मां) और एक सुनीता राय (कोच) हैं।
छत्रसाल स्टेडियम में तैनात एथलेटिक्स कोच सुनीता राय मानती हैं कि चिराग आज जो कुछ भी है, अपनी मां की बदौलत है। सुनीता राय ने कहा,- “चिराग बहुत सारी मुश्किलें झेलकर यहां तक पहुंचा है। छोटी आयु में पिता को खोने वाले इस बच्चे ने अपनी सबसे बड़ी सपोर्टसिस्टम अपनी मां को आज असीम खुशी दी है। यह खुशी आज आंसुओं के रूप में निकल रहे हैं और इससे मेरी खुशी दोगुनी हो गई है।“
सुनीता ने बताया कि 2021 में चिराग उनके पास आया था। सिर पर पिता का साया नहीं होने और पैसे की तंगी के बावजूद इसने कैसे अपना हौसला बनाए रखा, यह या तो इसकी मां को पता है या फिर मैं समझ सकती हूं।
सुनीता राय ने कहा, ”चिराग की सफलता का राज यह है कि मैंने हमेशा से छत्रसाल में उसे नार्मल एथलीटों के साथ प्रैक्टिस कराया है। मुख्य तौर पर यह 100 मीटर का एथलीट है लेकिन अब मैं चाहती हूं कि यह नेशनल स्तर पर 200 मीटर भी करे। यह दिल्ली स्टेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 100 तथा 200 मीटर चैंपियन है।“
सुनीता ने बताया कि चिराग ने मई में पुणे में आयोजित पैरा नेशनल्स में 13.54 सेकेंड समय के साथ सोना जीता था। इस परफार्मेंस के आधार पर उसका चीन में होने वाले एशियाई खेलों के लिए चयन हो गया था लेकिन कटेगरी संबंधी विवाद के कारण चिराग चीन में नहीं दौड़ सके। हां, कटेगरी तय करने के लिए चीन में ही एक मेडिकल डिसएबिलिटी टेस्ट हुआ, जिसके बाद इसे आधिकारिक तौर पर टी-36 कटेगरी दिया गया।
चिराग की मां सुनीता ने कहा कि 16 साल पहले चिराग के पिता ओमप्रकाश खन्ना का देहांत हो गया था। उस समय यह पांच साल का था। सुनीता खन्ना ने कहा, “ एक दिन मेरे पति गिर गए और उनकी रीढ़ की हडडी टूट गई। एक साल बिस्तर पर रहे और उसके बाद उनका देहांत हो गया। प्राइवेट बैंक मे काम करते थे। इसके बाद मैने घर से टिफिन का काम शुरू किया। मैं अपने बेटे की सफलता से बहुत खुश हूं। आज मेरा नाम बच्चे के नाम से पहचाना जा रहा है और इससे बड़ा पल भला किसी मां के लिए क्या हो सकता है। मैं अपने बच्चे को शीर्ष तक ले जाने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हूं।“
दिल्ली युनिवर्सिटी में स्कूल आफ ओपन लर्निंग में पढ़ने वाले चिराग रोजाना दो से तीन घंटे प्रैक्टिस करते हैं। इसमें रनिंग के अलावा स्ट्रेंथ वर्कआउट शामिल होता है। कोच सुनीता राय की देखरेख में सारा कुछ दिव्यांगता को देखते हुए कराया जाता है।
दिल्ली स्टेट चैंपियनशिप (2022 और 2023) में 100 तथा 200 मीटर में गोल्ड मेडल के अलावा बेंगलुरू में आयोजित ओपन इंडिया में गोल्ड मेडल जीतने वाले चिराग कहते हैं कि उनकी जिंदगी में नारी शक्ति का बहुत महत्व है।
चिराग बोले,”-मेरी मां ने हर तरह से मेरा सपोर्ट किया है। उनकी और मेरी कोच सुनीता मैडम की बदौलत मैं यहां तक पहुंच सका हूं। मुझे यहां तक लाने वाली यही दो नारी शक्तियां हैं। इन दोनों ने मुझे लड़खड़ाते हुए बच्चे को यहां तक पहुंचाया है। साथ ही मैं उन सभी लोगों का धन्यवाद करना चाहता हूं, जिन्होने मेरी क्षमता पर यकीन किया औऱ हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया।“
चिराग का सपना देश के लिए पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतना है। वह कहते हें,”मेरा सपना देश के लिए पैरालंपिक में गोल्ड मेडल जीतना है और इसके लिए मैं दिन-रात मेहनत करूंगा। और मैं यह कर सकता हूं क्योंकि कहा जाता है कि एक नारी सब पर भारी लेकिन मेरी जिंदगी में तो दो-दो नारियां हैं। मैं मिल्खा सिंह का फैन हूं, जिनके लिए कुछ भी असंभव नहीं था।“
