नीट-यूजी पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; एनटीए से पूछा, ‘सुरक्षा के बावजूद कैसे हुई इतनी बड़ी चूक?’
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नीट-यूजी पेपर लीक मामले में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को कड़ी फटकार लगाई और पूछा कि निगरानी तंत्र तथा ओवरसाइट कमेटियां होने के बावजूद इतनी बड़ी चूक आखिर कैसे हुई।
सुनवाई के दौरान अदालत ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) का उदाहरण देते हुए कहा कि देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में इस तरह की घटनाएं कभी सामने नहीं आईं और एनटीए को उससे सीख लेने की जरूरत है।
मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता एनटीए और पूर्व इसरो प्रमुख डॉक्टर के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति की ओर से पेश हुए। अदालत ने एनटीए और डॉक्टर के. राधाकृष्णन द्वारा दाखिल हलफनामों को रिकॉर्ड पर लेते हुए केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया।
न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा ने डॉक्टर के. राधाकृष्णन से पूछा कि समिति की सिफारिशों के बाद निगरानी कितनी प्रभावी ढंग से की गई। अदालत ने सवाल किया कि आखिर ऐसी कौन-सी कमी रह गई, जिसकी वजह से सुरक्षा उपायों के बावजूद पेपर लीक हो गया।
डॉक्टर के. राधाकृष्णन ने अदालत को बताया कि समिति ने परीक्षा सुरक्षा और प्रशासन को मजबूत करने के लिए कुल 101 सिफारिशें दी थीं। इनमें से 60 अल्पकालिक सिफारिशें थीं, जिन्हें 2025-26 परीक्षा चक्र के दौरान लागू किया जाना था। उन्होंने कहा कि अधिकांश सिफारिशें लागू की जा चुकी हैं, जबकि बाकी पर काम जारी है।
पेपर लीक की वजह बताते हुए डॉक्टर के. राधाकृष्णन ने कहा कि मुख्य समस्या प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में थी। उन्होंने कहा कि अब प्रश्नपत्र निर्माण प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित बनाया जा रहा है और इसके लिए सुरक्षित परीक्षा कार्यान्वयन ढांचा शुरू कर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि केवल सुधारों से समस्या खत्म नहीं होगी, जब तक जवाबदेही तय नहीं की जाती। अदालत ने कहा कि बार-बार समितियां बनाने और बैठकें करने से कोई फायदा नहीं होगा, यदि यह स्पष्ट न हो कि किसी विफलता की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि पेपर लीक मामले की जांच जारी है और 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा से पहले नए सुरक्षा तंत्र लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की निगरानी सर्वोच्च स्तर पर की जा रही है।
तुषार मेहता ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री स्वयं इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं और सरकार इसे बेहद गंभीरता से ले रही है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि परीक्षा सुधार केवल अस्थायी उपायों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। अदालत ने कहा कि संस्थागत स्मृति और स्थायी ढांचा विकसित करना बेहद जरूरी है, ताकि हर बार संकट आने पर नए सिरे से व्यवस्था खड़ी न करनी पड़े।
अदालत ने शिक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह विस्तृत हलफनामा दाखिल कर बताए कि भविष्य में परीक्षाएं सुरक्षित और जवाबदेह तरीके से कैसे आयोजित की जाएंगी। मंत्रालय से यह भी पूछा गया कि विशेषज्ञता, संस्थागत स्मृति और दीर्घकालिक परीक्षा प्रबंधन प्रणाली कैसे विकसित की जाएगी।
डॉक्टर के. राधाकृष्णन ने अदालत को बताया कि परीक्षा प्रणाली में विशेषज्ञों की कमी एक बड़ी समस्या थी। इसे दूर करने के लिए आईआईटी-जेईई, केंद्रीय विद्यालय और अन्य प्रतिस्पर्धी परीक्षा प्रणालियों से जुड़े विशेषज्ञों को प्रक्रिया में शामिल किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि परीक्षा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए प्रमुख विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाया जाए। इस पर तुषार मेहता ने कहा कि आईआईटी के प्रोफेसरों और अन्य विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है तथा पूरी तरह सुरक्षित व्यवस्था तैयार की जा रही है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने छात्रों और उनके परिवारों की मानसिक पीड़ा का भी जिक्र किया। अदालत ने कहा, “यह छात्रों और परिवारों के लिए बेहद दर्दनाक है। इसमें वर्षों की मेहनत और भावनाएं जुड़ी होती हैं। हमें इस व्यवस्था को सुधारना होगा।”
माना जा रहा है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला भविष्य में एनटीए और नीट-यूजी जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं की व्यवस्था और संचालन को लंबे समय तक प्रभावित करेगा।
