शेयर बाजार में तेज गिरावट से निवेशकों की धारणा बदली, जोखिम से बचने का माहौल हावी

Nifty sets new record as market rally continues
(File Pic: Twitter)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: पिछले छह कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स में लगभग 3,000 अंकों की गिरावट ने निवेशकों को झकझोर कर रख दिया है और बाजार का मिजाज सतर्क आशावाद से सीधे जोखिम से बचाव की ओर मुड़ गया है। जो गिरावट पहले एक सामान्य करेक्शन लग रही थी, वह अब व्यापक बिकवाली में बदल चुकी है। अहम तकनीकी स्तर टूट चुके हैं और बाजार के लगभग सभी हिस्सों में भरोसा कमजोर पड़ा है।

इस गिरावट की तेजी और पैमाना दोनों ही अहम हैं। बाजारों में उतार-चढ़ाव सामान्य है, लेकिन जब लगातार सत्र-दर-सत्र नुकसान बढ़ता जाता है, तो कहानी बदल जाती है। अब यह किसी एक कारण या एक खराब दिन की बात नहीं रह गई है, बल्कि कई दबाव एक साथ काम कर रहे हैं और एक-दूसरे को मजबूत कर रहे हैं।

पिछले करीब एक साल तक निवेशक हर गिरावट पर खरीदारी के आदी हो चुके थे। मजबूत घरेलू निवेश और भारत की विकास कहानी पर भरोसे के चलते हर करेक्शन को जल्दी समर्थन मिल जाता था। लेकिन अब यह पैटर्न टूटता नजर आ रहा है।

जैसे-जैसे सेंसेक्स फिसलता गया और निफ्टी एक के बाद एक सपोर्ट लेवल के नीचे गया, वैसे-वैसे ‘डिप पर खरीद’ की रणनीति की जगह नुकसान सीमित करने की कोशिशों ने ले ली। अल्पकालिक ट्रेडरों ने पोजिशन काटीं, लंबी अवधि के निवेशकों ने एक्सपोजर घटाया और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया। अहम स्तर टूटने के बाद बिकवाली अपने आप तेज होती चली गई, जिसे नई नकारात्मक खबरों से ज्यादा स्टॉप-लॉस और एल्गोरिदमिक ट्रेड्स ने हवा दी।

निवेशकों के व्यवहार में यह बदलाव बेहद अहम है। अक्सर बाजार इसलिए नहीं गिरते कि बुनियादी हालात एक रात में बिगड़ जाते हैं, बल्कि इसलिए गिरते हैं क्योंकि निकट भविष्य की स्थिरता पर भरोसा कमजोर पड़ जाता है।

अमेरिका–भारत व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता, ईरान से जुड़ा तनाव, वेनेजुएला के घटनाक्रम और वैश्विक राजनीति में बढ़ता शोर—इन सभी ने मिलकर बाजार की बेचैनी बढ़ाई है। इनमें से कोई भी कारण अकेले 3,000 अंकों की गिरावट नहीं समझाता, लेकिन साथ मिलकर इन्होंने वह भरोसा छीन लिया है, जिसके सहारे निवेशक पहले करेक्शन के दौरान टिके रहते थे।

बढ़ी हुई अस्थिरता आक्रामक खरीदारी को हतोत्साहित कर रही है और ट्रेडरों को रक्षात्मक बनाए हुए है, जिससे गिरावट अपेक्षा से ज्यादा लंबी खिंच रही है।

तकनीकी स्तरों के टूटने से बिकवाली और तेज हुई है। निफ्टी के 25,700, 25,600 और फिर 25,500 जैसे अहम स्तरों के नीचे जाने के बाद दबाव बढ़ गया। ये स्तर सिर्फ चार्ट पर खींची गई रेखाएं नहीं हैं, बल्कि ट्रेडरों, फंड्स और जोखिम प्रबंधन प्रणालियों के लिए अहम संकेत होते हैं। इनके टूटते ही स्वचालित बिकवाली शुरू हो जाती है और विवेकाधीन निवेशकों को भी अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ता है।

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