ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद वर्ल्ड चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में, ऐतिहासिक मेडल से एक कदम दूर

Treesa Jolly and Gayatri Gopichand in World Championships quarter-finals, one step away from a historic medal.
(PIC CREDIT: BAI)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: भारतीय बैडमिंटन की स्टार महिला डबल्स जोड़ी ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली है। दुनिया की 39वें नंबर की भारतीय जोड़ी ने गुरुवार, 20 अगस्त को राउंड ऑफ-16 मुकाबले में बड़ा उलटफेर करते हुए 7वीं वरीयता प्राप्त जापान की रिन इवानागा और की नाकानिशी को सीधे गेमों में 21-16, 21-12 से मात दी।

इस जीत के साथ ट्रीसा और गायत्री अब वर्ल्ड चैंपियनशिप में ऐतिहासिक पदक से सिर्फ एक जीत दूर हैं। क्वार्टर फाइनल मुकाबला जीतते ही भारतीय जोड़ी सेमीफाइनल में पहुंच जाएगी और उनका मेडल पक्का हो जाएगा।

7वीं सीड को सीधे गेम में दी मात

ट्रीसा और गायत्री पूरे टूर्नामेंट में शानदार लय में नजर आई हैं। इंदिरा गांधी स्टेडियम में घरेलू दर्शकों के सामने उन्होंने जापानी जोड़ी के खिलाफ शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और विरोधियों को वापसी का कोई मौका नहीं दिया।

ट्रीसा के जंप-स्मैश भारतीय जोड़ी के सबसे बड़े हथियार रहे। वहीं गायत्री ने फ्रंट कोर्ट पर बेहतरीन नियंत्रण रखते हुए रैलियां तैयार कीं, जिससे ट्रीसा को बैक कोर्ट से जोरदार स्मैश लगाने के पर्याप्त मौके मिले।

भारतीय जोड़ी की सफलता का एक और अहम पहलू उनका बेहतर रोटेशन रहा। दोनों खिलाड़ी जरूरत के मुताबिक फ्रंट और बैक कोर्ट की जिम्मेदारी बदलती रहीं, जिससे जापानी खिलाड़ियों के लिए उनके अगले शॉट का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया।

ट्रीसा की पावर के साथ गायत्री की समझदारी

ट्रीसा ने अपने आक्रामक खेल के साथ-साथ ड्रॉप और पुश शॉट्स का भी शानदार इस्तेमाल किया। उनके पावर गेम में इन शॉट्स की विविधता ने जापानी जोड़ी को लगातार दबाव में रखा।

ट्रीसा ने अपने खेल के संयोजन को लेकर कहा कि आमतौर पर गायत्री बैक कोर्ट और वह फ्रंट कोर्ट में अधिक सक्रिय रहती हैं, लेकिन दोनों खिलाड़ी दोनों क्षेत्रों में बेहतर होने पर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव उनके खेल में अच्छी तरह काम कर रहा है।

मुकाबला पूरी तरह आसान नहीं था। लाइन कॉल को लेकर भारतीय खिलाड़ियों की चेयर अंपायर से नाराजगी भी देखने को मिली। इसके बाद ट्रीसा को शटल के गलत इस्तेमाल के लिए येलो कार्ड भी दिखाया गया।

ट्रीसा मैच रेफरी से भी अपनी बात रखती नजर आईं। हालांकि कोचिंग बॉक्स से पुलेला गोपीचंद ने उन्हें शांत रहने और अपने कोच के पास लौटने का इशारा किया।

गायत्री ने बताया कि उस समय उनके पिता की मौजूदगी और उनका शांत रवैया काफी मददगार रहा। उन्होंने दोनों खिलाड़ियों को शांत रहने और सिर्फ अपने आक्रामक खेल पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।

मैच आगे बढ़ने के साथ ट्रीसा का आत्मविश्वास और आक्रामकता बढ़ती गई। उनके लगभग हर जोरदार स्मैश के बाद स्टेडियम में उत्साह का माहौल बनता रहा। इंदिरा गांधी स्टेडियम में मौजूद भारतीय दर्शकों ने भी जोड़ी का जोरदार समर्थन किया, जिससे जापानी खिलाड़ियों पर दबाव और बढ़ गया।

ट्रीसा और गायत्री की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि ट्रीसा चोट के कारण करीब तीन महीने तक कोर्ट से दूर रही थीं। वापसी के बाद दोनों ने अगस्त में फिलीपींस इंटरनेशनल का खिताब जीतकर अपनी लय हासिल की।

वर्ल्ड चैंपियनशिप में अब तक उनकी फिटनेस को लेकर कोई बड़ी चिंता नजर नहीं आई है। बल्कि दोनों ने ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने उनके उस दौर की याद दिला दी है जब वे दुनिया की टॉप-10 महिला डबल्स जोड़ियों में शामिल थीं।

सेमीफाइनल में चीन की मजबूत जोड़ी से मुकाबला

अब क्वार्टर फाइनल में भारतीय जोड़ी का सामना चीन की दुनिया की नंबर-4 जोड़ी जिया यी फैन और झांग शू शियान से होगा।

ट्रीसा और गायत्री का चीनी जोड़ी के खिलाफ रिकॉर्ड अब तक अच्छा नहीं रहा है। दोनों जोड़ियां तीन बार आमने-सामने आ चुकी हैं और हर बार भारतीय जोड़ी को हार का सामना करना पड़ा है।

लेकिन अगर ट्रीसा और गायत्री शुक्रवार को यह चुनौती पार कर लेती हैं, तो वे वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला डबल्स जोड़ी बन जाएंगी। उनसे पहले 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने यह उपलब्धि हासिल की थी।

अब नजर ऐतिहासिक पदक पर

ट्रीसा और गायत्री ने गॉल में सिर्फ 7वीं वरीयता प्राप्त जोड़ी को हराकर उलटफेर नहीं किया, बल्कि यह भी दिखाया कि वे बड़े मंच के दबाव को संभालने के लिए तैयार हैं। पावर, ड्रिफ्ट, ड्रॉप, पुश और बेहतरीन रोटेशन के संयोजन ने उन्हें खतरनाक बनाया है।

वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत के लिए 20 अगस्त का दिन मुश्किल रहा, क्योंकि कई भारतीय खिलाड़ियों के सामने ऊंची रैंकिंग वाले प्रतिद्वंद्वी थे। ऐसे में ट्रीसा और गायत्री की यह जीत भारतीय दल के लिए बड़ा आत्मविश्वास लेकर आई है।

अब भारतीय बैडमिंटन प्रशंसकों की नजर क्वार्टर फाइनल पर होगी। एक और जीत और ट्रीसा जॉली-गायत्री गोपीचंद की जोड़ी इतिहास रचते हुए वर्ल्ड चैंपियनशिप में अपना पदक पक्का कर लेगी।

 

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