ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र से जुड़े 31 संगठनों से अमेरिका को बाहर निकाला
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े 31 संगठनों से अमेरिका को बाहर निकालने का बड़ा फैसला लिया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये संस्थाएं अब “अमेरिकी हितों की सेवा नहीं करतीं” और अमेरिका की संप्रभुता, सुरक्षा व आर्थिक समृद्धि के खिलाफ काम कर रही हैं।
बुधवार को जारी आदेश के तहत राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी सरकारी विभागों और एजेंसियों को इन UN से जुड़ी संस्थाओं और 35 गैर-UN संगठनों में भागीदारी करने या उन्हें वित्तीय सहायता देने से रोक दिया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, ये संगठन अमेरिकी प्राथमिकताओं की बजाय “वैश्विकतावादी (ग्लोबलिस्ट) एजेंडे” को आगे बढ़ाते हैं।
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ये संस्थाएं सक्रिय रूप से अमेरिकी संप्रभुता को सीमित करने की कोशिश करती हैं और उनका संचालन उन्हीं “एलीट नेटवर्क्स” द्वारा किया जाता है, जिन्हें उन्होंने तंज कसते हुए “मल्टीलेटरल NGO-प्लेक्स” कहा।
रुबियो ने कहा, “हम वहां सहयोग करेंगे जहां इससे अमेरिकी जनता को लाभ हो, और जहां ऐसा नहीं है वहां मजबूती से खड़े रहेंगे।”
सूची में शामिल कई संगठन जलवायु परिवर्तन, जेंडर, जनसंख्या नियंत्रण, व्यापार और आर्थिक नीति जैसे मुद्दों पर काम करते हैं, जो ट्रंप की वैचारिक सोच के विपरीत माने जाते हैं।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं —
- UN Conference on Trade and Development (UNCTAD)
- International Trade Centre
- UN Framework Convention on Climate Change (UNFCCC)
- UN Population Fund (UNFPA)
- UN Department of Economic and Social Affairs
- एशिया सहित विभिन्न क्षेत्रों के आर्थिक और सामाजिक आयोग
- UN Women (जेंडर समानता और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी संस्था)
हालांकि इनमें से कुछ संगठनों को अमेरिका सीधे फंड देता है, लेकिन कई संस्थाएं संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट से चलती हैं, जिसमें अमेरिका की अनिवार्य हिस्सेदारी 22 प्रतिशत है।
ट्रंप प्रशासन ने अभी तक 2025 के लिए कांग्रेस द्वारा स्वीकृत 820 मिलियन डॉलर की UN सहायता जारी नहीं की है। इसके अलावा, इस वर्ष अमेरिकी योगदान में 610 मिलियन डॉलर की कटौती का प्रस्ताव भी रखा गया है।
अपने पुनर्निर्वाचन के बाद शुरुआती फैसलों में से एक के तौर पर ट्रंप पहले ही अमेरिका को पेरिस जलवायु समझौते से बाहर निकाल चुके हैं। ट्रंप जलवायु परिवर्तन को पहले भी “धोखा” बता चुके हैं और कोयला व पेट्रोलियम जैसे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देते रहे हैं।
इस फैसले के पीछे वैचारिक आधार को स्पष्ट करते हुए रुबियो ने कहा, “जो व्यवस्था कभी शांति और सहयोग के लिए एक व्यावहारिक ढांचा थी, वह अब वैश्विक शासन की एक विशाल संरचना बन चुकी है, जिस पर प्रगतिशील विचारधारा हावी है और जो राष्ट्रीय हितों से कटी हुई है।”
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने इस फैसले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
यह कदम UN से जुड़े संगठनों के खिलाफ ट्रंप की कार्रवाई की कड़ी में ताज़ा है। इससे पहले वे अमेरिका को यूनेस्को (UNESCO), फिलिस्तीनी शरणार्थी एजेंसी UNRWA, और UN मानवाधिकार परिषद से भी बाहर निकाल चुके हैं।
जिन अन्य UN इकाइयों को निशाना बनाया गया है, उनमें सशस्त्र संघर्षों में बच्चों, बच्चों के खिलाफ हिंसा और सशस्त्र संघर्षों में यौन हिंसा से जुड़े मामलों पर काम करने वाले महासचिव के विशेष प्रतिनिधियों के कार्यालय शामिल हैं।
इसके अलावा, जिन गैर-UN संगठनों से अमेरिका पीछे हट रहा है, उनमें शामिल हैं —
- Intergovernmental Panel on Climate Change (IPCC) (2007 का नोबेल शांति पुरस्कार विजेता)
- Global Counterterrorism Forum
- Global Forum on Cyber Expertise
- International Institute for Democracy and Electoral Assistance
- International Solar Alliance
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से वैश्विक मंचों पर अमेरिका की भूमिका और बहुपक्षीय सहयोग की दिशा पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।
