तमिलनाडु विधानसभा में हंगामा, DMK विधायकों को सदन से बाहर निकाला गया
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा में उस वक्त जोरदार हंगामा देखने को मिला, जब DMK विधायकों ने मुख्यमंत्री विजय द्वारा सोमवार को दिए गए भाषण में ED के एक दस्तावेज़ का हवाला देने और पिछली DMK सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाने का विरोध किया। स्थिति बिगड़ने के बाद विधानसभा अध्यक्ष JCD प्रभाकर ने विरोध कर रहे DMK विधायकों को सदन से बाहर निकालने का आदेश दे दिया।
विजय के बयान को रिकॉर्ड से हटाने की मांग
मंगलवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विवाद खड़ा हो गया। DMK के व्हिप EV वेलु ने मांग की कि मुख्यमंत्री विजय ने सोमवार को अपने भाषण में जो बातें कही थीं, उन्हें विधानसभा की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटा दिया जाए।
दरअसल, विजय ने सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक दस्तावेज़ का हवाला देते हुए आरोप लगाया था कि ठेकेदारों को कॉन्ट्रैक्ट की कुल कीमत का 7.5 से 10 प्रतिशत हिस्सा ‘पार्टी फंड’ के रूप में देना पड़ता था। उनके मुताबिक, यह रकम नगर प्रशासन और जलापूर्ति विभाग से जुड़े कामों के जरिए कथित तौर पर जुटाई जाती थी।
विजय ने अपने भाषण में वीरनम जल योजना से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया था और इस संबंध में सरकारिया आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया था।
कानून मंत्री ने किया विजय के बयान का बचाव
विजय के बयान का बचाव करते हुए राज्य के कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जिन आरोपों का जिक्र किया, वे सरकारिया आयोग की रिपोर्ट और ED के आधिकारिक दस्तावेजों पर आधारित थे। उन्होंने तत्कालीन DMK सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप भी दोहराए।
इस पर DMK विधायकों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया। विधायक लगातार नारेबाजी करते हुए विजय के बयान को विधानसभा के रिकॉर्ड से हटाने की मांग करने लगे।
स्पीकर ने बयान हटाने से किया इनकार
विधानसभा अध्यक्ष JCD प्रभाकर ने विजय की टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाने की मांग खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने सदन में ऐसी किसी नई जानकारी का उल्लेख नहीं किया है, जो पहले से सार्वजनिक न हो। स्पीकर ने कहा कि विजय ने ED से संबंधित वही जानकारी सदन में रखी, जो पहले से सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की MISA के तहत गिरफ्तारी और सरकारिया आयोग से जुड़े उन मुद्दों का उल्लेख किया, जिन पर विधानसभा में पहले भी चर्चा हो चुकी है।
प्रभाकर ने कहा कि मुख्यमंत्री के भाषण में ऐसा कुछ भी नहीं था, जिसे रिकॉर्ड से हटाने की जरूरत हो।
DMK विधायकों ने स्पीकर के पोडियम के सामने किया प्रदर्शन
स्पीकर के फैसले के बावजूद DMK विधायकों का विरोध जारी रहा। कई विधायक नारेबाजी करते हुए स्पीकर के पोडियम के सामने पहुंच गए और विजय की टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाने की मांग दोहराने लगे।
इस दौरान सदन के नेता के.ए. सेंगोट्टैयन ने विधानसभा के नियमों के तहत हंगामा कर रहे विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि स्पीकर के फैसले के बाद भी DMK विधायक सदन की कार्यवाही बाधित कर रहे हैं, इसलिए उन्हें विधानसभा से बाहर निकाला जाना चाहिए।
एक मिनट का समय दिया, नहीं माने विधायक
स्पीकर प्रभाकर ने विरोध कर रहे DMK विधायकों से अपनी सीटों पर लौटने को कहा। उन्होंने कहा कि यदि विधायक शांत होकर अपनी सीटों पर लौटते हैं तो वह KN नेहरू या EV वेलु को अपनी बात रखने का मौका देंगे।
हालांकि, DMK विधायकों का विरोध जारी रहा। स्पीकर ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ विधायक उनकी अनुमति के बिना पोस्टर लेकर सदन में आए थे और उनके निर्देशों का पालन नहीं कर रहे थे। इसी दौरान विरोध कर रहे एक DMK विधायक के स्पीकर के पास पहुंचने पर प्रभाकर ने उसे वापस जाने और सदन से बाहर निकलने को कहा।
लगातार नारेबाजी और हंगामे के बीच स्पीकर प्रभाकर ने विधानसभा मार्शल को विरोध कर रहे DMK विधायकों को सदन से बाहर निकालने का आदेश दिया। इसके बाद मार्शल ने प्रदर्शन कर रहे विधायकों को विधानसभा हॉल से बाहर कर दिया। सदन से बाहर ले जाए जाते समय भी DMK विधायक लगातार नारेबाजी करते रहे। इस पूरे घटनाक्रम के चलते मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा की कार्यवाही में काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही।
