उज्जैन भूमि आवंटन विवाद पर कांग्रेस में घमासान, दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी के अलग-अलग बयानों से पार्टी में बवाल

चिरौरी न्यूज
भोपाल: मध्य प्रदेश में उज्जैन के कथित भूमि आवंटन मामले को लेकर कांग्रेस द्वारा मोहन यादव सरकार पर लगाया गया हमला अब पार्टी के भीतर ही राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। इस मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के अलग-अलग बयानों ने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को उजागर कर दिया है।
विवाद की शुरुआत 24 जून को हुई, जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा के साथ दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि उज्जैन में करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन वीर भारत न्यास को मात्र एक रुपये में आवंटित कर दी गई। पटवारी ने सवाल उठाया कि जिस ट्रस्ट के ट्रस्टी मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी हैं, उसे इतनी कीमती जमीन नाममात्र की राशि पर क्यों दी गई।
हालांकि, कुछ ही दिनों बाद उज्जैन में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रेस वार्ता में कहा कि उनके पास उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार वीर भारत न्यास कोई निजी ट्रस्ट नहीं बल्कि सरकारी ट्रस्ट है, जिसके पदेन अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं। उन्होंने कहा कि बिना पूरी जांच-पड़ताल के वह किसी भी मुद्दे पर बयान नहीं देते।
दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि “दलालों की कमी नहीं है, जो झूठे आरोप लगाकर पैसे कमाते हैं।” उनके इस बयान ने कांग्रेस के भीतर नई बहस छेड़ दी। हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इशारा जीतू पटवारी या किसी कांग्रेस नेता की ओर नहीं था, लेकिन तब तक भाजपा इस मुद्दे को कांग्रेस की गुटबाजी का उदाहरण बताकर हमला बोल चुकी थी।
भोपाल में कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई। विधायक आरिफ मसूद ने स्वीकार किया कि दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी के अलग-अलग बयानों पर बैठक में विचार-विमर्श हुआ। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर चर्चा संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से की जाती है।
पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं पूर्व विधायक प्रवीण पाठक ने सवाल उठाया कि कार्यकर्ता जनता के बीच किस बयान को सही मानकर जाएं। पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है, जहां सभी को अपनी बात रखने की स्वतंत्रता है।
इस बीच कांग्रेस की प्रदेश महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर दिग्विजय सिंह पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि “कांग्रेस को दिग्विजय सिंह के नागपाश से कब मुक्ति मिलेगी?” उन्होंने आरोप लगाया कि अपने पुत्र जयवर्धन सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की महत्वाकांक्षा के कारण दिग्विजय सिंह पार्टी अनुशासन भूल गए हैं।
भाजपा ने कांग्रेस के इस अंदरूनी विवाद को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। प्रदेश के खेल मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि कांग्रेस के नेता खुद स्वीकार कर रहे हैं कि बिना तथ्यों के आरोप लगाए गए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की गुटबाजी अब सार्वजनिक हो चुकी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने भी कांग्रेस नेतृत्व से संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने राहुल गांधी और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से हस्तक्षेप कर मध्य प्रदेश कांग्रेस को मजबूत करने का आग्रह किया।
बढ़ते विवाद के बीच नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दिग्विजय सिंह से मुलाकात की। इसके बाद दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी संयुक्त रूप से मीडिया के सामने आए और पार्टी में किसी तरह के मतभेद से इनकार किया। दोनों नेताओं ने कहा कि मध्य प्रदेश कांग्रेस मोहन यादव सरकार पर लगाए गए कथित भ्रष्टाचार और भूमि आवंटन के आरोपों की जांच कर रही है और इस लड़ाई को पूरी एकजुटता के साथ लड़ा जाएगा। दिग्विजय सिंह ने अपने “दलाल” वाले बयान पर सफाई देते हुए कहा कि जीतू पटवारी उनके बेटे समान हैं और उन्होंने कांग्रेस के किसी भी नेता, विशेषकर प्रदेश अध्यक्ष, के लिए इस तरह का शब्द कभी इस्तेमाल नहीं किया।
