अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर, अमेरिकी हमलों के बाद IRGC की जवाबी कार्रवाई; स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना वैश्विक चिंता का केंद्र
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। अमेरिका ने ईरान के भीतर कई सैन्य ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए। यह कार्रवाई उस कथित ड्रोन हमले के जवाब में की गई, जिसमें तेहरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य में एक कमर्शियल कार्गो जहाज को निशाना बनाने का आरोप लगाया गया था। स्विट्जरलैंड में हुए एक कमजोर समझौते के बाद यह अमेरिका की पहली सीधी सैन्य कार्रवाई मानी जा रही है।
अमेरिकी हमलों के बाद IRGC का पलटवार
अमेरिकी हमलों के कुछ ही समय बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किन ठिकानों पर हमला हुआ और उसमें कितना नुकसान हुआ। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, IRGC ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अमेरिकी हमलों का कड़ा जवाब दिया जाएगा।
ट्रंप के बयान के तुरंत बाद हुई कार्रवाई
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई से कुछ मिनट पहले संकेत दिया था कि वॉशिंगटन ईरान की कथित हरकतों का जवाब देने की तैयारी कर रहा है। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा, तो उन्होंने कहा, “आपको पता चल जाएगा।”
इसके तुरंत बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर कई सैन्य ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए हैं।
CENTCOM ने क्या कहा?
CENTCOM के अनुसार, 25 जून को सिंगापुर के झंडे वाले कार्गो जहाज M/V Ever Lovely पर ईरान द्वारा कथित तौर पर वन-वे अटैक ड्रोन से हमला किया गया था। जहाज उस समय होर्मुज जलडमरूमध्य से निकलकर ओमान के तट के पास पहुंच रहा था। इस हमले के जवाब में अमेरिकी विमानों ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज सुविधाओं के साथ-साथ तटीय रडार साइटों को निशाना बनाया।
अमेरिकी सेना ने इस ऑपरेशन को कमर्शियल शिपिंग पर ईरान के हमले का “कड़ा जवाब” बताया। CENTCOM ने कहा कि ईरानी सेना की यह कार्रवाई युद्धविराम समझौते का स्पष्ट उल्लंघन है और इससे दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक में नौवहन की स्वतंत्रता प्रभावित हुई है।
कमांड ने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना क्षेत्र में पूरी तरह सतर्क है और यह सुनिश्चित करेगी कि ईरान के साथ हुए समझौते की सभी शर्तों का पालन हो। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए समन्वय जारी रहेगा।
जेडी वेंस की कड़ी चेतावनी
तनाव बढ़ने के कुछ घंटों बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कड़ी चेतावनी जारी की। उन्होंने लिखा कि ईरान ने युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और अमेरिका उसका पालन कर रहा है। यदि समझौते को लेकर कोई मतभेद है तो बातचीत की जा सकती है, लेकिन “हिंसा का जवाब हिंसा से ही दिया जाएगा।”
ट्रंप ने पहले ही दी थी चेतावनी
सैन्य कार्रवाई से पहले ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर हुए वन-वे ड्रोन हमलों के लिए सीधे ईरान को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने दावा किया कि एक ड्रोन ने कार्गो जहाज के ऊपरी हिस्से पर हमला किया, जिससे जहाज को नुकसान पहुंचा, हालांकि वह अपनी यात्रा जारी रखने में सफल रहा।
ट्रंप ने इस घटना को युद्धविराम समझौते का “मूर्खतापूर्ण उल्लंघन” बताते हुए कहा था कि ईरान को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
ईरानी मीडिया का दावा
अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद ईरानी मीडिया ने दावा किया कि दक्षिणी बंदरगाह शहर सिरिक के एक पियर (घाट) के पास एक प्रोजेक्टाइल गिरा। इसके अलावा, एक सैन्य सूत्र के हवाले से कहा गया कि दिन में पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में उन जहाजों की ओर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाई गई थीं, जिन्हें ईरान ने “नियम तोड़ने वाले जहाज” बताया।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक चिंता के केंद्र में ला दिया है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा और बड़ी मात्रा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का परिवहन होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव या नौवहन में बाधा अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों और वैश्विक व्यापार पर व्यापक असर डाल सकती है।
