अमेरिका आधिकारिक तौर पर अलग हुआ डब्ल्यूएचओ से, यूएन महासचिव को दी जानकारी

चिरौरी न्यूज़

नयी दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक रूप से विश्व स्वास्थ्य संगठन से अलग होने की घोषणा की है। अमेरिका ने दुनिया भर में कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार के लिए चीन को उत्तरदायी माना है और विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ चीन के बढ़ते रिशों के बीच ट्रम्प प्रसाशन ने अपने देश के सभी संबंध खत्म करने की आधिकारिक तौर पर संयुक्त राष्ट्र को जानकारी दे दी है।

इससे पहले अमेरिका डब्ल्यूएचओ पर लगातार कोरोना वायरस को लेकर चीन का पक्ष लेने का आरोप लगाता रहा है। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य संगठन के विश्व को गुमराह करने के कारण इस वायरस से दुनिया भर में पांच लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। जिनमें से 1,30,000 से अधिक लोग तो अमेरिका के ही हैं। बता दें कि अमेरिका ने अप्रैल से ही डब्ल्यूएचओ को पैसे देना बंद कर दिया था।

डब्ल्यूएचओ को पैसा देने से संबधित निर्णय ट्रंप प्रशासन ने उसके चीन के साथ संबंधों की समीक्षा शुरू करने के बाद लिया था। अमेरिका का मानना है कि डब्ल्यूएचओ को कोरोना वायरस के समय जिस तरह काम करना चाहिए था वो नहीं किया और डब्ल्यूएचओ पर चीन की करतूत छुपाने का भी आरोप कई बार ट्रम्प ने अपने भाषण में लगा चुके हैं। अब एक महीने बाद ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ संबंध समाप्त करने की घोषणा की थी। अमेरिका डब्ल्यूएचओ को सबसे अधिक कोष, 45 करोड़ डॉलर से अधिक प्रति वर्ष देता है। जबकि चीन का योगदान अमेरिका के योगदान के दसवें हिस्से के बराबर है।

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने एक बयान में कहा, ‘‘ मैं कह सकता हूं कि छह जुलाई 2020 को अमेरिका ने महासचिव को विश्च स्वास्थ्य संगठन से हटने की आधिकारिक जानकारी दी जो छह जुलाई 2021 से प्रभावी होगा।’’ दुजारिक ने कहा कि महासचिव डब्ल्यूएचओ के साथ इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि संगठन से हटने की सभी प्रक्रियाएं पूरी की गईं की नहीं। अमेरिका 21 जून 1948 से डब्ल्यूएचओ संविधान का पक्षकार है।

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