उत्तर प्रदेश: मदरसा टीचर ब्रिटेन का नागरिक बनने के बाद भी ले रहा था सैलरी, अब ED ने की ज़मीन ज़ब्त
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने शुक्रवार को कहा कि उसने उत्तर प्रदेश के एक मदरसा टीचर की 53.46 लाख रुपये कीमत की रिहायशी ज़मीन को अस्थायी रूप से ज़ब्त कर लिया है। इस टीचर ने ब्रिटिश नागरिकता लेने के बाद भी राज्य सरकार से सैलरी, पेंशन और दूसरे फायदे लेना जारी रखा था।
एजेंसी ने एक बयान में कहा कि संत कबीर नगर ज़िले में मौजूद 189.75 वर्ग मीटर की इस ज़मीन को ED के लखनऊ ज़ोनल ऑफिस ने मौलाना शम्सुल हुदा खान के खिलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत ज़ब्त किया।
ED के मुताबिक, खान ने दिसंबर 2013 में ब्रिटिश नागरिकता ले ली थी और इसके बाद वह भारतीय नागरिक नहीं रहे। हालांकि, एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने यह बात छिपाई और आज़मगढ़ के मुबारकपुर में सरकार से मदद पाने वाले एक मदरसे में असिस्टेंट टीचर के तौर पर काम करते रहे।
ED ने कहा कि खान 2007 से 2017 तक रिकॉर्ड में कर्मचारी बने रहे और अपनी सर्विस कभी वेरिफाई न होने के बावजूद सैलरी लेते रहे।
अल्पसंख्यक कल्याण और वक्फ़ विभाग की जांच में पाया गया कि 2007-2017 के दौरान खान की सर्विस कभी वेरिफाई नहीं हुई थी। एजेंसी के मुताबिक, इसके बावजूद उन्हें 2017 में रेगुलर पेंशन के साथ वॉलंटरी रिटायरमेंट दे दिया गया।
ED ने कहा कि खान को उत्तर प्रदेश सरकार से सैलरी, पेंशन, GPF और दूसरे भत्तों के तौर पर करीब 53.46 लाख रुपये मिले। एजेंसी ने इस रकम को PMLA के तहत “अपराध से हुई कमाई” (proceeds of crime) बताया।
ED के मुताबिक, ब्रिटिश नागरिकता लेने के बाद भी खान ने संत कबीर नगर में अचल संपत्ति खरीदने के लिए अपने सरेंडर किए गए भारतीय पासपोर्ट के साथ-साथ पैन, आधार और वोटर ID का इस्तेमाल किया।
एजेंसी ने कहा कि खान ने ब्रिटिश नागरिकता लेने के बाद खलीलाबाद में 189.75 वर्ग मीटर की ज़मीन खरीदी थी।
चूंकि पैसे खर्च हो चुके थे, इसलिए ED ने कहा कि उसने उतनी ही कीमत की एक संपत्ति ज़ब्त की है। अस्थायी रूप से ज़ब्त की गई संपत्ति की कीमत 53.46 लाख रुपये है।
यह मनी लॉन्ड्रिंग का मामला उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR से जुड़ा है। ED ने इस मामले के सिलसिले में 11 फरवरी, 2026 को संत कबीर नगर में तलाशी ली।
एजेंसी ने बताया कि तलाशी के दौरान उन्हें कुछ दस्तावेज़ मिले और उन्हीं दस्तावेज़ों के आधार पर उन्होंने खान की संपत्ति ज़ब्त कर ली।
ED ने यह भी आरोप लगाया कि ब्रिटिश नागरिक होने के बावजूद, खान पाकिस्तान के कई आतंकवादी संगठनों के करीबी थे और उन्हें ऐसे कई संगठनों की बैठकों में देखा गया था।
