विजय ने तमिलनाडु में विश्वास मत जीता; 144 विधायकों ने पक्ष में मतदान किया, DMK का सदन से वॉकआउट

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: बुधवार को मुख्यमंत्री विजय ने 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव शानदार तरीके से जीत लिया। बहुमत के लिए जरूरी 118 विधायकों के मुकाबले उन्हें 144 विधायकों का समर्थन मिला। हालांकि, यह फ्लोर टेस्ट विपक्ष की खाली बेंचों के बीच हुआ, क्योंकि DMK और DMDK के विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया था। वहीं, PMK के चार और BJP के एक विधायक ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा AIADMK के भीतर बढ़ती बगावत को लेकर रही। ‘बागी’ नेताओं शनमुगम और एसपी वेलुमणि के नेतृत्व वाला AIADMK का विरोधी खेमा, जिसे पार्टी के 47 में से 30 विधायकों का समर्थन हासिल बताया जा रहा है, खुलकर विजय सरकार के साथ खड़ा नजर आया। आंकड़ों के मुताबिक, AIADMK गुट के कम से कम 25 विधायकों ने मुख्यमंत्री विजय के पक्ष में वोट किया।
विश्वास मत से पहले विजय सरकार के पास 120 विधायकों का समर्थन था। हालांकि, इनमें से एक विधायक को मद्रास हाई कोर्ट के आदेश के बाद मतदान में हिस्सा लेने से रोक दिया गया। यह वही विधायक था जिसने पिछला चुनाव केवल एक वोट के अंतर से जीता था।
DMK और उसके सहयोगियों के वॉकआउट तथा पांच विधायकों के मतदान से दूर रहने के कारण सदन में मौजूद और वोट डालने वाले सदस्यों की संख्या घट गई। इसका सीधा असर यह हुआ कि EPS खेमे के केवल 22 विधायक ही TVK सरकार के खिलाफ वोट कर पाए।
अब जबकि विश्वास मत का संकट टल चुका है, सबसे बड़ा सवाल AIADMK में हुई टूट को लेकर उठ रहा है। पार्टी प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) के निर्देशों की अनदेखी करते हुए 25 विधायकों ने अलग राह चुन ली है, जिससे साफ संकेत मिला है कि उनकी राजनीतिक वफादारी अब बदल चुकी है। इस घटनाक्रम के बाद EPS खेमे में सिर्फ 22 विधायक ही बचे दिखाई दे रहे हैं।
हालांकि, दलबदल विरोधी कानून से बचने और TVK के साथ औपचारिक विलय के लिए बागी गुट को AIADMK विधायक दल के कम से कम दो-तिहाई यानी 47 में से 31 विधायकों का समर्थन चाहिए। फिलहाल यह आंकड़ा उनके पास नहीं है।
इधर, EPS खेमे ने सरकार पर ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ यानी विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि उनकी सरकार “घोड़े की रफ्तार” से काम करती है, लेकिन “हॉर्स-ट्रेडिंग” में विश्वास नहीं रखती।
विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए विजय ने यह भी कहा कि उनकी सरकार हमेशा धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहेगी। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि पिछली सरकारों द्वारा शुरू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं को उनकी सरकार आगे भी जारी रखेगी।
