15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने सिराज को बनाया निशाना, दलीप ट्रॉफी में दिखा ‘निडर’ अंदाज

15-year-old Vaibhav Suryavanshi targets Siraj; displays 'fearless' style in Duleep Trophy.चिरौरी न्यूज

चेन्नई: उम्र महज 15 साल, सामने भारत के अनुभवी टेस्ट गेंदबाज मोहम्मद सिराज और मुकाबला दलीप ट्रॉफी का फाइनल। ऐसे बड़े मंच पर जहां कई अनुभवी बल्लेबाज भी दबाव में आ जाते हैं, वहीं वैभव सूर्यवंशी ने ऐसा अंदाज दिखाया कि हर किसी की नजरें इस युवा बल्लेबाज पर टिक गईं।

दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में ईस्ट जोन की ओर से पारी की शुरुआत करने उतरे वैभव ने दक्षिण जोन के खिलाफ शुरुआती ओवरों में ही अपने इरादे साफ कर दिए। खासतौर पर मोहम्मद सिराज के एक ओवर में लगाए गए लगातार आक्रामक शॉट्स ने मैच का माहौल बदल दिया।

सिराज के ओवर में बरसे 14 रन

ईस्ट जोन की पारी के सातवें ओवर में वैभव सूर्यवंशी ने मोहम्मद सिराज को निशाना बनाया। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने पहले सिराज की गेंद को पॉइंट के ऊपर से खेलकर चौका हासिल किया। इसके बाद फुल डिलीवरी को लॉन्ग-ऑफ के ऊपर से उठाकर शानदार छक्का जड़ दिया।

ओवर की आखिरी गेंद पर वैभव ने मिड-ऑफ के ऊपर से एक और चौका लगा दिया। इस तरह सिराज के एक ही ओवर से 14 रन आए।

महज 15 साल के बल्लेबाज की इस बेखौफ बल्लेबाजी ने भारत के प्रमुख टेस्ट गेंदबाजों में शामिल सिराज को शुरुआती स्पेल में लय हासिल करने का मौका नहीं दिया। सिराज ने अपने पहले पांच ओवरों में 41 रन खर्च किए और उन्हें कोई विकेट नहीं मिला।

कप्तान को बदलनी पड़ी फील्डिंग

वैभव की आक्रामक बल्लेबाजी का असर इतना जल्दी दिखा कि दक्षिण जोन के कप्तान तिलक वर्मा को पारी के आठवें ओवर में ही फील्डिंग में बदलाव करना पड़ा। रेड-बॉल क्रिकेट की पहली पारी में इतनी जल्दी सीमा रेखा पर पांच खिलाड़ियों को तैनात करना इस बात का संकेत था कि युवा बल्लेबाज ने गेंदबाजों पर कितना दबाव बना दिया था।

मैदान पर वैभव और तिलक के बीच तीखी बातचीत भी देखने को मिली। हालांकि, इसका असर युवा बल्लेबाज की बल्लेबाजी पर नहीं पड़ा और ईस्ट जोन ने मजबूत शुरुआत जारी रखी।

अर्धशतक से चूके

वैभव सूर्यवंशी भले ही अपना अर्धशतक पूरा नहीं कर सके, लेकिन उनकी पारी ने फाइनल के पहले दिन दक्षिण जोन को बैकफुट पर जरूर धकेल दिया। वह सिर्फ 37 गेंदों में 44 रन बनाकर चामा मिलिंद की गेंद पर टॉप-एज पुल शॉट खेलते हुए आउट हुए।

उनकी पारी में आक्रामकता के साथ-साथ बड़े मंच पर दबाव झेलने की क्षमता भी नजर आई। खास बात यह रही कि वैभव ने ऐसी पिच पर तेजी से रन बनाए, जिसे मैच से पहले तेज गेंदबाजों के लिए मददगार माना जा रहा था।

टेस्ट दरवाजे पर दस्तक?

अभी 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी को भारतीय टेस्ट टीम में शामिल करने की चर्चा निश्चित तौर पर जल्दबाजी होगी। लेकिन फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में उनका प्रदर्शन और बड़े मंच पर स्थापित अंतरराष्ट्रीय गेंदबाज के खिलाफ इस तरह की बल्लेबाजी उन्हें भविष्य के लिए खास बनाती है।

रेड-बॉल क्रिकेट में लगातार रन बनाना ही उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। अगर वैभव घरेलू क्रिकेट में इसी तरह प्रदर्शन करते रहे, तो आने वाले वर्षों में इंडिया ए के रेड-बॉल सेटअप और राष्ट्रीय चयन की चर्चा में उनका नाम तेजी से ऊपर आ सकता है।

उनकी बल्लेबाजी की शैली को लेकर यह बहस भी जारी है कि क्या उनका खेल सफेद गेंद वाले क्रिकेट के लिए ज्यादा स्वाभाविक है। लेकिन सही तरीके से तैयार किए जाने पर उनकी बेखौफ बल्लेबाजी उन्हें टेस्ट क्रिकेट में एक आक्रामक ओपनर के रूप में खास पहचान दे सकती है।

ईस्ट जोन का मजबूत स्कोर

वैभव के तेज शुरुआत देने के बाद ईस्ट जोन ने अपनी स्थिति मजबूत कर ली। दिन का खेल खत्म होने तक टीम ने 79 ओवर में 385/4 रन बना लिए थे।

कप्तान ईशान किशन ने मोर्चा संभालते हुए नाबाद 111 रन बनाए। उन्होंने 135 गेंदों की पारी में 12 चौके और दो छक्के लगाए तथा 122 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। कुमार कुशाग्र 63 रन बनाकर उनका साथ दे रहे थे। दोनों के बीच पांचवें विकेट के लिए 127 रन की नाबाद साझेदारी ने दक्षिण जोन को और दबाव में डाल दिया।

लेकिन दिन की सबसे बड़ी कहानी स्कोरबोर्ड पर मौजूद 385 रन नहीं थी। चेन्नई में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने जिस तरह मोहम्मद सिराज जैसे अनुभवी टेस्ट गेंदबाज पर हमला बोला, उसने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या भारतीय क्रिकेट को भविष्य का एक और बेखौफ टेस्ट बल्लेबाज मिल गया है?

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