दिल्ली के सत्या निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढही, कई लोगों के दबे होने की आशंका
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्या निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई। इमारत में छात्रों के लिए पेइंग गेस्ट (PG) और हॉस्टल की सुविधा थी। हादसे में कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। राहत और बचाव कार्य के लिए कई एजेंसियों की टीमें मौके पर जुटी हुई हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, अब तक आठ लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया है। इनमें से तीन लोगों को इलाज के लिए AIIMS ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां दो की हालत गंभीर बताई जा रही है।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, करीब 40 से 50 लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है, हालांकि दिल्ली पुलिस ने अभी तक इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पुलिस ने कहा है कि फिलहाल फंसे और घायल लोगों की सही संख्या स्पष्ट नहीं है और पुष्टि होने के बाद जानकारी साझा की जाएगी।
बेसमेंट में चल रहा था निर्माण कार्य
पुलिस के अनुसार, इमारत के बेसमेंट में निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे इमारत भरभराकर गिर गई। दक्षिण कैंपस थाने में दोपहर 1:34 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली।
पुलिस ने इमारत के मालिक की पहचान कर ली है और उसे तलाशने के लिए टीमें गठित की गई हैं। मामले में मालिक आनंद बंसल, जो गुरुग्राम के रहने वाले बताए जा रहे हैं, के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
यह इमारत “हॉस्टल डेज” के नाम से जानी जाती थी। बताया जा रहा है कि इसमें करीब 15 कमरे थे और प्रत्येक कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे। ग्राउंड फ्लोर पर एक मेडिकल शॉप भी संचालित होती थी।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, यहां रहने वाले ज्यादातर छात्र केरल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से थे। इनमें कई छात्र मोतीलाल नेहरू कॉलेज, आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज और श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में पढ़ते थे। छात्रों से करीब 12 हजार रुपये प्रति बेड किराया लिया जाता था।
मौके पर पहुंचीं कई एजेंसियां
हादसे के बाद दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, CAT एंबुलेंस समेत कई आपातकालीन एजेंसियों को मौके पर भेजा गया। NDRF, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), MCD और सिविल डिफेंस की टीमें भी राहत एवं बचाव अभियान में शामिल हैं।
बचाव कार्य के लिए कम से कम 12 फायर टेंडर मौके पर लगाए गए हैं। मलबे में फंसे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर भी मौके पर लाए गए हैं।
स्थानीय लोग भी बचाव अभियान में जुटे हुए हैं और अपने हाथों तथा उपलब्ध औजारों की मदद से मलबा हटाकर लोगों की तलाश कर रहे हैं। संकरी गलियों के कारण घटनास्थल तक राहत एवं बचाव वाहनों को पहुंचने में परेशानी का भी सामना करना पड़ा।
पुलिस और अर्धसैनिक बलों को भीड़ को नियंत्रित करने और रास्ता साफ रखने के लिए तैनात किया गया है। पुलिस ने स्थानीय लोगों और तमाशबीनों से घटनास्थल से दूर रहने की अपील की है, ताकि बचाव अभियान में बाधा न आए।
मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल ने लिया जायजा
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का दौरा कर राहत एवं बचाव अभियान का जायजा लिया। एहतियात के तौर पर पास की एक इमारत को भी खाली कराया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता देने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने दिल्ली पुलिस, फायर सर्विस, DDMA और अन्य एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ तेजी से राहत एवं बचाव कार्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने हादसे में प्रभावित लोगों की सुरक्षा और कुशलता के लिए प्रार्थना की।
