बिहार चुनाव में हार के बाद लालू परिवार की बढ़ीं मुश्किलें, अब IRCTC होटल घोटाले में कानूनी संकट

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली/पटना: बिहार विधानसभा चुनाव में सत्ता से बाहर होने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा उनके परिवार की कानूनी परेशानियाँ लगातार बढ़ती जा रही हैं। चुनावी हार के झटके से उबरने से पहले ही अब IRCTC होटल घोटाले में बड़ा कानूनी संकट खड़ा हो गया है।
लालू प्रसाद यादव ने IRCTC होटल घोटाले में अपने और परिवार के खिलाफ आपराधिक आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। उन्होंने राउज़ एवेन्यू कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की है, जिसमें भ्रष्टाचार, आपराधिक साज़िश और धोखाधड़ी के आरोपों पर मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई थी।
दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यसूची के अनुसार, यह मामला 5 जनवरी को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।
परिवार पर एक साथ कई मोर्चों पर दबाव
13 अक्टूबर 2025 को राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने लालू प्रसाद यादव, उनके बेटे तेजस्वी यादव, पत्नी राबड़ी देवी और अन्य आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120B (आपराधिक साज़िश) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था। सभी आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए आरोपों से इनकार किया है।
यह कथित घोटाला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद केंद्र में रेल मंत्री थे। आरोप है कि इस दौरान IRCTC के दो होटलों को नियमों की अनदेखी करते हुए पट्टे पर दिया गया। इनमें से एक होटल सरला गुप्ता को आवंटित किया गया, जो उस समय RJD सांसद और लालू के करीबी प्रेम गुप्ता की पत्नी हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि इसके बदले लालू परिवार को बेनामी कंपनी के ज़रिये दिल्ली में तीन एकड़ की कीमती ज़मीन मिली।
ट्रांसफर याचिकाएँ खारिज, राहत नहीं
लालू परिवार के लिए मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं। हाल ही में दिल्ली की एक अदालत ने राबड़ी देवी और परिवार के अन्य सदस्यों की वह याचिकाएँ भी खारिज कर दीं, जिनमें उन्होंने IRCTC होटल घोटाला, जमीन के बदले नौकरी मामला और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों को किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की थी।
राउज़ एवेन्यू कोर्ट के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश भट्ट ने चारों ट्रांसफर याचिकाओं को नामंजूर कर दिया, जिससे साफ हो गया है कि लालू यादव परिवार के खिलाफ सभी मामले अब विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत में ही चलेंगे।
राजनीतिक झटकों के बीच कानूनी घेराबंदी
बिहार चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद लालू यादव पहले से ही राजनीतिक दबाव में हैं। ऐसे समय में लगातार अदालतों से मिल रहे झटकों ने RJD नेतृत्व की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। आने वाले दिनों में दिल्ली हाईकोर्ट का रुख लालू परिवार के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसी से यह तय होगा कि कानूनी लड़ाई में उन्हें कोई राहत मिलती है या नहीं।
