कोलकाता में ED रेड के दौरान हाई ड्रामा, ममता की बैक-डोर एंट्री और रहस्यमयी हरी फ़ाइल
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: कोलकाता में गुरुवार को उस वक्त जबरदस्त सियासी ड्रामा देखने को मिला, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चुनावी रणनीतिकार और राजनीतिक परामर्श संस्था I-PAC से जुड़े ठिकानों पर पहुंच गईं और कई फाइलें लेकर बाहर निकलीं। इस अभूतपूर्व घटनाक्रम ने चुनावी माहौल वाले बंगाल में राजनीतिक पारा और चढ़ा दिया है तथा यह ममता सरकार और बीजेपी के बीच टकराव का नया केंद्र बन गया है।
दिन की शुरुआत ED द्वारा I-PAC से जुड़े दो ठिकानों पर एक साथ छापेमारी से हुई। इनमें एक I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन का कोलकाता के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास और दूसरा साल्ट लेक में स्थित I-PAC का दफ्तर शामिल था। I-PAC की स्थापना प्रशांत किशोर ने की थी और यह संस्था पिछले कई वर्षों से तृणमूल कांग्रेस के साथ जुड़ी रही है। 2019 और 2021 के चुनावों में पार्टी की जीत में इसकी अहम भूमिका मानी जाती है। बाद में प्रशांत किशोर के सक्रिय राजनीति में उतरने के बाद प्रतीक जैन ने I-PAC की कमान संभाली थी।
छापेमारी के दौरान सबसे पहले कोलकाता पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचे। इसके कुछ देर बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी वहां पहुंचीं। कुछ मिनटों के भीतर वे बाहर निकलीं, हाथ में हरे रंग की एक फाइल लिए हुए और काफी नाराज नजर आईं।
मीडिया से बात करते हुए ममता बनर्जी ने ED की कार्रवाई को “राजनीति से प्रेरित” बताया और आरोप लगाया कि यह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर की गई है। उन्होंने दावा किया कि ED तृणमूल कांग्रेस की चुनावी रणनीति, 2026 के लिए उम्मीदवारों की सूची और पार्टी के गोपनीय दस्तावेज हासिल करने की कोशिश कर रही थी। ममता ने आरोप लगाया कि एजेंसी पार्टी की रणनीतिक फाइलें “चुराने” आई थी।
इसके बाद मुख्यमंत्री सीधे साल्ट लेक स्थित I-PAC कार्यालय पहुंचीं, जहां ED की दूसरी टीम छापेमारी कर रही थी। बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी पिछले दरवाजे से कार्यालय में दाखिल हुईं और करीब 15–20 मिनट बाद बाहर निकलीं। इस दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के कुछ अधिकारी भी कई फाइलें लेकर बाहर आते देखे गए। इन फाइलों को उस महिंद्रा गाड़ी की पिछली सीट और डिक्की में रखा गया, जिसमें ममता बनर्जी आई थीं।
सूत्रों के मुताबिक ED की जांच मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में हो रही है, जिसमें कथित तौर पर बंगाल कोयला घोटाले से जुड़े पैसों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी का आरोप है कि इस घोटाले की कथित आय I-PAC को 2022 के गोवा विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के लिए काम करने के बदले दी गई थी।
ED ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री, उनके सहयोगियों और राज्य पुलिसकर्मियों ने छापेमारी के दौरान “जबरन” दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत हटाए। हालांकि एजेंसी ने यह भी कहा कि उसकी कार्रवाई किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है और न ही इसका चुनाव से कोई लेना-देना है।
फिलहाल यह साफ नहीं है कि जिन फाइलों को ममता बनर्जी और उनके अधिकारी अपने साथ ले गए, उनमें क्या था। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। क्या ये फाइलें पहले ही ED द्वारा जब्त की जा चुकी थीं, या छापेमारी जारी रहने के दौरान उन्हें वहां से हटाया गया? ED ने अब तक इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
इस बीच ED ने मुख्यमंत्री द्वारा छापेमारी में “रुकावट” डाले जाने का आरोप लगाते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को होगी।
फिलहाल इतना तय है कि ED रेड के दौरान फाइलों की आवाजाही का मामला अब सियासी विवाद का बड़ा मुद्दा बन गया है और आने वाले चुनावों से पहले ममता सरकार और बीजेपी के बीच टकराव और तेज होने की संभावना है।
