एशेज में इंग्लैंड की शर्मनाक हार के बाद ‘बाज़बॉल’ पर सवाल, ज्योफ्री बॉयकॉट का तीखा हमला

England suffers humiliating defeat in the Ashes, ‘Bazball’ tactics questioned; Geoffrey Boycott launches scathing attackचिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: इंग्लैंड के लिए एशेज सीरीज़ को ‘बाज़बॉल युग’ की सबसे बड़ी कसौटी माना जा रहा था, लेकिन यह दौरा हाल के वर्षों में ऑस्ट्रेलिया में किसी इंग्लिश टीम के सबसे अपमानजनक प्रदर्शन में बदल गया। इंग्लैंड को 4–1 से सीरीज़ हार का सामना करना पड़ा, जिसने टीम की तैयारी, रणनीति और नेतृत्व की गंभीर कमियों को उजागर कर दिया।

गुरुवार, 8 जनवरी को सिडनी में खेले गए अंतिम टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को पांच विकेट से हराकर सीरीज़ पर निर्णायक मुहर लगा दी। इससे पहले ही ऑस्ट्रेलिया 3–0 की अजेय बढ़त हासिल कर चुका था। मिचेल स्टार्क और ट्रैविस हेड जैसे खिलाड़ियों ने, कुछ सीनियर खिलाड़ियों की अनुपस्थिति के बावजूद, मेज़बान टीम को मजबूती से संभाला। वहीं इंग्लैंड की टीम बार-बार अहम मौकों को भुनाने में नाकाम रही।

इसी पृष्ठभूमि में इंग्लैंड के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज़ ज्योफ्री बॉयकॉट ने नेतृत्व समूह पर तीखा हमला बोला। उन्होंने द टेलीग्राफ में लिखते हुए कहा, “इंग्लैंड के तीन समझदार लोग आखिरकार तीन जोकर साबित हुए। ब्रेंडन मैक्कलम, रॉब की और बेन स्टोक्स ने तीन साल तक एक झूठ बेचा।”

बॉयकॉट का आरोप है कि मैक्कलम की कोचिंग फिलॉसफी ‘बिना सोचे-समझे खेलने’ को बढ़ावा देती है।

“कोई जवाबदेही नहीं है, कोई डांट नहीं है और कोई खिलाड़ी ड्रॉप नहीं होता। नतीजा यह है कि वे वही बेवकूफी भरी गलतियां दोहराते रहते हैं,” उन्होंने लिखा।

उनकी सबसे कड़ी टिप्पणी यह रही कि खिलाड़ियों को हकीकत से काट दिया गया है। “अगर कोच और कप्तान सब कुछ ठीक मानते हैं, तो खिलाड़ी क्यों बदलेंगे, क्यों सीखेंगे या सुधार करेंगे? बिना नतीजों के पूरी छूट इंग्लैंड क्रिकेट को पीछे खींच रही है।”

क्या जुआरी बदल सकता है?

बॉयकॉट ने नेतृत्व की जिद और आलोचना न स्वीकारने के रवैये पर भी सवाल उठाए। कप्तान बेन स्टोक्स ने पहले पूर्व खिलाड़ियों की सलाह को ‘हैज़-बीन’ कहकर खारिज किया था, हालांकि बाद में उन्होंने माफी मांगी। वहीं कोच ब्रेंडन मैक्कलम अपनी तैयारी और रणनीति को लेकर लंबे समय तक अड़े रहे।

हालांकि सीरीज़ के बाद मैक्कलम ने माना कि टीम से “हर चीज सही नहीं हुई” और यह भी स्वीकार किया कि टेस्ट मैचों के बीच तैयारी और समय प्रबंधन में चूक हो सकती है। स्टोक्स ने भी माना कि टीम ने “बहुत ज़्यादा तीन-आउट-ऑफ-टेन क्रिकेट” खेला और निरंतरता के लिए दोबारा संतुलन बनाना होगा।

बॉयकॉट ने लिखा, “मुझे ब्रेंडन पसंद हैं। उन्होंने इंग्लैंड क्रिकेट में नई ताजगी और रोमांच भरा। लेकिन वह एक जुआरी हैं, जिन्हें लगता है कि वह हमेशा पैसा वापस जीत लेंगे। यही सोच आखिरकार तबाही लाती है।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है कि ब्रेंडन हमें जितना आगे ले जा सकते थे, ले जा चुके हैं। अब इंग्लैंड को अगले स्तर तक ले जाने के लिए किसी और की ज़रूरत है।”

तैयारी पर भी उठे सवाल

यह दौरा सिर्फ मैदान पर मिली हार तक सीमित नहीं रहा। सीरीज़ से पहले इंग्लैंड की तैयारी भी आलोचना के घेरे में रही। टीम ने केवल एक इंट्रा-स्क्वाड अभ्यास मैच खेला, वह भी पर्थ के एक क्लब ग्राउंड पर, जो ऑस्ट्रेलियाई परिस्थितियों से मेल नहीं खाता था। इससे खिलाड़ियों को पिच की उछाल, गति और हालात के अनुरूप ढलने का मौका नहीं मिला।

इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) पर भी दबाव साफ दिखा। सीरीज़ के बाद ECB के मुख्य कार्यकारी रिचर्ड गोल्ड ने दौरे को “बेहद निराशाजनक” बताया और कहा कि पूरी समीक्षा की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि तैयारी, फैसलों और हालात के अनुरूप ढलने की क्षमता की जांच होगी और 2027 एशेज को लक्ष्य बनाकर बदलावों पर विचार किया जाएगा।

अब देखना यह है कि ब्रेंडन मैक्कलम, बेन स्टोक्स और रॉब की की तिकड़ी इस एशेज हार के बाद भी अपने पदों पर बनी रहती है या नहीं। इंग्लैंड की अगली टेस्ट सीरीज़ जून 2026 में है, और तब तक इंग्लिश क्रिकेट के भविष्य को लेकर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

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