पुस्तक मेला 2026: डिजिटल युग में किताबों के प्रति जेन-जी का क्रेज, प्रकाशकों के स्टॉल पर उमड़ी भारी भीड़ 

Book Fair 2026: Gen Z's craze for books in the digital age, publishers' stalls witness huge crowdsचिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 इस बार केवल पुस्तकों की खरीद-फरोख्त का मंच नहीं, बल्कि पीढ़ियों, विचारों और माध्यमों को जोड़ने वाला एक जीवंत सांस्कृतिक संवाद बनकर उभरा है। डिजिटल युग में यह मेला उस आशंका को भी खारिज करता दिखा कि स्क्रीन के बढ़ते प्रभाव में किताबों की दुनिया सिमटती जा रही है। दरअसल, यहां किताबें नए रूप, नए पाठक और नई भाषाओं के साथ और अधिक विस्तार पाती नजर आईं।

मेले के गलियारों में जेन-जी पाठकों की उत्सुकता विशेष रूप से दिखाई दी। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की किताबें, यात्रा वृत्तांत, प्रेम कथाएं और चर्चित अपराध कथाओं पर आधारित साहित्य युवा पीढ़ी को आकर्षित करता दिखा। यह संकेत है कि आज का युवा केवल त्वरित डिजिटल सामग्री तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि गहन पढ़ने और अनुभव साझा करने की ओर भी लौट रहा है। इंटरनेट से जन्मे लेखक और पाठक जब प्रिंट माध्यम से जुड़ते हैं, तो साहित्य की पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़ते हैं।

वहीं दूसरी ओर, क्लासिक साहित्य के स्टॉल पर बुजुर्गों और मध्यवर्गीय पाठकों की उपस्थिति यह बताती है कि किताबों के प्रति लगाव समय की सीमाओं से परे है। मेले में बने सेल्फी पॉइंट्स पर मुस्कुराते चेहरे और बीते दिनों की यादों में खोए लोग इस बात का प्रमाण हैं कि पुस्तक मेले अब केवल बौद्धिक नहीं, भावनात्मक अनुभव भी बन चुके हैं। यह स्मृतियों और आधुनिकता का सुंदर संगम है।
नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का सबसे बड़ा संदेश यही है कि डिजिटल और पारंपरिक माध्यम एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। जब तकनीक पाठकों को किताबों तक पहुंचाने का माध्यम बनती है और किताबें सोचने-समझने की गहराई देती हैं, तब एक संतुलित बौद्धिक समाज की नींव पड़ती है। यह मेला साहित्य के भविष्य की उसी आशावादी तस्वीर को सामने लाता है, जिसमें हर पीढ़ी, हर रुचि और हर माध्यम के लिए किताबों की दुनिया खुली है।

भारत मंडपम में नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026, 10 से 18 जनवरी तक आयोजित किया गया। इसमें हर उम्र के पाठकों की भीड़ ने यह उम्मीद जगाई कि भले ही हम और आप डिजिटल युग में विचरते हों, सोशल मीडिया में लाइक्स और कमेंट पर हर पल निगाहें रहती हों, मगर पुस्तकों के प्रति रूचि पहले की तरह ही जस की तस बनी हुई है।

इस मेले में बच्चों के लिए अलग से स्टॉल लगाए गए हैं, जो दर्शाते हैं कि युवा पीढ़ी भी पुस्तकों की दुनिया से अछूती नहीं रही है। ये स्टॉल बच्चों को पढ़ाई और किताबों के प्रति आकर्षित करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए हैं। बाल मंडपम, किड्स एक्सप्रेस, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और प्रकाशन उद्योग से जुड़े मंच यह स्पष्ट करते हैं कि यह मेला केवल पाठकों के लिए नहीं, बल्कि लेखकों, प्रकाशकों, शिक्षकों और नीति-निर्माताओं के लिए भी एक साझा मंच है। यहां पढ़ने की आदत को मनोरंजन, संवाद और सहभागिता से जोड़ा गया है—जो आज के समय की मांग है।

Book Fair 2026: Gen Z's craze for books in the digital age, publishers' stalls witness massive crowdsजिन्हें अक्सर “स्क्रीन की पीढ़ी” कहकर किताबों से दूर मान लिया जाता है, वहीं इस बार जेन-जी युवा प्रगति मैदान में अपनी उंगलियों से पिक्सल्स नहीं बल्कि कागज के पन्नों में भविष्य तलाशते नजर आए। तकनीक और गैजेट्स के बीच हमेशा रहने वाली सृष्टि झा युवा विश्व पुस्तक मेले 2026 में ज्ञान और साहित्य के सागर में गौते लगाते दिखाई दी। उन्होंने बताया कि तकनीक चाहे कितनी भी तरक्की कर लें, लेकिन मानसिक सुकून आज भी किताबों में छुपे ज्ञान से ही मिलता है।

दरअसल, केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान का यह जोर कि युवा लेखक मेंटरशिप अवधि का अधिकतम लाभ उठाकर सार्थक और प्रेरक पुस्तकें लिखें, अत्यंत प्रासंगिक है। आज के डिजिटल और त्वरित सूचना के युग में गहन शोध, तथ्यात्मक प्रामाणिकता और विचारों की स्पष्टता पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गई है। इसी संदर्भ में राष्ट्रीय पुस्तक ट्रस्ट (एनबीटी) के माध्यम से भौतिक और डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता तथा ‘एक राष्ट्र, एक सदस्यता’ (ओएनओएस) पहल के तहत शोध सामग्री तक पहुंच सुनिश्चित करने का निर्देश एक दूरदर्शी कदम है।

महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि पीएम-युवा 3.0 देश की विविधता को उसकी वास्तविक शक्ति के रूप में स्वीकार करता है। विभिन्न पृष्ठभूमियों से आए युवा लेखकों की ऊर्जा, आत्मविश्वास और आकांक्षाएं ‘विकसित भारत’ के सपने को शब्दों का आधार देती हैं। यह योजना यह भी सिद्ध करती है कि सरकार केवल पाठ्यक्रम और परीक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि विचार, संवाद और सृजनशीलता को राष्ट्र की प्रगति का मूल मानती है। पीएम-युवा 3.0 केवल लेखक तैयार करने की योजना नहीं है, बल्कि यह भावी भारत की वैचारिक पूंजी में निवेश है—जहां कलम विचारों को दिशा देती है और विचार राष्ट्र के भविष्य को आकार देते हैं।

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