नागपुर में मध्यम कैलिबर गोला-बारूद निर्माण सुविधा का उद्घाटन, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर
चिरौरी न्यूज
नागपुर: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की गोला-बारूद निर्माण में आत्मनिर्भरता और भारत को वैश्विक उत्पादन केंद्र बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने नागपुर में सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड में मध्यम कैलिबर गोला-बारूद निर्माण सुविधा का उद्घाटन किया। यह संयंत्र पूरी तरह से स्वचालित है और 30 मिमी गोला-बारूद का उत्पादन करता है, जिसका इस्तेमाल भारतीय सेना और नौसेना में बड़े पैमाने पर होता है।
उन्होंने उस समय को याद किया जब गोला-बारूद की कमी ने देश की रक्षा तैयारियों को प्रभावित किया था और सरकार ने इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता महसूस की थी। इसके अलावा, रक्षा मंत्री ने पिनाका रॉकेट निर्माण संयंत्र का दौरा किया और निर्देशित पिनाका रॉकेटों की पहली खेप आर्मेनिया को रवाना की।
रक्षा मंत्री ने निजी क्षेत्र के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय गोला-बारूद निर्माण से देश लगातार प्रगति कर रहा है। उन्होंने 2021 में भारतीय सेना को निजी क्षेत्र द्वारा निर्मित पूर्णतः भारतीय गोला-बारूद और मल्टी-मोड हैंड ग्रेनेड सौंपे जाने का उल्लेख किया।
सोलर ग्रुप द्वारा विकसित नागास्त्र ड्रोन के ऑपरेशन सिंदूर में सफल उपयोग को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया। नागास्त्र के अधिक उन्नत संस्करणों के विकास की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ये हथियार भविष्य में देश के शत्रुओं के लिए अत्यंत घातक साबित होंगे। उन्होंने ‘भार्गवस्त्र’ काउंटर ड्रोन सिस्टम के सफल परीक्षण का भी हवाला देते हुए निजी क्षेत्र की तकनीकी क्षमताओं पर भरोसा जताया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि इस संयंत्र में विकसित पिनाका मिसाइलों का निर्यात शुरू हो चुका है, जिससे भारत अब केवल आयातक नहीं, बल्कि निर्यातक बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को राष्ट्र की आत्मनिर्भरता का उदाहरण बताया और कहा कि युद्ध अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहे, बल्कि ऊर्जा, व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला, प्रौद्योगिकी और सूचना जैसे क्षेत्र भी संघर्ष के नए आयाम बन चुके हैं।
उन्होंने निजी क्षेत्र की भूमिका को 50% या उससे अधिक तक बढ़ाने पर जोर दिया और कहा कि सरकार स्वदेशी प्लेटफॉर्म, सिस्टम और सबसिस्टम के निर्माण को प्राथमिकता दे रही है। उनके अनुसार, 2014 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन 46,425 करोड़ रुपये था, जो अब लगभग 1.51 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। इसमें 33,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान निजी क्षेत्र का है। रक्षा निर्यात भी दस वर्ष पहले 1,000 करोड़ रुपये से कम था, जो अब 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
रक्षा मंत्री ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के संयोजन को देश की सबसे बड़ी ताकत बताया और कहा कि दोनों क्षेत्रों को एक-दूसरे का पूरक बनकर राष्ट्रीय लाभ के लिए काम करना चाहिए।
इस अवसर पर रक्षा सचिव और सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
